जमशेदपुर: 20 वर्षीय रोहित कुमार ने NEET 2025 में 549 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 12,484 प्राप्त की है। उनकी यह सफलता किसी जुनून से कम नहीं—क्योंकि उनका सफर गरीबी, संघर्ष और अथक मेहनत की एक ऐसी कहानी है, जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
संघर्षों से भरा रास्ता: पिता सब्ज़ी बेचते हैं, भाई के साथ चलाई मोबाइल दुकान
- रोहित के पिता एक ठेले पर सब्ज़ी बेचते हैं और माँ गृहिणी हैं। परिवार की महीने की आय ₹20,000 से भी कम।
- पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ मोबाइल कवर की दुकान चलाई ताकि घर की आर्थिक मदद कर सकें।
- कोविड काल में 10वीं के बाद उन्हें मेडिकल स्टोर पर काम करना पड़ा—यहीं से डॉक्टर बनने का सपना जगा।
NEET की तैयारी: यूट्यूब से पढ़ाई, पहले प्रयास में 485, दूसरे में 619 अंक!
- 11वीं में PCB लेने के बाद ही NEET के बारे में पता चला—फिर भी खुद से यूट्यूब देखकर पढ़ाई शुरू की।
- पहले प्रयास (2024) में 485 अंक आए, लेकिन हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में 619 अंक हासिल किए।
- परीक्षा विवादों के चलते फाइनल स्कोर 549 तय हुआ, लेकिन रोहित ने हिम्मत नहीं हारी।
“मेहनत करने वाला कभी खाली हाथ नहीं लौटता!”
रोहित की सफलता साबित करती है कि संसाधनों की कमी सपनों की राह नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा:
“मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन डॉक्टर बनने का सपना पूरा होगा। लेकिन मेहनत और लगन से कुछ भी असंभव नहीं। मैं उन सभी बच्चों को मोटिवेट करना चाहता हूँ जो आर्थिक तंगी के कारण हार मान लेते हैं।”
आगे का लक्ष्य: सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस
अब रोहित का लक्ष्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर डॉक्टर बनना है। उनकी कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल हालात में भी सपने देखना नहीं छोड़ता।
