इंडस वाटर ट्रीटी पर भारत का स्पष्ट रुख है: जब तक पाकिस्तान आतंकवाद और POK (पाक-अधिकृत कश्मीर) के मुद्दे पर बातचीत नहीं करता, तब तक भारत इस संधि को फिर से लागू नहीं करेगा। हाल ही में, भारत ने पाकिस्तान को एक बड़ा संदेश देते हुए उसके हिस्से का पानी रोक दिया है। पाकिस्तान ने कई बार भारत से इस मुद्दे पर बातचीत करने का अनुरोध किया, लेकिन भारत ने कोई जवाब नहीं दिया।
भारत की नई रणनीति: पानी को डायवर्ट करना
अब भारत ने सिंधु नदी के पानी को मोड़ने के लिए एक बड़ी योजना बनाई है। इसके तहत:
- नहरों का निर्माण: भारत 113 किलोमीटर लंबी एक नई नहर बना रहा है, जो चेनाब नदी को रावी, ब्यास और सतलज नदियों से जोड़ेगी।
- पानी का पुनर्वितरण: इस नहर के जरिए पानी राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में पहुंचाया जाएगा, जहां पानी की कमी है।
- मौजूदा नहरों का विस्तार: पहले से मौजूद नहरों (जैसे इंदिरा गांधी नहर) को भी बढ़ाया जाएगा, ताकि अधिक पानी का उपयोग किया जा सके।
पाकिस्तान पर प्रभाव
- पाकिस्तान पहले से ही पानी की किल्लत झेल रहा है। अगर भारत सिंधु नदी का पानी पूरी तरह रोक देता है, तो पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान होगा।
- पाकिस्तान की सरकार पहले ही कई बार भारत से पानी छोड़ने की गुहार लगा चुकी है, लेकिन भारत ने कोई जवाब नहीं दिया।
भारत का मजबूत रुख
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि भारत पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) पर अपने अधिकार का पूरा उपयोग करेगा। पाकिस्तान अब तक विश्व बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराता रहा है, लेकिन अब भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने हितों को प्राथमिकता देगा।
भारत की यह नई योजना न सिर्फ देश के अंदर पानी की उपलब्धता बढ़ाएगी, बल्कि पाकिस्तान को एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी देगी। अगर पाकिस्तान आतंकवाद और POK के मुद्दे पर गंभीरता से बातचीत नहीं करता, तो भारत सिंधु नदी के पानी को पूरी तरह रोक सकता है।
इसके साथ ही, भारत ने कई नए बांधों और जल परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जो 2030 तक पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। अब देखना यह है कि पाकिस्तान इस चुनौती का सामना कैसे करता है।
