भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने राजस्थान के डीग जिले के बहाज गांव में एक ऐतिहासिक खोज की है। यहां की खुदाई में 3000 साल पुरानी एक प्राचीन नदी प्रणाली के अवशेष मिले हैं, जिसे विशेषज्ञ ऋग्वेद में वर्णित पौराणिक सरस्वती नदी से जोड़ रहे हैं। यह खोज भारत के प्राचीन इतिहास को नए सिरे से लिखने की क्षमता रखती है।
प्राचीन सभ्यता के प्रमाण मिले
अप्रैल से मई 2024 के बीच हुई इस खुदाई में 3500 से 1000 ईसा पूर्व की बस्तियों के साक्ष्य मिले हैं। यहां कुषाण, मगध और शुंग काल की संस्कृतियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। खुदाई में मिली नदी प्रणाली को ASI के पुरातत्वविद् विनय गुप्ता ने “अभूतपूर्व खोज” बताया है, जो प्राचीन काल में यहां के निवासियों के जीवन और व्यापार को समझने में मदद करेगी।
औद्योगिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के सबूत
इस क्षेत्र में शुंग काल (200-100 ईसा पूर्व) की एक बड़ी औद्योगिक गतिविधि के प्रमाण मिले हैं। खुदाई में शंख से बने उत्पाद, मनके, कंघियां और धातु के औजार मिले हैं, जो यहां के निवासियों के उन्नत कौशल को दर्शाते हैं। साथ ही, चावल, गेहूं, मूंग और बेर के बीजों के अवशेष भी मिले हैं, जो कृषि व्यवस्था को दर्शाते हैं।
महाभारत काल से जुड़े संकेत
खुदाई में मिले चित्रित धूसर मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) महाभारत काल की संस्कृति से मेल खाते हैं। इसके अलावा, यहां से ब्राह्मी लिपि में लिखी दो मुहरें, यज्ञकुंड, शिव-पार्वती की टेराकोटा मूर्तियां और तांबे के सिक्के भी मिले हैं। ये सभी खोजें इस बात का संकेत देती हैं कि यह क्षेत्र धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध था।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
बहाज गांव ब्रज 84 कोस परिक्रमा का हिस्सा है और इसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र ब्रजनाभ का निवास स्थान माना जाता है। इस क्षेत्र में मिले अवशेष न केवल भारत के प्राचीन इतिहास को समझने में मदद करेंगे, बल्कि हड़प्पा और वैदिक सभ्यता के बीच के संबंधों पर भी नई रोशनी डाल सकते हैं।
यह खोज ASI के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और भारत के गौरवशाली अतीत को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
