न्यूज डेस्क, रीटाइम्स इंडिया, नई दिल्ली।
प्रकाशित: बुधवार, 06 अगस्त 2025
बिहार में विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग ने 65 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए। इस पर सियासी हंगामा मच गया और कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब कोर्ट ने आयोग से 9 अगस्त तक हटाए गए वोटरों की पूरी जानकारी मांगी है। आइए जानते हैं पूरा मामला।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 65 लाख मतदाताओं का पूरा ब्योरा 9 अगस्त तक पेश किया जाए। यह जानकारी न सिर्फ कोर्ट को, बल्कि उन राजनीतिक दलों और एनजीओ ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) को भी दी जाए, जिसने इस मामले में याचिका दायर की है।
क्या है पूरा मामला
चुनाव आयोग ने बिहार में 24 जून को ‘विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान’ (एसआईआर) शुरू किया था। इसके तहत 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई, जिसमें कुल 7.24 करोड़ वोटरों के नाम शामिल थे। लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस लिस्ट से 65 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम हटा दिए गए। आयोग का कहना है कि इनमें से कुछ लोग मर चुके हैं, कुछ दूसरी जगह शिफ्ट हो गए, और कुछ के नाम दो जगहों पर दर्ज थे। लेकिन इस कार्रवाई पर कई सवाल उठ रहे हैं।
कोर्ट में क्या हुआ
जस्टिस सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ कहा, “हमें हर उस वोटर का ब्योरा चाहिए, जिसका नाम हटाया गया है। यह भी बताएं कि किस आधार पर ये नाम हटाए गए।” एनजीओ की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि राजनीतिक दलों को हटाए गए वोटरों की लिस्ट तो दी गई, लेकिन उसमें यह साफ नहीं किया गया कि कौन मरा, कौन शिफ्ट हुआ, या किसका नाम गलत तरीके से हटाया गया। कोर्ट ने आयोग को 9 अगस्त तक जवाब देने का आदेश दिया, ताकि 12-13 अगस्त को इस मामले की पूरी सुनवाई हो सके।
एडीआर की याचिका में क्या है मांग
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने मांग की है कि 65 लाख हटाए गए वोटरों की पूरी लिस्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही, हर नाम के साथ यह भी बताया जाए कि उसे क्यों हटाया गया- मौत, स्थायी स्थानांतरण या कोई और वजह।
चुनाव आयोग का क्या है कहना?
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा, “हम वोटर लिस्ट को पारदर्शी और साफ करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा मकसद है कि अपात्र लोगों के नाम हटें और केवल सही वोटर ही लिस्ट में रहें।”
कितने नाम क्यों हटे
आयोग के मुताबिक, एसआईआर के दौरान:
- 22.34 लाख वोटरों के नाम मृत्यु के कारण हटाए गए।
- 36.28 लाख लोग स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए, इसलिए उनके नाम हटाए गए।
- 7.01 लाख वोटरों के नाम दो जगहों पर थे, जिन्हें हटाया गया।
सुप्रीम कोर्ट पहले क्या कह चुका है
इससे पहले 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं, तो वह तुरंत दखल देगा। कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों को गंभीरता से लिया जाए और नाम हटाने की बजाय जोड़ने पर ध्यान दिया जाए।
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