Retimes india
  • Home
  • Education News
  • Technology
  • Uncategorized
  • India News
  • Science
  • sports
  • Stock Market News
  • Defence News
Reading: हाई कोर्ट के जज ने कहाँ आप हिंदी में जवाब क्यों दे रहे हैं: क्या आपको अंग्रेजी नहीं आती:क्या अंग्रेजी न बोल पाना अक्षमता का प्रमाण है
Share
Retimes indiaRetimes india
Font ResizerAa
  • Home
  • Education News
  • Technology
  • Uncategorized
  • India News
  • Science
  • sports
  • Stock Market News
  • Defence News
  • Home
  • Education News
  • Technology
  • Uncategorized
  • India News
  • Science
  • sports
  • Stock Market News
  • Defence News
© All Rights Reserved. Retimes India. Hosted on Elga Cloud Web Hosting Company.
Retimes india > Blog > India News > हाई कोर्ट के जज ने कहाँ आप हिंदी में जवाब क्यों दे रहे हैं: क्या आपको अंग्रेजी नहीं आती:क्या अंग्रेजी न बोल पाना अक्षमता का प्रमाण है
India News

हाई कोर्ट के जज ने कहाँ आप हिंदी में जवाब क्यों दे रहे हैं: क्या आपको अंग्रेजी नहीं आती:क्या अंग्रेजी न बोल पाना अक्षमता का प्रमाण है

Retimes india
Last updated: July 30, 2025 5:07 pm
Retimes india
Share
SHARE

उत्तराखंड हाईकोर्ट की नैनीताल बेंच में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने भाषा और कार्यक्षमता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह याचिका आकाश बोरा ने दायर की थी, जिसमें बुदलाकोट गांव की मतदाता सूची में 82 बाहरी लोगों के नाम शामिल करने का आरोप था। इस मामले में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) विवेक राय से सवाल-जवाब के दौरान उन्होंने हिंदी में जवाब दिया। इस पर मुख्य न्यायाधीश गोहनाथन नरेंद्र और जस्टिस आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि क्या एक एडीएम स्तर का अधिकारी, जिसे अंग्रेजी बोलने में दिक्कत हो, वह अपने पद के लिए सक्षम है? इस टिप्पणी ने न केवल विवाद को जन्म दिया, बल्कि यह सवाल भी उठाया कि क्या अंग्रेजी न बोल पाना किसी की कार्यक्षमता पर सवाल उठाने का आधार हो सकता है।

मामला क्या था?

आकाश बोरा की याचिका में दावा किया गया था कि बुदलाकोट की मतदाता सूची में बाहरी लोगों, जिनमें ओसा और अन्य क्षेत्रों के लोग शामिल थे, के नाम गलत तरीके से जोड़े गए। इसकी शिकायत स्थानीय उप-जिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) से की गई थी, जिन्होंने जांच कमेटी बनाई। जांच में 18 नाम गलत पाए गए, लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान जब विवेक राय ने हिंदी में जवाब दिया, तो जजों ने उनकी अंग्रेजी बोलने की क्षमता पर सवाल उठाए। राय ने विनम्रता से कहा कि वह अंग्रेजी समझते हैं, लेकिन बोलने में उतनी सहजता नहीं है। इसके जवाब में कोर्ट ने उनकी कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए उत्तराखंड के मुख्य सचिव को जांच का आदेश दिया कि क्या ऐसे अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम हैं।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

इस आदेश के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस बीच, मूल याचिका का मुद्दा (मतदाता सूची में गड़बड़ी) पीछे छूट गया, और बहस का केंद्र बन गया कि क्या अंग्रेजी न बोल पाना कार्यक्षमता की कमी का सबूत है।

अंग्रेजी और कार्यक्षमता का मिथक

जजों का यह सवाल कि क्या अंग्रेजी न बोल पाने वाला अधिकारी सक्षम हो सकता है, एक गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मुद्दे को उजागर करता है। भारत में अंग्रेजी को अक्सर बुद्धिमत्ता और कार्यक्षमता का पैमाना माना जाता रहा है, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली और मैकाले की नीतियों की देन है। इस मानसिकता ने देश में प्रतिभाओं को दबाया और स्थानीय भाषाओं को दोयम दर्जा दिया। अगर अंग्रेजी बोलना ही कार्यक्षमता का मापदंड है, तो क्या ब्रिटेन और अमेरिका के सामान्य कर्मचारी, जो अंग्रेजी बोलते हैं, भारत के अधिकारियों से अधिक सक्षम हैं? यह तर्क न केवल गलत है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को नजरअंदाज करता है।

विवेक राय ने स्पष्ट किया कि वह अंग्रेजी समझते हैं, लेकिन बोलने में सहज नहीं हैं। क्या इससे उनकी प्रशासनिक क्षमता कम हो जाती है? भारत में प्रशासनिक अधिकारियों को स्थानीय भाषाएं, जैसे तमिल, उड़िया, गुजराती, या मराठी, सीखने की सलाह दी जाती है ताकि वे स्थानीय लोगों से बेहतर संवाद कर सकें। उत्तराखंड में स्थानीय पहाड़ी बोली जानना ज्यादा महत्वपूर्ण है, न कि अंग्रेजी में धाराप्रवाह बोलना।

भाषा और सांस्कृतिक गुलामी

यह मामला भारत में भाषाई गुलामी की गहरी जड़ों को उजागर करता है। स्वतंत्रता के 77 साल बाद भी हम अंग्रेजी को ज्ञान और सक्षमता का पर्याय मानते हैं। स्वर्गीय वेद प्रताप वैदिक जैसे विद्वानों ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की मांग की थी, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को मौका मिले। लेकिन आज भी यूपीएससी और अन्य परीक्षाओं में अंग्रेजी को अनावश्यक महत्व दिया जाता है। भारत, जो संस्कृत और हिंदी जैसी समृद्ध भाषाओं का देश है, अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कट रहा है।

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कहा था, “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, रहत नये को शूल।” यह शूल आज भी हमें चुभ रहा है। अगर अंग्रेजी न बोल पाना अक्षमता का प्रमाण है, तो क्या हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी, या मालवी बोलने वाले लोग कम सक्षम हैं? यह सोच हमारी सांस्कृतिक पहचान पर प्रहार है।

अंग्रेजी से परहेज नहीं, मानसिकता से आपत्ति

अंग्रेजी सीखने या बोलने में कोई बुराई नहीं है। यह एक वैश्विक भाषा है, और इसे जानना फायदेमंद है। लेकिन इसे कार्यक्षमता का एकमात्र पैमाना मानना गलत है। एक व्यक्ति जो हिंदी, तमिल, उड़िया, या स्थानीय बोली में पारंगत है, वह अपने कर्तव्यों को उतनी ही कुशलता से निभा सकता है। भाषा संवाद का माध्यम है, न कि बुद्धिमत्ता या क्षमता का मापदंड।

नैनीताल हाईकोर्ट का यह मामला एक उदाहरण है कि कैसे हमारी मानसिकता औपनिवेशिक सोच से मुक्त नहीं हुई है। यह केवल एक अधिकारी की कार्यक्षमता का सवाल नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान और आत्मसम्मान का मुद्दा है।

निष्कर्ष

विवेक राय का हिंदी में जवाब देना कोई अपराध नहीं था। उनकी कार्यक्षमता को अंग्रेजी न बोल पाने के आधार पर आंकना न केवल गलत है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक गुलामी को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप कर सही कदम उठाया है। यह समय है कि हम भाषा को लेकर अपनी सोच बदलें और भारतीय भाषाओं को वह सम्मान दें, जिसकी वे हकदार हैं। अंग्रेजी से परहेज नहीं, लेकिन इसे कार्यक्षमता का पैमाना बनाने की मानसिकता से आपत्ति जरूर है।

Subscribe to Our Newsletter
Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!
TAGGED:अंग्रेजी विवादउत्तराखंड हाईकोर्टजनहित याचिकानैनीताल हाईकोर्टभाषा और कार्यक्षमतामतदाता सूचीविवेक रायसांस्कृतिक गुलामीसुप्रीम कोर्टहिंदी भाषा
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article Crypto Market Update: Best Cryptos to Trade: Bitcoin, Ethereum, Solana, and Binance Coin क्रिप्टो मार्केट अपडेट: बिटकॉइन, इथेरियम, सोलाना, और बाइनेंस कॉइन में ट्रेडिंग के लिए सबसे अच्छी क्रिप्टो
Next Article NSDL IPO: Fall in GMP an opportunity or a risky bet for investors NSDL IPO: GMP में गिरावट निवेशकों के लिए अवसर या जोखिम भरा दांव
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Headlines

कुनिका सदानंद की ‘दादागिरी’ से बिग बॉस 19 में मचा बवाल! सलमान का सपोर्ट या ओवरकॉन्फिडेंस?

बिग बॉस 19 में कुनिका सदानंद की बॉस लेडी छवि ने तहलका मचा दिया! उनकी…

4 Min Read

जियो पीसी: रिलायंस जियो का नया क्लाउड-आधारित कंप्यूटिंग सर्विस

रिलायंस जियो ने एक बार फिर सबको चौंकाते हुए एक नई सेवा JioPC लॉन्च की है। यह…

9 Min Read

यूपी पुलिस इंस्पेक्टर नरगिस खान पर आय से अधिक संपत्ति का मामला: मेरठ में FIR दर्ज

मेरठ, 5 जून 2025 – उत्तर प्रदेश पुलिस की इंस्पेक्टर नरगिस खान एक बार फिर…

5 Min Read

तूफान काजिकी ने हिलाया चीन का हैनान द्वीप, अब वियतनाम की ओर बढ़ा; भारी बारिश और तबाही की चेतावनी

“चीन में 20,000 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए, वियतनाम में फसलों को बचाने की…

3 Min Read

ट्रंप के टैरिफ से परेशान ब्रिक्स देशों की बैठक में भारत की कमान संभालेंगे जयशंकर, पीएम मोदी क्यों नहीं

अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ब्राजील द्वारा बुलाई गई ब्रिक्स देशों की खास…

3 Min Read

TCS का भोपाल ऑफिस बंद होने जा रहा? कंपनी ने तोड़ी चुप्पी, 1000 नौकरियां नहीं जाएंगी!

भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने भोपाल ऑफिस को लेकर…

3 Min Read

पीएम मोदी के 75वें जन्मदिवस पर ABVP का रक्तदान महाअभियान: 10 ने रक्तदान किया, 14 नए बने डोनर

उत्तर-प्रदेश-मैनपुरी :अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) मैनपुरी ने रक्तदान के महाअभियान  के तहत कार्यक्रम आयोजित…

1 Min Read

जीएसटी रिवैंप 2025: 12% टैक्स स्लैब हटाने की तैयारी, आम आदमी और व्यवसायों को मिलेगी राहत

भारत में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) को 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया…

7 Min Read

सिर्फ 37 घंटे चली लोकसभा! संसद का मानसून सत्र हंगामे में डूबा, जानें क्या-क्या नहीं हो पाया पास

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 2025 जोरदार हंगामे और विवादों की भेंट चढ़ गया।…

4 Min Read

बिग बॉस 19: 6 साल की उम्र में 30 घंटे काम, सेट पर बेहोश हुईं अशनूर कौर, सुनाया दर्द भरा किस्सा!

बिग बॉस 19 में इन दिनों धमाल मचा रहीं एक्ट्रेस अशनूर कौर बचपन से ही…

2 Min Read

You Might Also Like

Salman Khan's life in danger: Strict security on 'Bigg Boss' set, live audience banned
India News

सलमान खान की जान को खतरा: ‘बिग बॉस’ सेट पर सख्त सुरक्षा, लाइव ऑडियंस पर रोक, हर कर्मचारी की स्क्रूटनी!

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की सुरक्षा को लेकर 'बिग बॉस' के मेकर्स कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। सलमान को मिल…

4 Min Read
RBI's new rule: Loan prepayment and foreclosure charges abolished
India News

RBI का नया नियम: लोन प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्ज खत्म, जानें पूरा फायदा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट वाले लोन पर लगने वाले प्री-पेमेंट चार्ज (PPC) को खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला किया है।…

7 Min Read
GST Rate Cut: Now companies will not be able to cheat! Two MRPs will have to be shown on old stock
India News

GST Rate Cut: अब कंपनियां नहीं कर पाएंगी धोखा! पुराने स्टॉक पर दिखाने होंगे दो MRP, सरकार का सख्त आदेश

त्योहारों से पहले सरकार ने ग्राहकों को बड़ी राहत दी है! जीएसटी दरों में कटौती का फायदा अब सीधे उपभोक्ताओं…

3 Min Read

अमेरिकी टैरिफ का दबाव? पीएम मोदी बोले- ‘हम सब झेल लेंगे, किसानों का हित सबसे पहले!’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50% अमेरिकी टैरिफ की समय-सीमा से पहले साफ कर दिया कि भारत किसी भी दबाव को…

3 Min Read
Retimes india

Popular Category

  • India News
  • Stock Market News
  • Technology
  • Education News

Latest Vews

  • Defence News
  • Education News
  • Science
  • sports

Policy Pages

  • About Us
  • DMCA
  • Term and Conditions
  • Privacy Policy

Get in Touch

  • Contact

© All Rights Reserved. Retimes India. Hosted on Elga Cloud Web Hosting Company.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?