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भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स में बड़ा कदम: चीन की दादागिरी के खिलाफ G7 देश एकजुट हुआ

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Last updated: June 19, 2025 3:14 pm
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India's big step in rare earth minerals: G7 countries united against China's bullying
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रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) के वैश्विक बाजार में चीन के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए G7 देशों ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में हुए हालिया G7 शिखर सम्मेलन में “क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान” लॉन्च किया गया, जिसमें भारत की भूमिका अग्रणी बताई गई है। यह कदम चीन द्वारा रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है।

Contents
रेयर अर्थ मिनरल्स क्या हैं और इनका उपयोगचीन की दादागिरी और वैश्विक आपूर्ति पर प्रभावG7 का क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान

रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Elements – REE) वैश्विक चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। ये खनिज आधुनिक तकनीक, रक्षा, और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चीन ने इन खनिजों की आपूर्ति और प्रसंस्करण पर अपनी एकछत्र बादशाहत कायम की है, लेकिन अब G7 देशों ने, विशेष रूप से भारत के नेतृत्व में, इस एकाधिकार को चुनौती देने का फैसला किया है। कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में हाल ही में संपन्न G7 शिखर सम्मेलन में क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान लॉन्च किया गया, जिसका नेतृत्व भारत कर रहा है। यह लेख रेयर अर्थ मिनरल्स की महत्ता, चीन की रणनीति, भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति, और G7 के इस प्लान के महत्व पर प्रकाश डालता है।

भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स में बड़ा कदम: चीन की दादागिरी के खिलाफ G7 देश एकजुट हुआ

रेयर अर्थ मिनरल्स क्या हैं और इनका उपयोग

रेयर अर्थ मिनरल्स 17 रासायनिक तत्वों का समूह है, जिनमें लैंथेनाइड्स, स्कैंडियम, और येट्रियम शामिल हैं। ये खनिज अपनी अनूठी चुंबकीय, उत्प्रेरक, और ऑप्टिकल गुणों के कारण अत्यंत मूल्यवान हैं। इनका उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में होता है:

  1. इलेक्ट्रिक वाहन (EV): मोटर्स और बैटरी में मैग्नेट के लिए।
  2. रक्षा: मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, सैटेलाइट, और लेजर तकनीक में।
  3. नवीकरणीय ऊर्जा: विंड टरबाइन और सौर पैनल में।
  4. इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन, कंप्यूटर, और LED डिस्प्ले में।
  5. चिकित्सा: MRI मशीनों और अन्य उपकरणों में।

इन खनिजों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इनका उत्पादन और प्रसंस्करण कुछ ही देशों में केंद्रित है, जिसमें चीन का 60-70% हिस्सा है।

चीन की दादागिरी और वैश्विक आपूर्ति पर प्रभाव

पिछले तीन-चार दशकों में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स के उत्पादन और प्रसंस्करण पर अपनी पकड़ मजबूत की है। वह न केवल इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी नियंत्रित करता है। हाल के वर्षों में, विशेष रूप से अमेरिका और भारत जैसे देशों के साथ व्यापारिक तनाव के बीच, चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। उदाहरण के लिए:

  1. 4 अप्रैल 2025 का नियम: चीन ने मध्यम और भारी रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात के लिए सख्त नियम लागू किए, जिसमें निर्यातक कंपनियों को वाणिज्य मंत्रालय से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। साथ ही, खरीदार को यह गारंटी देनी होती है कि इनका उपयोग सामरिक या विनाशकारी हथियारों में नहीं होगा।
  2. भारत और अमेरिका पर प्रभाव: चीन ने भारत की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री और अमेरिका की तकनीकी कंपनियों को लक्षित करते हुए आपूर्ति में देरी की। इससे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों का उत्पादन प्रभावित हुआ।
  3. बातचीत में देरी: PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भारत के 50 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वीजा तो दिया, लेकिन रेयर अर्थ आपूर्ति पर बातचीत की तारीख तय नहीं की, जिससे उसकी रणनीति स्पष्ट होती है।

G7 का क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान

कनाडा के अल्बर्टा में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों (अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, और यूनाइटेड किंगडम) ने क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान लॉन्च किया। इस प्लान के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  1. चीन की निर्भरता कम करना: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन के एकाधिकार को तोड़ना।
  2. निवेश और नवाचार: खनन, प्रसंस्करण, और रिसाइक्लिंग में निवेश को बढ़ावा देना।
  3. सर्कुलर इकोनॉमी: रेयर अर्थ मिनरल्स की रिसाइक्लिंग और पुन: उपयोग पर जोर।
  4. सहयोग: G7 देशों, भारत, ऑस्ट्रेलिया, और दक्षिण कोरिया जैसे भागीदार देशों के बीच समन्वित प्रयास।
  5. मानकीकरण: वैश्विक बाजार में पारदर्शी और टिकाऊ मानक स्थापित करना।

इस प्लान के तहत सितंबर 2025 में शिकागो, अमेरिका में एक क्रिटिकल मटेरियल्स समिट आयोजित होगा, जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, और दक्षिण कोरिया जैसे देश हिस्सा लेंगे। G7 ने भारत की नेतृत्वकारी भूमिका की सराहना की, क्योंकि भारत ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

भारत की रणनीति और आत्मनिर्भरता का रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में एक उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालय बैठक में, जिसमें भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कोयला व खान मंत्री जी. किशन रेड्डी शामिल थे, निम्नलिखित रणनीतियाँ तय की गईं:

  1. नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन: यह मिशन खनन, प्रसंस्करण, और उपयोग की पूरी वैल्यू चेन को विकसित करने पर केंद्रित है।
  2. स्वदेशी वैल्यू चेन: भारत खनन से लेकर रिफाइनिंग, मैग्नेट निर्माण, और अंतिम उपयोग तक एक स्वदेशी सिस्टम स्थापित करेगा।
  3. निवेश और अनुसंधान: DRDO, इसरो, और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर रेयर अर्थ मिनरल्स की रिसाइक्लिंग और वैकल्पिक तकनीकों पर शोध।
  4. सहयोग: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, और अफ्रीकी देशों के साथ खनन और प्रसंस्करण में साझेदारी।

भारत ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु में रेयर अर्थ खनिजों के भंडार की खोज की है, और इनके खनन के लिए निजी कंपनियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा, रिसाइक्लिंग तकनीकों पर ध्यान देकर भारत आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है।

भारत का कदम और चीन पर प्रभाव

भारत की आत्मनिर्भरता की रणनीति और G7 के साथ सहयोग से चीन की बादशाहत को सीधी चुनौती मिल रही है। यदि भारत रेयर अर्थ मिनरल्स का उत्पादक और निर्यातक बन जाता है, तो:

  1. चीन की मोनोपोली खत्म होगी: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता आएगी, जिससे चीन का दबाव कम होगा।
  2. भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी: रेयर अर्थ निर्यात से भारत को आर्थिक लाभ होगा।
  3. रक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता: भारत के रक्षा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ेगा।
  4. वैश्विक नेतृत्व: भारत का वैश्विक मंच पर नेतृत्व और मजबूत होगा।

निष्कर्ष

रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन की दादागिरी को तोड़ने के लिए G7 का क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान और भारत की आत्मनिर्भरता की रणनीति एक ऐतिहासिक कदम है। भारत, प्रधानमंत्री मोदी के विज़न के तहत, न केवल एक उपभोक्ता के रूप में, बल्कि एक उत्पादक और निर्यातक के रूप में भी उभर रहा है। यह नया भारत है, जो आपदा को अवसर में बदल रहा है। सितंबर 2025 में शिकागो में होने वाला समिट इस दिशा में अगला कदम होगा। आइए, इस यात्रा में भारत को समर्थन दें और एक आत्मनिर्भर, शक्तिशाली भारत का निर्माण करें।

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