सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम ने पटना हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने पर न्यायमूर्ति पंचोली शीर्ष अदालत में लगभग आठ वर्षों तक सेवा देंगे और अक्टूबर 2031 में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पद तक पहुँच सकते हैं। वह इस शीर्ष पद पर डेढ़ साल से अधिक समय तक कार्यरत रहेंगे।
गुजरात हाईकोर्ट से तीसरे न्यायाधीश
यदि न्यायमूर्ति पंचोली की नियुक्ति होती है, तो वह गुजरात हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने वाले तीसरे वर्तमान न्यायाधीश बन जाएंगे। इससे पहले न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया भी गुजरात हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त हुए थे। न्यायमूर्ति पारदीवाला मई 2028 से अगस्त 2030 तक देश के मुख्य न्यायाधीश रहेंगे।
न्यायमूर्ति विपुल पंचोली का सफर
न्यायमूर्ति विपुल पंचोली का जन्म 28 मई, 1968 को हुआ था। उन्होंने सितंबर 1991 में अधिवक्ता के रूप में अपना करियर शुरू किया और गुजरात हाईकोर्ट में व्यापक अभ्यास किया। वह 1 अक्टूबर, 2014 को गुजरात हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किए गए और 10 जून, 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने। जुलाई 2023 में उनका तबादला पटना हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद पर कर दिया गया, जहाँ वह वर्तमान में कार्यरत हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दीर्घ कार्यकाल
सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति होने पर, न्यायमूर्ति पंचोली 27 मई, 2033 तक सेवा देने की उम्मीद है। वह अक्टूबर 2031 में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची की सेवानिवृत्ति के बाद देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश बन सकते हैं। इस पद पर उनका कार्यकाल लगभग डेढ़ वर्ष का होगा।
कोलेजियम की सिफारिश का महत्व
सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की यह सिफारिश भारतीय न्यायपालिका में उच्चस्तरीय नियुक्तियों की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद, न्यायमूर्ति पंचोली शीर्ष अदालत में अपना पदभार ग्रहण करेंगे। उनका दीर्घ कार्यकाल और भविष्य में मुख्य न्यायाधीश के रूप में नेतृत्व देश की न्यायिक प्रणाली के लिए एक स्थिर और अनुभवी मार्गदर्शन सुनिश्चित करेगा।