आगरा पुलिस ने एक बड़े अवैध धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ किया है जिसमें दिल्ली के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के दो बेटों अब्दुल्लाह, अब्दुल रहीम और रोहतक की एक दलित युवती से जबरन निकाह करने वाले जुनैद को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह पूरे देश में फैले शिक्षण संस्थानों में सक्रिय था और युवतियों को धर्मांतरण के लिए फंसाता था।
युवतियों को फंसाने की चार चरणीय रणनीति
पहला चरण: दोस्ती और प्रलोभन
पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य विभिन्न राज्यों के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में छात्राओं से दोस्ती करते थे। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें इस्लाम के बारे में आकर्षक बातें बताई जाती थीं। आर्थिक मदद, बेहतर जीवन और “जन्नत का रास्ता” जैसे प्रलोभन दिए जाते थे।
दूसरा चरण: अलगाव और दबाव
एक बार युवती प्रभावित हो जाने के बाद, उसे परिवार और दोस्तों से अलग-थलग कर दिया जाता था। गोवा की एसबी कृष्णा (अब आयशा) के मामले में उसे कश्मीर ले जाया गया था। इस दौरान उन्हें धार्मिक किताबें पढ़ने के लिए दबाव बनाया जाता था।
तीसरा चरण: जबरन धर्मांतरण और निकाह
युवतियों का जबरन धर्मांतरण कराया जाता था और उनकी शादी गिरोह के सदस्यों से करा दी जाती थी। रोहतक की दलित युवती के साथ भी ऐसा ही हुआ था। सभी कानूनी दस्तावेज तैयार किए जाते थे ताकि बाद में कोई कानूनी कार्रवाई न कर सके।
चौथा चरण: शोषण और नियंत्रण
धर्मांतरण के बाद युवतियों से घरेलू काम करवाया जाता था और उन्हें बुर्के में रखा जाता था। कई मामलों में उन्हें धोखा दिया जाता था – जैसे जुनैद नाम के युवक ने पहले से शादी होने के बावजूद दूसरी शादी की थी।
गिरोह का राष्ट्रीय नेटवर्क
पुलिस के अनुसार यह गिरोह दिल्ली, आगरा, कोलकाता, पंजाब और कश्मीर में सक्रिय था। गिरोह की कई महिला सदस्य भी थीं जो युवतियों को फंसाने का काम करती थीं। आरोपी अब्दुल रहमान का पूरा परिवार इस गिरोह में शामिल था।
पीड़िताओं की दर्दभरी कहानियां
- गोवा की एसबी कृष्णा को पंजाब यूनिवर्सिटी में फंसाया गया
- रोहतक की दलित युवती से जबरन निकाह कराया गया
- कई युवतियों को घर वापसी का रास्ता नहीं मिल पाया
पुलिस ने गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और मामले की गहन जांच जारी है। यह मामला देशभर में अवैध धर्मांतरण की समस्या की गंभीरता को उजागर करता है।