ईरान में बढ़ते तनाव और इजराइल के साथ चल रहे संघर्ष के बीच भारत सरकार ने वहां फंसे 10,765 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं। इनमें से लगभग 60% भारतीय, यानी करीब 6,000, मेडिकल छात्र हैं, जो ईरान की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों जैसे तेहरान यूनिवर्सिटी और शाह बस्ती यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए गए हैं। ईरान में मेडिकल शिक्षा की लागत भारत की तुलना में किफायती होने के कारण हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र वहां पढ़ाई के लिए जाते हैं। इसके अलावा, कुछ भारतीय वहां काम की तलाश में या पर्यटक के रूप में भी मौजूद हैं।
ईरान में क्यों है खतरा?
हाल के दिनों में ईरान की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई है। इजराइल द्वारा किए जा रहे हवाई हमलों ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। ईरान का हवाई रक्षा तंत्र अप्रभावी साबित हो रहा है, जिसके कारण इजराइली मिसाइलें आसानी से निशाना बना रही हैं। हाल ही में ईरान के स्टेट टेलीविजन पर एक लाइव प्रसारण के दौरान स्टूडियो पर बम गिरने की घटना ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया। इस हमले में स्टूडियो को भारी नुकसान पहुंचा और यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। ऐसी परिस्थितियों में वहां रह रहे भारतीयों, खासकर छात्रों, के लिए खतरा बढ़ गया है।
भारत का निकासी अभियान: ऑपरेशन की शुरुआत
भारत सरकार ने हमेशा विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सक्रियता दिखाई है, और इस बार भी यह परंपरा कायम है। भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, ताकि वे दूतावास से संपर्क में रह सकें। दूतावास ने एक पोर्टल के माध्यम से पहले से पंजीकृत भारतीयों की जानकारी एकत्र की है और अब सक्रिय रूप से उनकी स्थिति का आकलन कर रहा है।
पहले चरण में, भारत ने आर्मेनिया की सीमा के रास्ते भारतीय नागरिकों के एक समूह को निकालना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, पहले बैच में लगभग 100 भारतीय आज रात तक आर्मेनिया सीमा पार कर लेंगे। भारत सरकार ने ईरान के साथ बातचीत कर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया है। इसके अलावा, बांग्लादेश, नेपाल और अन्य देशों के नागरिकों को भी भारत अपने निकासी अभियान में शामिल कर सकता है, जैसा कि पहले अफगानिस्तान और यूक्रेन जैसे संकटों में किया गया था।
निकासी के लिए रास्ते और चुनौतियां
ईरान का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण हवाई मार्ग से निकासी संभव नहीं है। इजराइल ने भी हवाई हमलों की चेतावनी दी है, जिससे हवाई यात्रा जोखिम भरी हो गई है। ऐसे में भारत सरकार के पास दो मुख्य विकल्प हैं:
जमीनी मार्ग: ईरान के पड़ोसी देशों—आर्मेनिया, अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान—के रास्ते निकासी की जा सकती है। इनमें आर्मेनिया सबसे विश्वसनीय विकल्प है, क्योंकि भारत के साथ इसके संबंध मजबूत हैं। तेहरान से आर्मेनिया की दूरी लगभग 1,000 किलोमीटर है, जिसे बस या अन्य सड़क मार्गों से तय करने में डेढ़ से दो दिन लग सकते हैं। तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान भी संभावित रास्ते हैं, लेकिन पाकिस्तान और तुर्की के साथ भारत के तनावपूर्ण संबंध इन मार्गों को अव्यवहारिक बनाते हैं।
समुद्री मार्ग: ईरान के बंदर अब्बास और चाबहार बंदरगाहों के जरिए समुद्री रास्ते से भी निकासी संभव है। भारत इन बंदरगाहों का उपयोग पहले भी रणनीतिक रूप से कर चुका है।
भारतीय दूतावास की सलाह
भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। दूतावास ने 24/7 हेल्पलाइन नंबर (+98-9121764809, +98-9216553218) जारी किए हैं, जिन पर संपर्क कर भारतीय अपनी स्थिति की जानकारी दे सकते हैं। दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूनिवर्सिटियों और छात्रावासों पर सीधे हमले की संभावना कम है, लेकिन मिसाइल हमलों के कारण आसपास के क्षेत्रों में भी नुकसान हो सकता है।
वैश्विक संदर्भ और भारत की भूमिका
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक चिंता का विषय है। ईरान ने सीजफायर की मांग की है, लेकिन इजराइल के हमले रुकने के कोई संकेत नहीं हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान भी जवाबी हमले की तैयारी में है। इस बीच, भारत ने न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, बल्कि इजराइल और ईरान दोनों के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों का उपयोग कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की है।
पिछले अनुभवों, जैसे यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान, भारत ने रूस के साथ बातचीत कर कुछ समय के लिए युद्धविराम सुनिश्चित किया था, ताकि भारतीय छात्र सुरक्षित निकल सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इजराइल से भी ऐसी ही अपील कर सकता है, ताकि कम से कम एक दिन का सुरक्षित मार्ग उपलब्ध हो।
भारत सरकार का यह निकासी अभियान न केवल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भारत की वैश्विक कूटनीतिक ताकत को भी दर्शाता है। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और सभी भारतीयों से अपील की है कि वे शांत रहें और दूतावास के निर्देशों का पालन करें।
