हड्डियों में असहनीय दर्द को हल्के में न लें, यह कैंसर या टीबी जैसे गंभीर रोगों की चेतावनी हो सकता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन शर्मा का कहना है कि नियमित व्यायाम और धूप में समय बिताने से हड्डियां मजबूत रहती हैं। जवानी में सेहत का ख्याल रखने से बुढ़ापे में हड्डियों की समस्याएं कम होती हैं।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए जरूरी है व्यायाम और धूप
तरसेम सैनी, टांडा (कांगड़ा)। हमारी हड्डियां भी उतनी ही देखभाल मांगती हैं, जितना हम अपने शरीर की करते हैं। हड्डियों को मजबूत रखने के लिए नियमित व्यायाम और धूप में समय बिताना जरूरी है। धूप से विटामिन डी मिलता है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। कांगड़ा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विपिन शर्मा ने बताया कि अगर जवानी में सेहत का ध्यान रखें, तो बुढ़ापे में हड्डियों की बीमारियां परेशान नहीं करेंगी।
हड्डियों में असहनीय दर्द को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यह कैंसर, टीबी जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। हड्डियों की कमजोरी का पता लगाने के लिए सीरम विटामिन डी टेस्ट जरूर करवाएं।
‘दैनिक जागरण’ से बातचीत में डॉ. विपिन शर्मा ने बताया कि अगर हड्डियों में ऐसा दर्द हो, जो सहन न हो सके, तो तुरंत जांच करवाएं। यह दर्द हड्डी के कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों की चेतावनी हो सकता है।
हड्डी रोगों की जांच कब करवाएं
डॉ. शर्मा के मुताबिक, जवानी में हम अक्सर सेहत को नजरअंदाज करते हैं। खान-पान का ध्यान नहीं रखते और नौकरीपेशा लोग दिनभर दफ्तर में रहते हैं, जिससे धूप का संपर्क नहीं हो पाता। इससे शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है। जवानी में यह कमी नजर नहीं आती, लेकिन 40-50 की उम्र में हार्मोन्स कम होने से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इस उम्र में दर्द, चोट या फ्रैक्चर की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर जवानी में ही सेहत का ख्याल रखा जाए, तो हड्डियों की कमजोरी, जोड़ों का दर्द या बार-बार फ्रैक्चर जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
हड्डियों में संक्रमण क्यों होता है और कैसे बचें
डॉ. शर्मा बताते हैं कि हड्डियों में चोट लगने से संक्रमण का खतरा रहता है। एक बार संक्रमण फैल जाए, तो उसे ठीक करना मुश्किल होता है और कई बार सर्जरी की जरूरत पड़ती है। बच्चों में बार-बार जुकाम या अन्य संक्रमण खून के जरिए हड्डियों तक पहुंच सकता है। सड़क हादसों में फ्रैक्चर या गंभीर चोट में मिट्टी-धूल के कण हड्डियों में चले जाएं, तो भी संक्रमण हो सकता है। डायबिटीज, एचआईवी या कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में भी हड्डियों में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।
हड्डियां मजबूत रखने के लिए क्या करें
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए सबसे पहले नशे से दूरी बनाएं। युवाओं को इस पर खास ध्यान देना चाहिए। कॉफी और चाय का सेवन कम करें। कोई भी व्यायाम, जैसे दौड़ना या अन्य शारीरिक गतिविधि, हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है। जितना शरीर सक्रिय रहेगा, हड्डियां उतनी ही मजबूत होंगी।
हड्डियों के लिए कैसा हो आहार
संतुलित आहार बहुत जरूरी है। भोजन में प्रोटीन की मात्रा अधिक होनी चाहिए, जबकि कार्बोहाइड्रेट और फैट कम होने चाहिए। शाकाहारी लोग पनीर, टोफू, सोयाबीन, दूध और दही से प्रोटीन ले सकते हैं। मांसाहारी लोग अंडों से प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं। दूध और दही में प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है।
हड्डियों के कैंसर या रोग का पता कैसे चलता है
हड्डियों के कैंसर या अन्य रोगों का पहला लक्षण है असहनीय दर्द। ऐसा दर्द, जो बर्दाश्त से बाहर हो, गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। डॉ. शर्मा के मुताबिक, सामान्य दर्द के मामले रोजाना ओपीडी में आते हैं, लेकिन जब दर्द असामान्य हो, तो यह विशेषज्ञों को गहन जांच के लिए प्रेरित करता है।
क्या घुटना बदलना ही एकमात्र रास्ता है
डॉ. शर्मा बताते हैं कि घुटनों में दर्द की शुरुआत में घुटना बदलने की जरूरत नहीं होती। बीमारी के पहले और दूसरे चरण में परहेज और सही उपचार से राहत मिल सकती है। लेकिन अगर बीमारी चौथे चरण में पहुंच जाए, तो घुटना बदलना ही एकमात्र उपाय हो सकता है।
हड्डी रोगों का पता लगाने वाला टेस्ट
हड्डियों की कमजोरी का पता लगाने के लिए सीरम विटामिन डी टेस्ट करवाएं। अगर विटामिन डी का स्तर कम है, तो इंजेक्शन या दवाओं से इसकी पूर्ति की जा सकती है।
मौसम का हड्डी रोगों पर असर
सर्दियों में ठंड से मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दर्द बढ़ सकता है। गठिया जैसे रोगों से पीड़ित लोगों को सर्दियों में ज्यादा परेशानी होती है। इससे बचने के लिए सुबह की धूप में जरूर बैठें।
महिलाएं घर के काम में स्टूल का करें इस्तेमाल
महिलाएं पुरुषों की तुलना में घुटनों के दर्द से ज्यादा पीड़ित होती हैं। खेतों में काम, पशु संभालना और घरेलू कामों के दौरान बार-बार बैठना-उठना घुटनों पर जोर डालता है। डॉ. शर्मा सलाह देते हैं कि महिलाएं समय पर ओपीडी में आएं, ताकि बचाव के उपाय बताए जा सकें। खान-पान का ध्यान रखें और ऐसे कामों से बच
