प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50% अमेरिकी टैरिफ की समय-सीमा से पहले साफ कर दिया कि भारत किसी भी दबाव को झेलने के लिए तैयार है, लेकिन किसानों के हित को सर्वोपरि रखा जाएगा। बिना किसी का नाम लिए, पीएम ने कहा कि वैश्विक राजनीति अब आर्थिक हितों के इर्द-गिर्द घूम रही है, जहां हर देश सिर्फ अपने फायदे की सोचता है। उन्होंने स्वदेशी का नारा बुलंद किया और महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
क्या है मामला?
25 अगस्त 2025 को पीएम मोदी ने यह बयान उस समय दिया, जब अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाने की बात कही है। यह टैरिफ भारत के रूस से तेल खरीदने के जवाब में लगाया गया है, जिसमें 25% अतिरिक्त शुल्क शामिल है। मोदी ने साफ किया कि भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
उन्होंने कहा, “दबाव बढ़ सकता है, लेकिन हम इसे सहन कर लेंगे। भारत की प्राथमिकता अपने लोगों का कल्याण और आत्मनिर्भरता है।” पीएम ने यह भी जोड़ा कि भारत स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देगा और वैश्विक दबावों के बावजूद अपनी नीतियों पर अडिग रहेगा।
स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर
मोदी ने महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि भारत को अपनी ताकत पर भरोसा करना होगा। उन्होंने अपील की कि देशवासी स्थानीय उत्पादों को अपनाएं और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का डटकर मुकाबला करें। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के टैरिफ के फैसले ने भारत के निर्यात पर असर डालने की आशंका जताई जा रही है।
भारत की स्थिति
भारत ने हमेशा से अपनी ऊर्जा खरीद को राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता के आधार पर तय किया है। रूस से तेल खरीदने का फैसला भी इसी नीति का हिस्सा है, खासकर तब जब रूस ने यूक्रेन संकट के बाद सस्ते दामों पर तेल की पेशकश की थी। 2019-20 में रूस से भारत का तेल आयात केवल 1.7% था, जो 2024-25 में बढ़कर 35.1% हो गया है।
मोदी का यह बयान न केवल अमेरिका को जवाब है, बल्कि यह भारत की आर्थिक स्वतंत्रता और किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।