भारत ने हाल ही में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचे। केंद्र सरकार ने खुलासा किया है कि इस Axiom-4 मिशन पर कुल 548 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें शुक्ला ने 18 दिन अंतरिक्ष में बिताए।
ग्रुप कैप्टन शुक्ला, जो इस मिशन के पायलट थे, ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और अपने अंतरिक्ष अनुभव को साझा किया। यह मिशन न केवल भारत के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि यह 2027 में प्रस्तावित गगनयान मिशन की तैयारी में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
Axiom-4 मिशन के तहत शुक्ला ने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिसमें सात से अधिक माइक्रोग्रैविटी प्रयोग शामिल थे। ये प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और विभिन्न भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से किए गए। इस मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष में मानव मिशन के लिए अनुभव और डेटा इकट्ठा करना था, जो भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
केंद्र सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह मिशन भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान और वैश्विक सहयोग में एक मजबूत स्थिति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि शुक्ला का ISS पर सुरक्षित वापसी भारत के अंतरिक्ष में स्थायी स्थान को दर्शाता है।
यह मिशन NASA और Axiom Space के साथ एक साझेदारी थी, जिसमें SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का उपयोग किया गया। मिशन की लागत में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण, लॉन्च व्यवस्था, यात्रा और अंतरिक्ष में किए गए शोध कार्य शामिल थे।
शुभांशु शुक्ला ने इस मिशन के दौरान भारत का नाम रोशन किया और यह दिखाया कि भारत अब अंतरिक्ष की दुनिया में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है।
