क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर ठगी का खेल अब तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली में एक कारोबारी को मोटे मुनाफे का झांसा देकर 39.5 लाख रुपये ठगने वाले साइबर ठगों के गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस गैंग के मास्टरमाइंड समेत तीन ठगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह फर्जी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और म्यूल बैंक खातों के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। आइए, इस सनसनीखेज मामले की पूरी कहानी जानते हैं।
कैसे फंसा कारोबारी?
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित 47 साल का एक कारोबारी है, जो दिल्ली के महेंद्रू एन्क्लेव में रहता है और स्टेशनरी की दुकान चलाता है। ठगों ने उसे एक फर्जी क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश का लालच दिया। भारी मुनाफे का झांसा देकर उसे फंसाया गया। कारोबारी ने ठगों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में 39.5 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उसे मुनाफा नहीं मिला और ठग गायब हो गए, तब उसने पुलिस में शिकायत दर्ज की।
पुलिस की जांच और गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा करोल बाग के एक प्राइवेट बैंक में ‘आरएस मैनेजमेंट सर्विसेज’ नाम के म्यूल अकाउंट में जमा हुआ था। इस खाते में 17 फरवरी को ठगी के 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। हैरानी की बात यह है कि यह खाता नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कम से कम 9 अन्य शिकायतों से भी जुड़ा था।
पुलिस ने तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर इस गैंग के मास्टरमाइंड कृष्ण कुमार उर्फ मोनू (42) को 20 अगस्त को पहाड़गंज से गिरफ्तार किया। मोनू ठगी के बाद बार-बार घर और मोबाइल नंबर बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था। उसकी निशानदेही पर दीपू (32) को गोपालपुर से पकड़ा गया। दीपू इस गैंग का अहम सदस्य था, जो म्यूल अकाउंट्स की व्यवस्था करता था। तीसरा आरोपी इरफान शेख (31), जीटीबी एन्क्लेव का रहने वाला, भी गिरफ्तार किया गया। इरफान खाताधारकों पर नजर रखता था।
ठगों का चालाकी भरा खेल
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गैंग ‘लेयर्ड ट्रांजैक्शन’ तकनीक का इस्तेमाल करता था। इसमें ठगी की रकम को कई बैंक खातों में तेजी से इधर-उधर किया जाता था, ताकि पैसों का पीछा करना मुश्किल हो जाए। दीपू खाताधारकों को यह कहकर गुमराह करता था कि पैसे गेमिंग गतिविधियों से जुड़े हैं। इस गैंग का एक और सदस्य अरविंद ठगों के संपर्क में रहता था और ठगी की रकम को म्यूल खातों में पहुंचाता था। अरविंद फिलहाल साइबर वेस्ट थाने के एक अन्य मामले में जेल में है। इरफान भी पहले एक ठगी के मामले में गिरफ्तार हो चुका है।
कैसे काम करता था यह गैंग?
- फर्जी प्लेटफॉर्म: ठग एक नकली क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म बनाकर लोगों को मोटा मुनाफा कमाने का लालच देते थे।
- म्यूल अकाउंट्स: ठगी की रकम को कई फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
- लेयर्ड ट्रांजैक्शन: पैसों की ट्रेल छिपाने के लिए रकम को बार-बार अलग-अलग खातों में भेजा जाता था।
- गुमराह करने की रणनीति: खाताधारकों को गेमिंग या अन्य फर्जी गतिविधियों का हवाला देकर गुमराह किया जाता था।
पुलिस की अगली कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इस गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश जारी है। साथ ही, ठगी की गई रकम को रिकवर करने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। साइबर सेल इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए तकनीकी और मैनुअल जांच में जुटी है।
लोगों के लिए सलाह
यह मामला एक बार फिर साइबर ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर करता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की सत्यता जरूर जांच लें। किसी भी अनजान लिंक या प्लेटफॉर्म पर पैसे ट्रांसफर करने से बचें और मोटे मुनाफे के लालच में न फंसें।