केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अंडमान सागर में एक विशाल तेल क्षेत्र की खोज की घोषणा की है, जिसकी तुलना गुयाना के तेल भंडारों से की जा रही है। यह क्षेत्र प्रतिदिन 2.5 लाख बैरल तेल उत्पादन की क्षमता रखता है।”अंडमान सागर में भारत को एक ऐसा विशाल तेल क्षेत्र मिला है, जिसकी तुलना दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना में खोजे गए तेल भंडारों से की जा सकती है। यह तेल क्षेत्र प्रतिदिन कम से कम 2.5 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करने की क्षमता रखता है। इस खोज के शुरुआती संकेत (ग्रीन शूट्स) दिखाई दे चुके हैं, और यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक गेम-चेंजिंग कदम साबित हो सकता है। इस लेख में हम इस खोज के विवरण, इसके पीछे की नीतियों, और भारत में तेल और गैस क्षेत्र में हो रही प्रगति पर चर्चा करेंगे।”
खोज का विवरण
- स्थान: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के तलछटी बेसिन, 1.25 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में।
- क्षमता: 2.5 लाख बैरल प्रतिदिन।
- तुलना: गुयाना के लीजा वन तेल क्षेत्र (11 बिलियन बैरल) के समकक्ष।
भारत में तेल खोज में प्रगति के कारण
- OALP और HELP: खोज पर केंद्रित नीतियां, राजस्व साझा मॉडल।
- नो-गो क्षेत्रों में कमी: 99% क्षेत्र खोज के लिए खुले।
- बढ़ती खोज: ONGC ने 541 कुओं में ड्रिलिंग की।
- निजी/विदेशी निवेश: टोटल एनर्जीज, शेवरॉन, एक्सॉन मोबिल की रुचि।
- विस्तारित खोज क्षेत्र: 2030 तक 10 लाख वर्ग किमी लक्ष्य।
अन्य खोजें
- उत्तर प्रदेश (बलिया), बिहार, कृष्णा-गोदावरी बेसिन, OALP IX के 28 ब्लॉक।
ऊर्जा निर्भरता में कमी
- भारत 82% तेल आयात करता है (137 बिलियन डॉलर/वर्ष)।
- यह खोज आयात कम करेगी और इथेनॉल मिश्रण जैसे वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देगी।
यह खोज भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिति को मजबूत करेगी। अपने विचार कमेंट करें और लेख शेयर करें।
