भारत और चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनजर भारत ने रणनीतिक कदम उठाते हुए मंगोलिया के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाया है। यह कदम चीन को स्पष्ट संदेश देने के लिए है कि भारत भी चीन के पड़ोसी देशों के साथ मजबूत सुरक्षा संबंध बना सकता है।
मुख्य बिंदु:
- मंगोलिया का रणनीतिक महत्व:
- मंगोलिया चीन और रूस के बीच स्थित एक “बफर स्टेट” है, जिस पर ऐतिहासिक रूप से चीन का दबाव रहा है।
- भारत ने 2014 में ही मंगोलिया के साथ रणनीतिक साझेदारी शुरू की थी, जिसमें सैन्य अभ्यास और आर्थिक सहयोग शामिल है।
- चीन की प्रतिक्रिया:
- चीन ने भारत-मंगोलिया सैन्य अभ्यास को लेकर आपत्ति जताई है और धमकी दी है कि मंगोलिया को दी गई “स्वायत्तता” छीन सकता है।
- चीन मंगोलिया से गुजरने वाली गैस पाइपलाइन (“पावर ऑफ साइबेरिया”) को लेकर चिंता जता रहा है, हालांकि भारत का इससे कोई सीधा संबंध नहीं है।
- भारत की “स्ट्रिंग ऑफ डायमंड्स” रणनीति:
- चीन “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” (म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि) के जरिए भारत को घेरने की कोशिश करता है।
- भारत ने जवाबी कदम के तौर पर चीन के विरोधी देशों (वियतनाम, फिलीपींस, मंगोलिया, ताइवान) के साथ सैन्य-आर्थिक साझेदारी बढ़ाई है।
- भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल जैसी घातक तकनीक दी है और वियतनाम-थाईलैंड को भी सैन्य सहयोग दे रहा है।
- रूस की भूमिका:
- रूस चाहता है कि भारत और चीन के बीच तनाव कम हो, ताकि अमेरिका के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाया जा सके।
- लेकिन भारत चीन पर भरोसा नहीं करता और अपनी सैन्य तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है।
- शक्ति संतुलन का सिद्धांत:
- भारत का लक्ष्य चीन के खिलाफ शक्ति संतुलन (Balance of Power) बनाए रखना है, ताकि युद्ध की स्थिति न बने।
- अगर चीन पाकिस्तान या बांग्लादेश के जरिए भारत को घेरेगा, तो भारत चीन के पड़ोसियों को सैन्य सहायता देकर जवाब देगा।
निष्कर्ष:
भारत की मंगोलिया के साथ सैन्य साझेदारी चीन को यह संदेश देती है कि वह भारत को एकतरफा दबाव में नहीं रख सकता। भविष्य में भारत चीन-विरोधी देशों के साथ नाटो जैसा सैन्य गठबंधन भी बना सकता है, जिससे एशिया में शक्ति संतुलन बना रहे।
