नई दिल्ली से सनसनीखेज खबर! कांग्रेस के ओवरसीज चीफ सैम पित्रोदा ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे देश को हिला दिया। पाकिस्तान को ‘घर जैसा’ बताने पर विवाद मच गया, और फिर उन्होंने जल्दी से सफाई भी दे दी। उनका कहना है कि बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। असल में वो भारतीय उपमहाद्वीप के साझा इतिहास और लोगों के रिश्तों की बात कर रहे थे। लेकिन बिहार चुनाव के ठीक पहले ये बयान BJP को सोने का मौका दे गया। विपक्ष चुप्पी साधे है, आइए पूरी स्टोरी जानते हैं।
सैम पित्रोदा ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट डालकर सफाई दी। उन्होंने लिखा, “मेरा आशय साझा इतिहास और लोगों के बीच आपसी संबंधों पर जोर देना था – दर्द, संघर्ष या आतंकवाद तथा भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों को नजरअंदाज करना नहीं था।” मतलब, उनका मकसद सिर्फ पुराने रिश्तों को हाइलाइट करना था, न कि बॉर्डर पर तनाव को भूल जाना। लेकिन सोशल मीडिया पर तो तूफान आ गया!
बिहार विधानसभा चुनाव की रेस अभी गर्म है, और ये बयान BJP के लिए परफेक्ट मुद्दा बन गया। जाहिर है, BJP ने कांग्रेस पर हमला बोला और माफी की डिमांड की। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के बाकी साथी थोड़ा पीछे हट गए। सैम पित्रोदा का ये पुराना स्टाइल है – पहले बम फोड़ो, फिर सफाई दो। 2019 में 1984 सिख दंगों पर ‘हुआ सो हुआ’ कहकर, 2024 में पैतृक संपत्ति गरीबों में बांटने की सलाह देकर उन्होंने पहले भी कांग्रेस को मुश्किल में डाला था।
BJP ने तो कमाल कर दिया! राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और सीधा गांधी-वाड्रा परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये परिवार की देश-विरोधी सोच दिखाती है, जो भारत की संप्रभुता के खिलाफ है। वीर सैनिकों से माफी मांगो! भंडारी ने सवाल दागा – गांधी परिवार का दिल पाकिस्तान में बसता है, ये कांग्रेस को जनता कभी माफ नहीं करेगी। अगर कोई नेता पाकिस्तान को अपना घर मान ले, तो देशभक्त इसे कैसे स्वीकार करेंगे? क्या ऐसी मेंटालिटी वाले लोग भारत की सिक्योरिटी और डेमोक्रेसी की रखवाली कर पाएंगे?
विपक्ष की तरफ से रिएक्शन मिला-जुला। कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज पवन खेड़ा ने कहा कि उन्होंने बयान तो देखा ही नहीं। सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन ने पाकिस्तान बनने के इतिहास का हवाला देकर पित्रोदा को सपोर्ट करने की कोशिश की। लेकिन INDIA गठबंधन के ज्यादातर दलों ने चुप्पी चुन ली, शायद विवाद से बचने के लिए।
सैम पित्रोदा का विवादों से गहरा कनेक्शन है। ‘हुआ सो हुआ’ और प्रॉपर्टी बांटने वाली बात के अलावा, 2024 में उन्होंने भारतीयों को अलग-अलग नस्लों से जोड़ा था – पूर्वोत्तर के लोग चाइनीज, उत्तर के यूरोपियन, पश्चिम के अरब, दक्षिण के अफ्रीकी। उस वक्त कांग्रेस ने ऑफिशियली खुद को अलग कर लिया था। ‘मिडिल क्लास स्वार्थी’ जैसे बयान भी उनकी लिस्ट में हैं। लगता है, सैम साहब को बोलते वक्त ब्रेक लगाने की आदत डालनी पड़ेगी!