जुलाई 2025 के लिए जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े आ चुके हैं, और इस बार देश ने करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये का टैक्स जमा किया है। कुछ राज्यों ने शानदार प्रदर्शन किया, तो कुछ पीछे रह गए। आइए, जानते हैं कि किस राज्य ने बाजी मारी और किसे करना पड़ा निराशा का सामना। साथ ही, पिछले साल के मुकाबले कितना कलेक्शन हुआ, जीएसटी क्या है, इसे कौन भरता है, और आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?

जुलाई 2025 में जीएसटी कलेक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड
जीएसटी क्या है? कौन भरता है
सबसे पहले समझते हैं कि जीएसटी आखिर है क्या। जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स, एक इनडायरेक्ट टैक्स है। यानी ऐसा टैक्स, जो हम सीधे सरकार को नहीं देते, बल्कि सामान या सेवाएं खरीदते वक्त चुपके से चुका देते हैं। जब आप मोबाइल, कपड़े खरीदते हैं या रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं, तो बिल में जो टैक्स जुड़ा होता है, वही जीएसटी है।
हर कोई जीएसटी भरता है – चाहे आप ग्राहक हों, व्यापारी हों या कंपनी। लेकिन इसे सरकार तक पहुंचाने का काम उस व्यापारी या कंपनी का होता है, जो सामान या सेवा बेच रही है। जीएसटी को चार हिस्सों में बांटा गया है:
- सीजीएसटी: ये केंद्र सरकार के खाते में जाता है।
- एसजीएसटी: ये राज्य सरकार को मिलता है।
- आईजीएसटी: जब सामान एक राज्य से दूसरे राज्य में बेचा जाता है।
- कंपनसेशन सेस: लग्जरी सामान या तंबाकू जैसी चीजों पर लगने वाला अतिरिक्त टैक्स।
जुलाई 2025 का जीएसटी कलेक्शन: कितना और कैसे
जुलाई 2025 में कुल 1,95,735 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ। इसमें हिस्सेदारी कुछ ऐसी रही:
- सीजीएसटी: 35,470 करोड़ रुपये
- एसजीएसटी: 44,555 करोड़ रुपये
- आईजीएसटी: 1,03,536 करोड़ रुपये (जिसमें 51,626 करोड़ रुपये आयात से आए)
- कंपनसेशन सेस: 12,670 करोड़ रुपये
लेकिन रिफंड को एडजस्ट करने के बाद नेट कलेक्शन रहा 1,38,588 करोड़ रुपये। ये पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 1.7% ज्यादा है, क्योंकि इस बार करीब 27,000 करोड़ रुपये के रिफंड दिए गए।
राज्यों का प्रदर्शन: कौन आगे, कौन पीछे
कुछ छोटे राज्यों ने इस बार कमाल कर दिखाया। त्रिपुरा ने साल-दर-साल (Year-on-Year) 41% की शानदार ग्रोथ दर्ज की, जो देश में सबसे ज्यादा है। मेघालय में जीएसटी कलेक्शन 26% बढ़ा, तो सिक्किम ने 23% की उछाल हासिल की।
बड़े राज्यों की बात करें तो:
- मध्य प्रदेश ने 18% की ग्रोथ दिखाई।
- बिहार में 16% की वृद्धि दर्ज हुई।
- आंध्र प्रदेश में कलेक्शन 14% बढ़ा।
- महाराष्ट्र ने 30,590 करोड़ रुपये जमा किए और 6% की सालाना ग्रोथ हासिल की।
लेकिन हर जगह खुशी का माहौल नहीं रहा। कुछ राज्यों में कलेक्शन में गिरावट देखी गई:
- मणिपुर में 36% की भारी गिरावट।
- मिजोरम में 21% की कमी।
- जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ में करीब 5% की गिरावट।
त्योहारी सीजन और भविष्य की उम्मीदें
त्योहारी सीजन नजदीक है, और उम्मीद है कि जीएसटी कलेक्शन में और उछाल आएगा। सरकार अब एआई आधारित टैक्स निगरानी, डिजिटल ऑडिट, और टैक्स बेस बढ़ाने पर जोर दे रही है। लेकिन राज्यों के बीच असमानता और टैक्स स्ट्रक्चर की कमियों को दूर करना भी जरूरी है।
जीएसटी और आम आदमी
जीएसटी का आंकड़ा बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था चल रही है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि लोग खरीदारी कर रहे हैं, बिजनेस चल रहे हैं, और सरकार को टैक्स मिल रहा है। लेकिन अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सुधारों की जरूरत है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को “डेड इकॉनमी” कहा और 7 अगस्त से भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की। लेकिन जुलाई के जीएसटी आंकड़े दिखाते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था न सिर्फ जिंदा है, बल्कि साल-दर-साल मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।
