‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक और मशहूर फाइनेंशियल एक्सपर्ट रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बार फिर वैश्विक आर्थिक संकट की चेतावनी दी है। उनके अनुसार, 2025 में दुनिया का सबसे बड़ा आर्थिक संकट आने वाला है, जिसमें शेयर बाजार, बॉन्ड, रियल एस्टेट, और यहां तक कि सोना, चांदी, और बिटकॉइन जैसी संपत्तियां भी भारी गिरावट का शिकार हो सकती हैं। कियोसाकी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि “बबल्स फूटने वाले हैं,” और इस संकट के बाद निवेश के बड़े अवसर पैदा होंगे। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे सोना, चांदी, और बिटकॉइन में गिरावट के बाद निवेश करें, क्योंकि ये संपत्तियां लंबे समय में भारी मुनाफा दे सकती हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था और फेड की नीतियों पर सवाल
कियोसाकी ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व (फेड) की नीतियों को इस संभावित संकट का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 1987 के शेयर बाजार क्रैश, 1998 के LTCM संकट, 2019 के रेपो मार्केट संकट, 2020 के कोविड संकट, और सिलिकॉन वैली बैंक के पतन जैसे मौकों पर फेड ने “नकली डॉलर” छापकर अर्थव्यवस्था को बचाने की कोशिश की। उनके अनुसार, यह मुद्रा छापने की नीति हाइपरइन्फ्लेशन को जन्म देती है, जैसा कि वेनेजुएला, बोलीविया, और पाकिस्तान जैसे देशों में देखा गया है, जहां अत्यधिक मुद्रा छापने से अर्थव्यवस्थाएं धराशायी हो गईं। कियोसाकी का कहना है कि अमेरिका का 38 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज और फेड की नीतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर ले जा रही हैं।
ट्रंप की टैरिफ नीतियां और वैश्विक प्रभाव
कियोसाकी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को भी संकट का एक कारण बताया। ट्रंप ने चीन, कनाडा, मैक्सिको, और भारत जैसे देशों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिसमें भारत पर 26% टैरिफ शामिल है। इन नीतियों के कारण वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ गई है, जिससे शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। उदाहरण के लिए, अप्रैल 2025 में वैश्विक बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जिसमें हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स 13.31% और अमेरिका का S&P 500 6.76% टूटा। भारत का सेंसेक्स भी 2.81% गिरा, लेकिन अन्य देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। कियोसाकी का मानना है कि ये टैरिफ नीतियां सोना, चांदी, और बिटकॉइन की कीमतों को भी प्रभावित करेंगी।
सोना, चांदी, और बिटकॉइन: संकट में अवसर
कियोसाकी ने चेतावनी दी कि सोना, चांदी, और बिटकॉइन में भी गिरावट आएगी, लेकिन यह निवेशकों के लिए सुनहरा अवसर होगा। उन्होंने विशेष रूप से चांदी को “सबसे बड़ा निवेश अवसर” बताया, क्योंकि इसकी कीमत वर्तमान में 35 डॉलर प्रति औंस है, जो इसके सर्वकालिक उच्च स्तर से 60% कम है। सिटीग्रुप के विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2025 में चांदी की मांग 1.20 अरब औंस होगी, जबकि आपूर्ति केवल 1.05 अरब औंस, जिससे कीमतों में 13% तक उछाल संभव है। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में 25% तक गिरावट की आशंका है। कियोसाकी ने निवेशकों को सलाह दी कि वे “फर्जी” फिएट मुद्राओं (जैसे डॉलर) को बचाने के बजाय सोना, चांदी, और बिटकॉइन जैसी “वास्तविक” संपत्तियों में निवेश करें।
फेड चेयर जेरोम पावेल और ट्रंप की गफलत
कियोसाकी ने फेड चेयर जेरोम पावेल की नीतियों की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने ब्याज दरों में कटौती और मुद्रा छापने की नीति को गैर-जिम्मेदाराना बताया। ट्रंप ने भी पावेल पर दबाव बनाया है कि वे मई 2026 से पहले ब्याज दरों में 300 आधार अंकों की कटौती करें, जिसे कियोसाकी और कई अर्थशास्त्री मुद्रास्फीति के लिए खतरनाक मानते हैं। ट्रंप और पावेल के बीच नीतिगत मतभेदों ने अमेरिकी प्रशासन में अनिश्चितता पैदा की है, जिसे कियोसाकी “गफलत” कहते हैं। जेपी मॉर्गन के अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन ने चेतावनी दी है कि ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण 2025 में वैश्विक मंदी की संभावना 40% से बढ़कर 60% हो गई है, जबकि गोल्डमैन सैक्स ने इसे 35% तक आंका है।
वैश्विक सेंट्रल बैंक और गोल्ड की खरीदारी
कियोसाकी की सलाह के अनुरूप, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अपनी डॉलर हिस्सेदारी कम कर सोने की खरीदारी बढ़ा रहे हैं। भारत, चीन, और अन्य देश अपने सोने के भंडार को विदेशों से स्वदेश ला रहे हैं, ताकि अनिश्चितता के समय में संपत्तियां फ्रीज होने से बच सकें। उदाहरण के लिए, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस के डॉलर-आधारित एसेट्स को अमेरिका ने फ्रीज कर दिया था, जिसने अन्य देशों को सतर्क कर दिया। भारत भी अपने लंदन में रखे सोने को धीरे-धीरे वापस ला रहा है। कियोसाकी का कहना है कि यह प्रवृत्ति सोने और चांदी की दीर्घकालिक मांग को बढ़ाएगी।
निवेशकों के लिए सलाह और भविष्य की रणनीति
कियोसाकी ने निवेशकों को सलाह दी कि वे संकट के दौरान नकदी बचाने से बचें, क्योंकि फिएट मुद्राएं (जैसे डॉलर और रुपये) मूल्य खो सकती हैं। इसके बजाय, वे सोना, चांदी, और बिटकॉइन में निवेश करें, खासकर जब ये संपत्तियां गिरावट के बाद सस्ती हों। उन्होंने वॉरेन बफेट का उदाहरण दिया, जो 350 बिलियन डॉलर की नकदी के साथ बाजार में गिरावट का इंतजार कर रहे हैं। कियोसाकी का मानना है कि यह संकट उन लोगों के लिए अवसर लाएगा जो “प्रोएक्टिव” हैं और समझदारी से निवेश करते हैं।
सावधानी और अवसर का मिश्रण
रॉबर्ट कियोसाकी की भविष्यवाणी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और ट्रंप की टैरिफ नीतियों के प्रभाव को रेखांकित करती है। हालांकि सोना, चांदी, और बिटकॉइन में अल्पकालिक गिरावट की आशंका है, कियोसाकी इसे निवेश का सुनहरा अवसर मानते हैं। अमेरिका का 38 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज, फेड की नीतियां, और वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका इस संकट को और गहरा सकते हैं। निवेशकों को सतर्क रहते हुए सोने और चांदी जैसे सुरक्षित एसेट्स में निवेश की रणनीति बनानी चाहिए, ताकि संकट के बाद उभरने वाले अवसरों का लाभ उठाया जा सके।
