सीमा विवाद के बावजूद कूटनीतिक प्रगति
भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की हालिया चीन यात्रा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। बीजिंग में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से हुई मुलाकात के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई:
- एससीओ में चीन का समर्थन: भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में चीन की अध्यक्षता को अपना समर्थन दिया
- कैलाश मानसरोवर यात्रा की पुनः शुरुआत: 4 साल के अंतराल के बाद इस धार्मिक यात्रा का फिर से आयोजन
- प्रधानमंत्री मोदी-राष्ट्रपति शी जिनपिंग वार्ता का सकारात्मक प्रभाव: कजान में हुई बैठक के बाद से संबंधों में सुधार
कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्व
कोरोना महामारी और गलवान घाटी संघर्ष (2020) के बाद रुकी यह यात्रा इस साल जून से फिर शुरू हो गई है। प्रमुख तथ्य:
- 750 भारतीय तीर्थयात्रियों को इस वर्ष यात्रा करने का अवसर मिलेगा
- हिंदू, जैन और बौद्ध समुदायों के लिए इसका विशेष धार्मिक महत्व
- 1981 से चली आ रही यह परंपरा द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक
एससीओ में भारत की सक्रिय भूमिका
विदेश मंत्री जयशंकर ने तियांजिन में SCO विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया। महत्वपूर्ण बिंदु:
- यह जयशंकर की पांच वर्षों में पहली चीन यात्रा थी
- चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय वार्ता हुई
- G20 बैठक (जोहान्सबर्ग, फरवरी 2023) के बाद यह दूसरी महत्वपूर्ण मुलाकात
भारत की सतर्क कूटनीति
भारत ने चीन के साथ संबंध सुधारने के साथ-साथ अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा का संतुलन बनाया है:
- सैन्य स्तर पर सतर्कता: गलवान घटना के बाद LAC पर तैनाती बरकरार
- आर्थिक निर्भरता कम करना: चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध और आयात में कटौती
- कूटनीतिक जुड़ाव: SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जारी
भविष्य की दिशा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा “हमारे संबंधों के निरंतर बेहतर होने” की दिशा में एक कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि:
- व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ने की संभावना
- सीमा विवाद पर वार्ता जारी रहेगी
- बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के नए अवसर