उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में गुरुवार को सैकड़ों शिक्षकों ने सड़कों पर उतरकर अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि सरकार का यह फैसला उनके लिए परेशानी का सबब बन रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मुरादाबाद के सिविल लाइंस इलाके में जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया।
शिक्षकों का गुस्सा उस सरकारी आदेश को लेकर है, जिसमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए TET को अनिवार्य कर दिया गया है। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने कहा कि यह नियम उन लोगों के लिए अन्यायपूर्ण है जो पहले से ही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल हैं या अस्थायी रूप से काम कर रहे हैं।
नारेबाजी और मांगों का दौर
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने “TET अनिवार्यता खत्म करो” और “शिक्षकों को इंसाफ दो” जैसे नारे लगाए। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे एक शिक्षक नेता ने कहा, “हम सालों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन अब हमें फिर से परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह हमारे अनुभव और योग्यता का अपमान है।”
शिक्षकों ने मांग की कि सरकार अनिवार्य TET नियम को वापस ले और पहले से कार्यरत शिक्षकों को इस नियम से छूट दे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को और पारदर्शी करना चाहिए ताकि योग्य उम्मीदवारों को मौका मिले।
सरकार का रुख और शिक्षकों की शिकायत
उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले कहा था कि TET को अनिवार्य करने का मकसद शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करना है। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि यह नियम उनके लिए अतिरिक्त बोझ है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही कई सालों से पढ़ा रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल एक शिक्षिका ने कहा, “हम पहले से ही कई परीक्षाओं से गुजर चुके हैं। अब फिर से TET देना हमारे समय और मेहनत की बर्बादी है।”
मुरादाबाद में तनाव का माहौल
प्रदर्शन के दौरान मुरादाबाद के सिविल लाइंस इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि, प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी जिला प्रशासन को सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
शिक्षकों की एकजुटता
यह प्रदर्शन न केवल मुरादाबाद तक सीमित रहा, बल्कि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में भी शिक्षकों ने इस नियम के खिलाफ आवाज उठाई। शिक्षक संगठनों ने दावा किया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती।
शिक्षकों का यह प्रदर्शन एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों पर सवाल उठा रहा है। क्या सरकार शिक्षकों की मांगों पर ध्यान देगी, या यह आंदोलन और तेज होगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
