भारत ने स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सपना जल्द ही साकार होने वाला है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में हाइड्रोजन संचालित कोच का सफल परीक्षण पूरा हो चुका है, और यह हर पैमाने पर खरा उतरा है। इसके साथ ही, हरियाणा के जींद में 3,000 किलोग्राम क्षमता वाला हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन भी स्थापित किया जा रहा है। यह लेख भारत की इस नवीन परियोजना, इसके लाभों, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालता है।
हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना की शुरुआत
भारत सरकार ने हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज कार्यक्रम के तहत इस परियोजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य रेलवे को पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल बनाने के लिए हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक को अपनाना है। इस परियोजना के दो मुख्य घटक हैं:
- डीजल इंजनों का रूपांतरण: पारंपरिक 1,600 हॉर्सपावर के डीजल इंजनों को हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रणालियों में परिवर्तित करना।
- रिफ्यूलिंग सुविधा: हरियाणा के जींद में 3,000 किलोग्राम क्षमता वाला हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग स्टेशन स्थापित करना।
यह परियोजना भारतीय रेलवे के उत्तरी रेलवे जोन के तहत शुरू की गई थी, और इसकी कुल लागत ₹136 करोड़ है। अनुसंधान, डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) इस परियोजना के डिजाइन और परीक्षण का नेतृत्व कर रहा है।
हाइड्रोजन ट्रेन की विशेषताएं
हाइड्रोजन ट्रेन कई मायनों में क्रांतिकारी है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं:
- शून्य प्रदूषण: हाइड्रोजन ईंधन सेल केवल जलवाष्प का उत्सर्जन करता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है।
- उच्च ऊर्जा दक्षता: हाइड्रोजन में उच्च ऊर्जा-भार अनुपात होता है, जो इसे भारी परिवहन जैसे रेलवे के लिए आदर्श बनाता है।
- शक्तिशाली प्रदर्शन: प्रत्येक पावर कार में 220 किलोग्राम हाइड्रोजन 350 बार दबाव वाले विशेष सिलेंडरों में संग्रहित होगा, जो 1,600 हॉर्सपावर के बराबर ऊर्जा प्रदान करेगा।
- पर्यावरण-अनुकूल: यह ट्रेन सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों के साथ एकीकरण को समर्थन देती है, जिससे यह स्वच्छ ऊर्जा परिवहन में सहायक है।
तकनीकी और सुरक्षा पहलू
हाइड्रोजन एक रंगहीन, गंधहीन और अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, जिसके कारण सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। इसे ध्यान में रखते हुए, परियोजना में कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं:
- लीक डिटेक्शन सिस्टम: प्रेशर रिलीफ वाल्व और लीक डिटेक्शन सेंसर के साथ हाइड्रोजन रिसाव को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है।
- फ्लेम डिटेक्शन और तापमान संवेदन: फ्लेम डिटेक्ट सेंसर और तापमान संवेदन प्रणालियां जोखिम को कम करेंगी।
- वेंटिलेशन सिस्टम: वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किए गए वेंटिलेशन सिस्टम गर्मी को नियंत्रित करेंगे।
- कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनामिक्स (CFD): CFD अध्ययन के माध्यम से हाइड्रोजन रिसाव और अन्य जोखिमों का विश्लेषण किया जा रहा है।
- सुरक्षा ऑडिट: जर्मनी की स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिटर टीयूवी एसयूडी को नियुक्त किया गया है, जो परियोजना की सुरक्षा मानकों की जांच करेगी।
इंजीनियरिंग डिजाइन और रूपांतरण का कार्य चेन्नई की ICF और हैदराबाद की मेधा सर्वो ड्राइव्स द्वारा किया जा रहा है। सभी उपकरणों का व्यापक परीक्षण पूरा हो चुका है, और अंतिम मंजूरी के बाद परियोजना अगले चरण में प्रवेश करेगी।
जींद में रिफ्यूलिंग सुविधा
हरियाणा के जींद में 3,000 किलोग्राम क्षमता वाला हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग स्टेशन स्थापित किया जा रहा है। यह सुविधा पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के मानकों के अनुसार संचालित होगी। इसके लिए बुनियादी ढांचे का विकास भी किया जा रहा है, जिसमें शामिल हैं:
- बिजली आपूर्ति व्यवस्था
- सड़क निर्माण
- अग्निशमन टैंक और अन्य सुरक्षा सुविधाएं
यह स्टेशन जींद से सोनीपत के बीच 356 किलोमीटर के रूट पर हाइड्रोजन ट्रेनों को रिफ्यूल करने में सक्षम होगा।
हाइड्रोजन ऊर्जा का महत्व
हाइड्रोजन ऊर्जा को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का भविष्य माना जा रहा है। इसके कुछ प्रमुख लाभ हैं:
- उच्च ऊर्जा क्षमता: हाइड्रोजन का ऊर्जा-भार अनुपात अन्य ईंधनों से कहीं अधिक है, जिससे यह भारी परिवहन और औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए आदर्श है।
- शून्य कार्बन उत्सर्जन: हाइड्रोजन ईंधन सेल से केवल जलवाष्प निकलता है, जो पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।
- नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण: हाइड्रोजन सौर और पवन ऊर्जा के भंडारण का माध्यम बन सकता है, जिससे ग्रिड स्थिरीकरण और 24 घंटे बिजली आपूर्ति संभव हो सकती है।
- औद्योगिक उपयोग: सीमेंट, तेल शोधन, उर्वरक, और रासायनिक उद्योगों में हाइड्रोजन का उपयोग कार्बन उत्सर्जन को कम कर सकता है।
भविष्य की योजनाएं
भारत की हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिसके सफल होने पर इसे और विस्तार दिया जाएगा। भविष्य की योजनाओं में शामिल हैं:
- छह महीने का परीक्षण: जींद-सोनीपत रूट पर छह महीने तक प्रदर्शन डेटा, सुरक्षा रिपोर्ट, और यात्री फीडबैक एकत्र किया जाएगा।
- विस्तार: अन्य शाखा लाइनों पर हाइड्रोजन ट्रेनों का क्रमिक विस्तार।
- बुनियादी ढांचा विकास: प्रमुख स्टेशनों पर हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सुविधाएं और हरित हाइड्रोजन उत्पादन केंद्र स्थापित करना।
- स्वदेशी तकनीक: मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक का विकास।
- IIT के साथ साझेदारी: नवाचार और अनुसंधान के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) के साथ सहयोग।
- दीर्घकालिक लक्ष्य: 2030 तक 100 हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। यह न केवल भारतीय रेलवे को पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को स्वच्छ ऊर्जा तकनीक में अग्रणी बनाएगा। हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण और जींद में रिफ्यूलिंग सुविधा का विकास इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है। मेक इन इंडिया और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देकर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा।
