उत्तर प्रदेश (यूपी), जो अपनी समृद्ध कृषि परंपरा के लिए जाना जाता है, में जैविक खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने टिकाऊ खेती को प्राथमिकता देते हुए यूपी जैविक खेती मिशन शुरू किया है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए है। इस लेख में हम मिशन के उद्देश्यों, सरकारी योजनाओं, यूपी में कृषि की वर्तमान स्थिति और जैविक खेती के महत्व को समझेंगे।
जैविक खेती क्या है?
जैविक खेती एक ऐसी कृषि पद्धति है जो प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों पर आधारित है। इसमें रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और जेनेटिकली मॉडिफाइड बीजों का उपयोग नहीं होता। इसके बजाय, जैविक खाद, कम्पोस्ट और प्राकृतिक कीट नियंत्रण विधियों का उपयोग किया जाता है। जैविक खेती के फायदे हैं:
- स्वस्थ उत्पाद: जैविक फल, सब्जियां और अनाज हानिकारक रसायनों से मुक्त होते हैं, जो इन्हें सुरक्षित और पौष्टिक बनाते हैं।
- पर्यावरणीय स्थिरता: यह मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखता है, प्रदूषण कम करता है और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है।
- मिट्टी की सेहत: जैविक तरीके मिट्टी की संरचना और उर्वरता को बेहतर बनाते हैं, जिससे बंजरपन रुकता है।
यूपी में, जहां रासायनिक खेती ने मिट्टी को नुकसान पहुंचाया है और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ाई हैं, जैविक खेती एक टिकाऊ विकल्प है।
उत्तर प्रदेश जैविक खेती मिशन: मुख्य बिंदु
योगी आदित्यनाथ सरकार ने हर गांव में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक खेती मिशन शुरू किया है। बुंदेलखंड में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे अब सभी जिलों में लागू किया गया है। मिशन के प्रमुख हिस्से हैं:
1. क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण
- हर ग्राम पंचायत में जैविक खेती के क्लस्टर बनाए जा रहे हैं।
- प्रत्येक क्लस्टर 50 हेक्टेयर में फैला होगा और इसमें कम से कम 125 किसान शामिल होंगे।
- गंगा जैसे नदियों के किनारे 5 किमी के दायरे में प्राकृतिक खेती को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।
2. वित्तीय प्रोत्साहन
- जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को सब्सिडी दी जाएगी:
- पहला साल: प्रति क्लस्टर ₹7.16 लाख।
- दूसरा साल: प्रति क्लस्टर ₹6.83 लाख।
- यह राशि जैविक खाद, बीज और बायो-पेस्टिसाइड्स खरीदने के लिए होगी।
3. बुनियादी ढांचा सहायता
- मिशन किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) से जोड़ेगा, जो निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करेंगे:
- कृषि मशीनरी बैंक।
- कस्टम हायरिंग सेंटर।
- गोदाम और कोल्ड स्टोरेज।
- आधुनिक मार्केटिंग प्लेटफॉर्म, ताकि जैविक उत्पादों को बेहतर बाजार मिले।
4. प्रमाणन और मार्केटिंग
- राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत जैविक प्रमाणन की सुविधा दी जाएगी, जो उत्पादों की प्रामाणिकता और बाजार विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगा।
- प्रमाणित जैविक उत्पादों को प्रीमियम कीमत मिलती है, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश में कृषि की वर्तमान स्थिति
भारत के सबसे बड़े कृषि प्रधान राज्य के रूप में, यूपी देश के खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, कई चुनौतियां हैं:
- मिट्टी का क्षरण: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हुई है, और कुछ क्षेत्र बंजर हो रहे हैं।
- बारिश पर निर्भरता: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार, यूपी का 60% कृषि क्षेत्र बारिश पर निर्भर है, जिससे जलवायु परिवर्तन का खतरा है।
- उर्वरक लागत: उर्वरकों की कीमतों में 30–40% की वृद्धि हुई है, जिससे किसानों की लागत बढ़ी है।
- छोटे किसानों की समस्या: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी रिसर्च (NIAP) के अनुसार, उर्वरक सब्सिडी का 60% बड़े किसानों को मिलता है, जिससे छोटे किसानों को नुकसान होता है।
इन चुनौतियों के बावजूद, यूपी की कृषि क्षमता अपार है, और जैविक खेती मिशन इन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास कर रहा है।
जैविक खेती को समर्थन देने वाली सरकारी योजनाएं
केंद्र और यूपी सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं:
1. परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)
- केंद्र सरकार की योजना, जिसे यूपी में सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
- जैविक इनपुट्स, प्रशिक्षण और प्रमाणन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य।
2. जैविक इनपुट्स के लिए सब्सिडी
- राज्य सरकार जैविक खाद, बीज और बायो-पेस्टिसाइड्स पर सब्सिडी देती है।
- किसानों को जैविक तकनीकों पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
3. FPOs के लिए समर्थन
- FPOs को वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जाती है, ताकि वे मजबूत हों।
- FPOs छोटे किसानों को बाजार, मशीनरी और संसाधनों तक पहुंचने में मदद करते हैं।
4. जैविक प्रमाणन
- सरकार प्रमाणन प्रक्रिया का समर्थन करती है, ताकि जैविक उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करें।
- प्रमाणित उत्पादों को बेहतर बाजार और अधिक आय मिलती है।
जैविक खेती की चुनौतियां
जैविक खेती मिशन के कई लाभ हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं:
- उच्च लागत: जैविक इनपुट्स और प्रमाणन प्रक्रिया छोटे किसानों के लिए महंगी हो सकती है।
- जलवायु परिवर्तन: केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) के अनुसार, अनियमित मानसून और पानी की कमी खेती के लिए जोखिम हैं।
- सब्सिडी की सीमित पहुंच: NIAP के अनुसार, उर्वरक सब्सिडी का अधिकांश लाभ बड़े किसानों को मिलता है, जिससे छोटे किसान वंचित रहते हैं।
- जागरूकता की कमी: कई किसानों को जैविक खेती की तकनीकों और लाभों की जानकारी नहीं है।
बजट 2025: जैविक खेती को बढ़ावा
यूपी का कृषि बजट 2025 जैविक खेती को प्राथमिकता देता है:
- क्लस्टर-आधारित खेती: गंगा और अन्य नदियों के किनारे क्लस्टर विकास के लिए अधिक फंड।
- सौर पंप: सौर-संचालित सिंचाई के लिए ₹15,000 करोड़, जिससे लागत 20–25% कम होगी।
- डिजिटल खेती: ड्रोन और स्मार्ट सिंचाई के लिए ₹2,000 करोड़।
- MSP में वृद्धि: धान और गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 5–7% की बढ़ोतरी।
हालांकि, नीति आयोग के अनुसार, केवल 6% किसानों को MSP का लाभ मिलता है, जिससे छोटे किसानों तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत है।
जैविक खेती क्यों महत्वपूर्ण है?
जैविक खेती केवल एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि स्थिरता और स्वास्थ्य की दिशा में एक आंदोलन है:
- स्वास्थ्य लाभ: रसायन-मुक्त उत्पाद स्वास्थ्य जोखिमों, जैसे कि कीटनाशकों से बच्चों में समयपूर्व यौवन, को कम करते हैं।
- मिट्टी का संरक्षण: यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है और दीर्घकालिक क्षरण को रोकता है।
- आर्थिक सशक्तीकरण: जैविक उत्पादों की प्रीमियम कीमतों से किसानों की आय बढ़ती है।
- पर्यावरण संरक्षण: यह प्रदूषण कम करता है और जल संरक्षण में मदद करता करता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश का जैविक खेती मिशन टिकाऊ कृषि की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। वित्तीय सहायता, बुनियादी ढांचा और प्रमाणन प्रदान करके योगी सरकार किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उच्च लागत और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां हैं, लेकिन क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण और आधुनिक सुविधाएं उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जगाती हैं। किसान, नीति निर्माता और उपभोक्ताओं को मिलकर यूपी की कृषि को स्वस्थ, समृद्ध और टिकाऊ बनाने के लिए जैविक खेती को अपनाना चाहिए।
क्या आप यूपी के किसान या कृषि समुदाय से हैं? जैविक खेती मिशन पर अपने विचार साझा करें और बताएं कि यह आपके क्षेत्र को कैसे फायदा पहुंचा सकता है। सब्सिडी और प्रमाणन की अधिक जानकारी के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना की आधिकारिक वेबसाइट देखें या अपने स्थानीय कृषि कार्यालय से संपर्क करें