भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक तीन गुना बढ़ने की राह पर है, और ये खबर इतनी बड़ी है कि इसे समझना तो बनता है! अगर भारत इस रास्ते पर चलता रहा, तो वो अमेरिका और चीन जैसे दिग्गजों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर तीसरे या चौथे नंबर पर आ सकता है। जी हां, आपने सही सुना! अमेरिका तो अमेरिका है, वहां डोनाल्ड ट्रंप की हलचल चल रही है, और चीन में शी जिनपिंग अपनी रणनीतियों के साथ डटा हुआ है। लेकिन अब भारत भी इस रेस में शामिल होने जा रहा है। तो आइए, जानते हैं कि भारत ये कमाल कैसे करने वाला है, सरकार क्या-क्या कर रही है, किन देशों के साथ डील हुई है, और सेमीकंडक्टर इतना जरूरी क्यों है। साथ ही, हमारी अर्थव्यवस्था को इससे कैसे फायदा होगा।
भारत का सेमीकंडक्टर बाजार: कहां से कहां तक?
2023 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 38 अरब डॉलर का था। 2024-25 में ये 45 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच गया। और 2030 तक? अनुमान है कि ये 100 से 110 अरब डॉलर का हो जाएगा! यानी सिर्फ 7 साल में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी 1% से बढ़कर 6.21% तक पहुंच सकती है। ये 16% की सालाना वृद्धि के साथ हो रहा है, जो कि बहुत बड़ी बात है
अब जरा तुलना करें। 2023 में चीन का सेमीकंडक्टर बाजार 177.8 अरब डॉलर का था, जो वैश्विक बाजार का 32% हिस्सा है, और वो 16-18% उत्पादन करता है। दूसरी तरफ, अमेरिका का चिप बाजार 130 अरब डॉलर का था, जो वैश्विक बाजार का 25% है, लेकिन उत्पादन सिर्फ 12%। भारत अभी 1% उत्पादन करता है, लेकिन 2030 तक 6.21% हिस्सेदारी के साथ वो इस रेस में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वो दिन दूर नहीं जब भारत इस क्षेत्र में लीडर बनकर उभरेगा
सेमीकंडक्टर क्या है और क्यों है इतना खास?
सेमीकंडक्टर वो खास सामग्री होती है, जिसकी बिजली चालकता कंडक्टर और इंसुलेटर के बीच होती है। सामान्य तापमान पर ये सीमित बिजली संचालित करते हैं, लेकिन तापमान बढ़ाने या डोपिंग के जरिए इनकी चालकता को कंट्रोल किया जा सकता है। यही खासियत इन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स की रीढ़ बनाती है।
प्रमुख सेमीकंडक्टर:
- सिलिकॉन: सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला सेमीकंडक्टर।
- जर्मेनियम: खास उपकरणों में यूज होता है।
- गैलियम आर्सेनाइड: हाई-स्पीड और रेडियो फ्रीक्वेंसी डिवाइस में काम आता है।
सेमीकंडक्टर का उपयोग:
- इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस: स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी, वाशिंग मशीन, और एलईडी लाइट्स।
- इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी): गाड़ियां, बाइक, स्कूटी, और चार्जिंग स्टेशन।
- ग्रीन एनर्जी: सोलर पैनल, हाइड्रोजन रेलवे, और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम।
- ट्रांजिस्टर और डायोड: सिग्नल बढ़ाने, स्विचिंग, और बिजली को एक दिशा में प्रवाहित करने में।
- इंटीग्रेटेड सर्किट: हजारों-लाखों ट्रांजिस्टर वाली चिप्स, जो कंप्यूटर, मोबाइल, और ग्राफिक्स कार्ड में इस्तेमाल होती हैं।
कल्पना कीजिए, इतना बड़ा बाजार! मोबाइल से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों तक, हर जगह सेमीकंडक्टर की जरूरत है। यही वजह है कि ये भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
भारत की प्रगति के पीछे क्या है?
भारत का सेमीकंडक्टर बाजार इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है? आइए, इसके पीछे के कारणों को समझते हैं।
1. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम)
2021 में शुरू हुआ ये मिशन भारत को चिप निर्माण का हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इसके लिए सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये का फंड रखा है। इससे चिप फैब्रिकेशन यूनिट्स, डिजाइन इनोवेशन, रिसर्च इंस्टीट्यूट, और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिल रहा है।
2. सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम
ये प्रोग्राम चिप डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन को सपोर्ट करता है। स्टार्टअप्स और एमएसएमई को लिंक्ड इंसेंटिव्स मिलते हैं, जिससे नई तकनीक विकसित हो रही है। ये असेंबली, टेस्टिंग, मार्केटिंग, और पैकेजिंग को भी मजबूत करता है।
3. वैश्विक साझेदारियां
- आईसीईटी (इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी): 2023 में भारत और अमेरिका ने मिलकर इसकी शुरुआत की। सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, 5G, और 6G जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। अमेरिका की उन्नत तकनीक और भारत की तकनीकी प्रतिभा मिलकर गेम बदल रही है।
- अन्य देश: जापान और यूरोपीय देशों के साथ भी तकनीकी सहयोग बढ़ रहा है।
4. निजी निवेश
- माइक्रोन टेक्नोलॉजी: जून 2023 में गुजरात के साणंद में 22,516 करोड़ रुपये की एटीएमपी सुविधा की घोषणा।
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स: फरवरी 2024 में ताइवान की पावरचिप के साथ मिलकर धोलेरा, गुजरात में 91,000 करोड़ रुपये का निवेश, जो 50,000 वेफर्स प्रति माह बनाएगा।
- एचसीएल और फॉक्सकॉन: उत्तर प्रदेश के जेवर में 3,700 करोड़ रुपये का निवेश, जो 3.6 करोड़ चिप्स सालाना बनाएगा।
- सीजी पावर: साणंद में 7,600 करोड़ रुपये का प्लांट, जो रोजाना 1.5 करोड़ चिप्स बनाएगा।
- टाटा सेमीकंडक्टर: असम के मोरीगांव में 27,000 करोड़ रुपये की सुविधा, जो रोज 4.8 करोड़ चिप्स बनाएगी।
- केन्स सेमिकॉन: साणंद में 3,307 करोड़ रुपये का निवेश, जो रोज 63.3 लाख चिप्स बनाएगा।
5. स्वदेशी चिप और इंफ्रास्ट्रक्चर
2025 में भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन शुरू हो गया। पांच नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स बन रही हैं। 2070 शैक्षणिक संस्थान और 70 स्टार्टअप्स चिप डिजाइन और रिसर्च में जुटे हैं।
भारत को क्या फायदा होगा?
- विशाल घरेलू बाजार: मोबाइल, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग भारत में बहुत ज्यादा है। इससे घरेलू जरूरतें पूरी होंगी और निर्यात की संभावना भी बढ़ेगी।
- आर्थिक विकास: सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री से रोजगार, निवेश, और जीडीपी में बढ़ोतरी होगी।
- रणनीतिक आत्मनिर्भरता: विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी, जो भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाएगा।
- वैश्विक लीडरशिप: भारत एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर हब बनकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार के प्रयास
- नीतिगत समर्थन: सब्सिडी और इंसेंटिव्स से उद्योगों को बढ़ावा।
- कौशल विकास: 85,000 इंजीनियरों को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रशिक्षित करने की योजना।
- सेमिकॉन इंडिया 2025: 2-4 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन, जिसमें 18 देशों के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
- मजबूत संसाधन: भारत के पास रसायन, खनिज, और गैसों के भंडार हैं, जो चिप उत्पादन के लिए जरूरी हैं।
सेमीकंडक्टर की वैश्विक रेस में भारत
वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत इसमें एक बड़ा हिस्सा लेने को तैयार है। ताइवान, दक्षिण कोरिया, और चीन अभी लीडर हैं, लेकिन भारत की तेज रफ्तार और रणनीतिक कदम इसे ग्लोबल हब बना सकते हैं।
URL: www.retimesindia.com/india-semiconductor-market-boom-2030-global-leadership
