हाल ही में भारत सरकार ने एक ऐसा कानून बनाया है, जो राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए पहुंच चुका है। इस मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा से एक बिल पास होकर एक्ट बनने की ओर बढ़ गया है, जिसमें ऑनलाइन गेम खेलने पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है। ऑनलाइन गेम कौन से? वे गेम जिनमें पैसा लगाकर खेला जाता है, जैसे फैंटसी स्पोर्ट्स, रमी और पोकर। आए दिन इन खेलों के विज्ञापन दिखते हैं और खबरें भी आती रहती हैं- कोई अवसाद में है तो कोई आत्महत्या कर रहा है। इन्हें रोकने के लिए सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग बिल लाया है, जो रियल मनी गेम्स पर पाबंदी लगाएगा। अगर आप नए हैं, तो चैनल सब्सक्राइब कर लें। अपनी राय कमेंट में बताएं और इस लेख को दोस्तों के साथ शेयर करें। इतनी मेहनत से जानकारी देते हैं, तो बदले में लाइक, शेयर और सब्सक्राइब तो बनता है। मोटिवेशन मिलेगा तो और अच्छा काम करेंगे।
संसद में सरकार ने बिल पेश किया, जिसमें साफ कहा गया कि ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 से मनी गेम्स को पूरी तरह रेगुलेट किया जाएगा। प्रमोशन रोक दिया जाएगा। कुल मिलाकर ऐसे खेल अब नहीं खेले जा सकेंगे। इससे गेमिंग कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। वे कंपनियां जो गेम खेलाकर आईपीओ तक ले आईं, उनके स्टॉक धड़ाम हो गए। आज का विषय महत्वपूर्ण है। एक तरफ गेमिंग कंपनियां सरकार के फैसले से स्टॉक गिरते देख रही हैं, तो दूसरी तरफ देश में 20,000 करोड़ सालाना टैक्स देने वाला ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म क्या बंद हो जाएगा? लगभग 45 करोड़ लोग भारत में ऑनलाइन गेम खेलते हैं। इन सवालों के जवाब आज ढूंढेंगे।
आमतौर पर लोग पैसा लगाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी स्किल से जीतेंगे और अमीर बनेंगे। लेकिन अब सरकार ने फैंटसी स्पोर्ट्स जैसे ड्रीम 11, रमी, पोकर जैसे गेम्स को रेगुलेट करने के लिए प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 को 20 अगस्त को लोकसभा और 21 अगस्त को राज्यसभा में पास कर दिया। यहां ध्वनि मत से बिल पास हुआ। केंद्र की तरफ से अश्विनी वैष्णव ने इसे पेश किया। इसमें ई-स्पोर्ट्स को प्रमोट करने और ऑनलाइन सोशल गेम्स को बढ़ावा देने का प्लान है, लेकिन पैसे वाले गेम्स को रोक दिया जाएगा।
लोकसभा में हंगामा था, क्योंकि एक और बिल पर विपक्ष नाराज था, जिसमें सीएम, पीएम और मंत्रियों की गिरफ्तारी पर पद से हटाने का प्रस्ताव था। लेकिन इस बिल की ज्यादा चर्चा नहीं हुई, जबकि यह बहुत जरूरी था। इससे रियल मनी गेम्स पर रोक लगेगी। ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री 11% सीएजीआर से बढ़ रही है। सरकार को डर है कि मध्यम वर्ग इसमें फंस न जाए। छोटी घटनाएं बड़ी न बनें। लोग लालच में पैसा गंवाते हैं, फिर और लगाते हैं। कई लोग जमा पूंजी, उधार या संपत्ति बेचकर खेलते हैं। जब रास्ता नहीं मिलता, तो गलत कदम उठाते हैं। इन्हीं को देखकर सरकार ने कदम उठाया।
भारत में ऑनलाइन गेम तीन कैटेगरी में: पैसे वाले, बिना पैसे वाले और ई-स्पोर्ट्स जहां दो-तीन लोग खेल सकते हैं लेकिन बैटिंग नहीं। सरकार ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देगी, जैसे कॉल ऑफ ड्यूटी, BGMI, फ्री फायर, GTA। इन्हें प्रमोशन मिलेगा। लेकिन रियल मनी गेम्स जहां यूपीआई, कार्ड, वॉलेट से पैसा ट्रांसफर होता है, उन पर रोक। सजा और जुर्माना भी होगा। रेगुलेट करने के लिए अथॉरिटी बनेगी।
रियल मनी गेम्स में खिलाड़ियों को सजा नहीं, लेकिन प्रमोट करने वालों को 3 साल जेल और 1 करोड़ जुर्माना। विज्ञापन चलाने वालों को 2 साल जेल और 50 लाख जुर्माना। कौन से गेम इस कैटेगरी में, यह अथॉरिटी तय करेगी। साथ ही, बिना पैसे वाले गेम्स को बढ़ावा मिलेगा। ई-स्पोर्ट्स को प्रमोशन, लेकिन हानिकारक पैसे वाले गेम्स रुकेंगे। ऑनलाइन सोशल, कल्चरल गेम्स बढ़ेंगे। ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा, लेकिन अवैध एक्टिविटी और मनी गेम्स रुकेंगे।
सरकार को इसका नुकसान झेलना पड़ा। पहले जीएसटी 28% और टैक्स 30% से 20,000 करोड़ टैक्स मिलता था। लेकिन नागरिकों की जान ज्यादा महत्वपूर्ण है। 400 स्टार्टअप्स और 25,000 करोड़ एफडीआई लगा, लेकिन सरकार ने फैसला लिया। एसोसिएशन ने गृह मंत्री से अपील की, लेकिन फैसला नहीं बदला।
अब कंपनियां विज्ञापन से कमा सकती हैं, लेकिन रेवेन्यू कम होगा। गूगल प्ले और ऐप स्टोर पर ऐसे ऐप्स नहीं रहेंगे। देखना है सरकार पुनर्विचार करती है या फैसला बरकरार रखती है।