श्रीनगर की हजरतबल दरगाह में राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को तोड़े जाने की घटना पर जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. द्रख्शां अंद्राबी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने इसे न सिर्फ दरगाह, बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का अपमान बताया। ईद-ए-मिलाद के मौके पर भीड़ ने रिनोवेशन के बाद लगाए गए राष्ट्रीय प्रतीक को तोड़ दिया, क्योंकि उनका मानना था कि मस्जिद में कोई प्रतिमा नहीं होनी चाहिए।
डॉ. द्रख्शां अंद्राबी ने दोषियों को आतंकवादी बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. द्रख्शां अंद्राबी ने शुक्रवार को श्रीनगर की हजरतबल दरगाह में राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को तोड़े जाने की घटना को बेहद शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दरगाह का अपमान नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय की भावनाओं पर हमला है।
ईद-ए-मिलाद के मौके पर शुक्रवार को हजरतबल दरगाह में जमा हुई भीड़ ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने दरगाह के रिनोवेशन के बाद लगाए गए राष्ट्रीय प्रतीक को तोड़ना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि मस्जिद के अंदर किसी भी तरह की प्रतिमा नहीं होनी चाहिए।
मस्जिद प्रबंधन ने भीड़ को शांत करने की कोशिश की, लेकिन भारी संख्या की वजह से वे नाकाम रहे। गुस्साई भीड़ ने अशोक स्तंभ को तोड़ डाला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें लोग शिलापट्ट पर उकेरे गए अशोक स्तंभ को पत्थर से तोड़ते दिख रहे हैं। बता दें, इस शिलापट्ट का उद्घाटन 3 सितंबर को डॉ. द्रख्शां अंद्राबी ने ही किया था, और इस पर उनका नाम भी लिखा था।
राष्ट्रीय प्रतीक तोड़ने वाले आतंकवादी से कम नहीं
वायरल वीडियो के बाद दरगाह परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए डॉ. अंद्राबी ने कहा, “जिन लोगों ने यह कृत्य किया, वे किसी आतंकवादी से कम नहीं हैं।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने इसे व्यक्तिगत आघात बताते हुए कहा, “जब मैंने प्रतीक को तोड़ा जाता देखा, तो ऐसा लगा जैसे मुझ पर बादल फट पड़ा हो।”
उन्होंने आरोप लगाया, “ये हमलावर एक राजनीतिक दल के गुंडे हैं। इन लोगों ने पहले भी कश्मीर को बर्बाद किया और अब खुलेआम दरगाह के अंदर घुस आए। हमारे प्रशासक भी इस हमले में बाल-बाल बचे, क्योंकि भीड़ ने उन पर भी हमला किया।”
आजीवन दरगाह में प्रवेश पर प्रतिबंध
डॉ. अंद्राबी ने कहा, “इस भीड़ ने राष्ट्रीय प्रतीक को तोड़कर बड़ा अपराध किया है। उन्होंने दरगाह की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। दोषियों की पहचान होते ही उन्हें आजीवन दरगाह में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी।”
उन्होंने इसे राजनीतिक कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों की साजिश बताया। अंद्राबी ने कहा, “मैंने पहले ही चेतावनी दी थी कि ऐसी अराजकता फैलाई जा सकती है। सभी जिम्मेदार लोगों, जिसमें वह विधायक भी शामिल है जिसके ट्वीट ने आग में घी डाला, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी।”
जीर्णोद्धार का मकसद पवित्रता बढ़ाना
अपने रुख को दोहराते हुए डॉ. अंद्राबी ने कहा कि हजरतबल दरगाह के जीर्णोद्धार का मकसद इसकी पवित्रता और लोगों के विश्वास को बढ़ाना था। उन्होंने कहा, “हम ऐसी शर्मनाक हरकतों से डरकर अपने प्रयास कम नहीं करेंगे। दरगाहें इबादत और सम्मान की जगह हैं। यहां किसी को भी राजनीति करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”
नेकां नेता ने अशोक चिह्न को बताया इस्लाम के खिलाफ
हजरतबल दरगाह में अशोक चिह्न लगाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता तनवीर सादिक ने इसे इस्लाम की मूल मान्यता तौहीद के खिलाफ बताया। एक्स पर एक पोस्ट में सादिक ने कहा, “मैं कोई धार्मिक विद्वान नहीं हूं, लेकिन इस्लाम मूर्ति पूजा की सख्त मनाही करता है। यह सबसे बड़ा पाप है। हमारा धर्म तौहीद पर आधारित है।”
उन्होंने तर्क दिया कि दरगाह में अशोक चिह्न, जिसे वे मूर्ति मानते हैं, लगाना तौहीद के सिद्धांत के खिलाफ है। सादिक ने कहा, “पवित्र स्थानों में सिर्फ तौहीद की पवित्रता दिखनी चाहिए।”
