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भारत ने बनाई देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग, उत्तराखंड की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

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Last updated: July 6, 2025 5:07 pm
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भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देवप्रयाग और जनसु के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह सुरंग हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बनाई गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का इस्तेमाल किया गया। इससे उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से बनी सुरंग

इस सुरंग के निर्माण में दुनिया की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘शिव’ और ‘शक्ति’ का उपयोग किया गया। ये मशीनें अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जानी जाती हैं। TBM ‘शिव’ ने 820 दिनों में अपना हिस्सा पूरा किया, जबकि ‘शक्ति’ ने 851 दिनों में काम समाप्त किया। 16 अप्रैल 2025 को इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर पूरा घोषित किया गया।

यात्रा समय में भारी कमी

यह सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है, जो पहाड़ी इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके चालू होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और आपदा राहत कार्यों में लगी एजेंसियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाराणसी जिले के रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुल 10 रेलवे स्टेशन हैं: वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, काशी, वाराणसी सिटी, भगवानपुर, सराय मोहना, बाबतपुर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश), जंघाई और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

RAC यात्रियों के लिए अच्छी खबर

भारतीय रेलवे ने RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब RAC टिकट वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

इस नई रेल सुरंग के पूरा होने से न केवल उत्तराखंड के लोगों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भारत के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण है।भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देवप्रयाग और जनसु के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह सुरंग हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बनाई गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का इस्तेमाल किया गया। इससे उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से बनी सुरंग

इस सुरंग के निर्माण में दुनिया की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘शिव’ और ‘शक्ति’ का उपयोग किया गया। ये मशीनें अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जानी जाती हैं। TBM ‘शिव’ ने 820 दिनों में अपना हिस्सा पूरा किया, जबकि ‘शक्ति’ ने 851 दिनों में काम समाप्त किया। 16 अप्रैल 2025 को इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर पूरा घोषित किया गया।

यात्रा समय में भारी कमी

यह सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है, जो पहाड़ी इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके चालू होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और आपदा राहत कार्यों में लगी एजेंसियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाराणसी जिले के रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुल 10 रेलवे स्टेशन हैं: वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, काशी, वाराणसी सिटी, भगवानपुर, सराय मोहना, बाबतपुर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश), जंघाई और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

RAC यात्रियों के लिए अच्छी खबर

भारतीय रेलवे ने RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब RAC टिकट वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

इस नई रेल सुरंग के पूरा होने से न केवल उत्तराखंड के लोगों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भारत के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण है।भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देवप्रयाग और जनसु के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह सुरंग हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बनाई गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का इस्तेमाल किया गया। इससे उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से बनी सुरंग

इस सुरंग के निर्माण में दुनिया की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘शिव’ और ‘शक्ति’ का उपयोग किया गया। ये मशीनें अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जानी जाती हैं। TBM ‘शिव’ ने 820 दिनों में अपना हिस्सा पूरा किया, जबकि ‘शक्ति’ ने 851 दिनों में काम समाप्त किया। 16 अप्रैल 2025 को इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर पूरा घोषित किया गया।

यात्रा समय में भारी कमी

यह सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है, जो पहाड़ी इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके चालू होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और आपदा राहत कार्यों में लगी एजेंसियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाराणसी जिले के रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुल 10 रेलवे स्टेशन हैं: वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, काशी, वाराणसी सिटी, भगवानपुर, सराय मोहना, बाबतपुर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश), जंघाई और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

RAC यात्रियों के लिए अच्छी खबर

भारतीय रेलवे ने RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब RAC टिकट वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

इस नई रेल सुरंग के पूरा होने से न केवल उत्तराखंड के लोगों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भारत के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण है।भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देवप्रयाग और जनसु के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह सुरंग हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बनाई गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का इस्तेमाल किया गया। इससे उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से बनी सुरंग

इस सुरंग के निर्माण में दुनिया की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘शिव’ और ‘शक्ति’ का उपयोग किया गया। ये मशीनें अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जानी जाती हैं। TBM ‘शिव’ ने 820 दिनों में अपना हिस्सा पूरा किया, जबकि ‘शक्ति’ ने 851 दिनों में काम समाप्त किया। 16 अप्रैल 2025 को इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर पूरा घोषित किया गया।

यात्रा समय में भारी कमी

यह सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है, जो पहाड़ी इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके चालू होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और आपदा राहत कार्यों में लगी एजेंसियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाराणसी जिले के रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुल 10 रेलवे स्टेशन हैं: वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, काशी, वाराणसी सिटी, भगवानपुर, सराय मोहना, बाबतपुर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश), जंघाई और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

RAC यात्रियों के लिए अच्छी खबर

भारतीय रेलवे ने RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब RAC टिकट वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

इस नई रेल सुरंग के पूरा होने से न केवल उत्तराखंड के लोगों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भारत के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण है।भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देवप्रयाग और जनसु के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह सुरंग हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बनाई गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का इस्तेमाल किया गया। इससे उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से बनी सुरंग

इस सुरंग के निर्माण में दुनिया की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘शिव’ और ‘शक्ति’ का उपयोग किया गया। ये मशीनें अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जानी जाती हैं। TBM ‘शिव’ ने 820 दिनों में अपना हिस्सा पूरा किया, जबकि ‘शक्ति’ ने 851 दिनों में काम समाप्त किया। 16 अप्रैल 2025 को इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर पूरा घोषित किया गया।

यात्रा समय में भारी कमी

यह सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है, जो पहाड़ी इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके चालू होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और आपदा राहत कार्यों में लगी एजेंसियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाराणसी जिले के रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुल 10 रेलवे स्टेशन हैं: वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, काशी, वाराणसी सिटी, भगवानपुर, सराय मोहना, बाबतपुर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश), जंघाई और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

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भारतीय रेलवे ने RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब RAC टिकट वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

इस नई रेल सुरंग के पूरा होने से न केवल उत्तराखंड के लोगों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भारत के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण है।भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देवप्रयाग और जनसु के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह सुरंग हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बनाई गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का इस्तेमाल किया गया। इससे उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से बनी सुरंग

इस सुरंग के निर्माण में दुनिया की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘शिव’ और ‘शक्ति’ का उपयोग किया गया। ये मशीनें अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जानी जाती हैं। TBM ‘शिव’ ने 820 दिनों में अपना हिस्सा पूरा किया, जबकि ‘शक्ति’ ने 851 दिनों में काम समाप्त किया। 16 अप्रैल 2025 को इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर पूरा घोषित किया गया।

यात्रा समय में भारी कमी

यह सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है, जो पहाड़ी इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके चालू होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और आपदा राहत कार्यों में लगी एजेंसियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाराणसी जिले के रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुल 10 रेलवे स्टेशन हैं: वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, काशी, वाराणसी सिटी, भगवानपुर, सराय मोहना, बाबतपुर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश), जंघाई और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

RAC यात्रियों के लिए अच्छी खबर

भारतीय रेलवे ने RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब RAC टिकट वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

इस नई रेल सुरंग के पूरा होने से न केवल उत्तराखंड के लोगों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भारत के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण है।भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देवप्रयाग और जनसु के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह सुरंग हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बनाई गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का इस्तेमाल किया गया। इससे उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से बनी सुरंग

इस सुरंग के निर्माण में दुनिया की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘शिव’ और ‘शक्ति’ का उपयोग किया गया। ये मशीनें अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जानी जाती हैं। TBM ‘शिव’ ने 820 दिनों में अपना हिस्सा पूरा किया, जबकि ‘शक्ति’ ने 851 दिनों में काम समाप्त किया। 16 अप्रैल 2025 को इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर पूरा घोषित किया गया।

यात्रा समय में भारी कमी

यह सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है, जो पहाड़ी इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके चालू होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और आपदा राहत कार्यों में लगी एजेंसियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाराणसी जिले के रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुल 10 रेलवे स्टेशन हैं: वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, काशी, वाराणसी सिटी, भगवानपुर, सराय मोहना, बाबतपुर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश), जंघाई और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

RAC यात्रियों के लिए अच्छी खबर

भारतीय रेलवे ने RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब RAC टिकट वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

इस नई रेल सुरंग के पूरा होने से न केवल उत्तराखंड के लोगों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भारत के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण है।भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देवप्रयाग और जनसु के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह सुरंग हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बनाई गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का इस्तेमाल किया गया। इससे उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से बनी सुरंग

इस सुरंग के निर्माण में दुनिया की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘शिव’ और ‘शक्ति’ का उपयोग किया गया। ये मशीनें अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जानी जाती हैं। TBM ‘शिव’ ने 820 दिनों में अपना हिस्सा पूरा किया, जबकि ‘शक्ति’ ने 851 दिनों में काम समाप्त किया। 16 अप्रैल 2025 को इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर पूरा घोषित किया गया।

यात्रा समय में भारी कमी

यह सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है, जो पहाड़ी इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके चालू होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और आपदा राहत कार्यों में लगी एजेंसियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाराणसी जिले के रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुल 10 रेलवे स्टेशन हैं: वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, काशी, वाराणसी सिटी, भगवानपुर, सराय मोहना, बाबतपुर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश), जंघाई और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

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भारतीय रेलवे ने RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब RAC टिकट वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

इस नई रेल सुरंग के पूरा होने से न केवल उत्तराखंड के लोगों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भारत के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण है।भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देवप्रयाग और जनसु के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी देश की सबसे लंबी डबल रेल सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह सुरंग हिमालय के दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में बनाई गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का इस्तेमाल किया गया। इससे उत्तराखंड के पांच पहाड़ी जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक से बनी सुरंग

इस सुरंग के निर्माण में दुनिया की सबसे आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘शिव’ और ‘शक्ति’ का उपयोग किया गया। ये मशीनें अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जानी जाती हैं। TBM ‘शिव’ ने 820 दिनों में अपना हिस्सा पूरा किया, जबकि ‘शक्ति’ ने 851 दिनों में काम समाप्त किया। 16 अप्रैल 2025 को इस परियोजना को आधिकारिक तौर पर पूरा घोषित किया गया।

यात्रा समय में भारी कमी

यह सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का हिस्सा है, जो पहाड़ी इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके चालू होने के बाद यात्रा का समय 7-8 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और आपदा राहत कार्यों में लगी एजेंसियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

वाराणसी जिले के रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कुल 10 रेलवे स्टेशन हैं: वाराणसी जंक्शन, मंडुआडीह, काशी, वाराणसी सिटी, भगवानपुर, सराय मोहना, बाबतपुर, फतेहपुर (उत्तर प्रदेश), जंघाई और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन।

RAC यात्रियों के लिए अच्छी खबर

भारतीय रेलवे ने RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) यात्रियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब RAC टिकट वाले यात्रियों को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी यात्रा अधिक आरामदायक होगी।

इस नई रेल सुरंग के पूरा होने से न केवल उत्तराखंड के लोगों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भारत के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण है।

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भारत के गृह मंत्रालय ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान किया था, और…

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BB19: तान्या मित्तल की बैकलेस साड़ी पर भड़कीं हर्षा रिछारिया, बोलीं- ये क्या पहन लिया

“बिग बॉस 19 शुरू से ही धमाल मचा रहा है। शो की कंटेस्टेंट तान्या मित्तल अपनी हरकतों और स्टाइल की…

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