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बिहार मतदाता सूची विवाद: CEC ने दिया करारा जवाब, 1 सितंबर तक त्रुटियां बताने को कहा!

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Last updated: August 17, 2025 5:42 pm
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Bihar voter list dispute: CEC gave a befitting reply
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चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची संशोधन पर की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस, पार्टियों से मांगा सबूत। जानें पूरा मामला।

चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) ने रविवार को बिहार में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार की मतदाता सूची का संशोधन पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी तरीके से हो रहा है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में हुई, जो बिहार में SIR शुरू होने के बाद आयोग की पहली आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग थी। यह ब्रीफिंग कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया “वोट चोरी” के आरोपों के जवाब में भी थी।

पारदर्शिता पर जोर

ज्ञानेश कुमार ने कहा, “सभी राजनीतिक दल चुनाव आयोग के साथ रजिस्ट्रेशन के जरिए अस्तित्व में आते हैं। फिर आयोग उनमें भेदभाव कैसे कर सकता है? हमारे लिए सभी दल बराबर हैं। चाहे कोई किसी भी पार्टी से हो, हम अपने संवैधानिक कर्तव्य से पीछे नहीं हटेंगे।” उन्होंने बताया कि SIR के दौरान मतदाताओं, राजनीतिक दलों और बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने दस्तावेजों को सत्यापित किया और हस्ताक्षर किए। वीडियो टेस्टिमोनियल्स भी जमा किए गए। CEC ने दावा किया कि कुछ नेता इन दस्तावेजों को नजरअंदाज कर “भ्रम फैलाने” की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा, “जब बिहार के सात करोड़ से ज्यादा मतदाता चुनाव आयोग के साथ खड़े हैं, तो न तो आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया जा सकता है और न ही मतदाताओं की।”

वोटर प्राइवेसी पर सवाल

राहुल गांधी द्वारा मतदाता दस्तावेजों को मीडिया में साझा करने पर CEC ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “क्या चुनाव आयोग को किसी मतदाता का CCTV फुटेज, जिसमें उनकी मां, बेटी या बहू शामिल हों, सार्वजनिक करना चाहिए?” यह टिप्पणी राहुल गांधी के “वोट चोरी” के आरोपों को समर्थन देने के लिए दस्तावेज जारी करने के जवाब में थी।

“वोट चोरी” का जवाब

चुनाव प्रक्रिया का बचाव करते हुए CEC ने कहा, “चुनाव में एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारी, 10 लाख से ज्यादा बूथ लेवल एजेंट्स और 20 लाख पोलिंग एजेंट्स शामिल होते हैं। इतनी पारदर्शी प्रक्रिया में क्या कोई वोट चुरा सकता है?” उन्होंने दोहरे मतदान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसके लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चुनाव परिणामों को सुप्रीम कोर्ट में 45 दिनों के भीतर चुनौती दी जा सकती है। “इस अवधि के बाद बेबुनियाद आरोप लगाने का मकसद देश के लोग समझते हैं,” उन्होंने तंज कसते हुए कहा।

राहुल गांधी को सात दिन की मोहलत

ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी से कहा कि वे सात दिनों के भीतर मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों को साबित करने के लिए शपथ पत्र जमा करें। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो उनके “वोट चोरी” के दावे बेबुनियाद माने जाएंगे। CEC ने स्पष्ट किया कि कोई भी गैर-मतदाता शिकायतकर्ता केवल शपथ पत्र के साथ गवाह के तौर पर शिकायत दर्ज कर सकता है।

राहुल गांधी ने पहले दावा किया था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा वोट “चुराए” गए। उन्होंने डुप्लिकेट और अवैध प्रविष्टियों का हवाला दिया था। लेकिन मुख्य चुनाव अधिकारियों के बार-बार अनुरोध के बावजूद राहुल ने शपथ पत्र दाखिल नहीं किया।

मशीन-रीडेबल सूची पर सफाई

मशीन-रीडेबल मतदाता सूची की मांग पर CEC ने 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि ऐसी सूचियां मतदाताओं की गोपनीयता का उल्लंघन कर सकती हैं। उन्होंने कहा, “मशीन-रीडेबल और सर्चेबल मतदाता सूची में फर्क है। ECI की वेबसाइट पर उपलब्ध सूची सर्चेबल है, मशीन-रीडेबल नहीं।”

SIR का उद्देश्य और प्रक्रिया

CEC ने बताया कि SIR का मकसद मतदाता सूची को शुद्ध करना है। यह प्रक्रिया भारत में 10 बार हो चुकी है, लेकिन पिछले दो दशकों में नहीं हुई। इस साल की शुरुआत में लाखों डुप्लिकेट EPIC को ठीक किया गया। 2003 से पहले की माइग्रेशन की वजह से कुछ मतदाताओं के नाम कई जगह दर्ज हैं। “अगर जल्दबाजी में डिलीशन की गई, तो गलतियां हो सकती हैं। आयोग मतदाताओं के साथ चट्टान की तरह खड़ा है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी खारिज किया कि संशोधन में जल्दबाजी हो रही है। “प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत हर चुनाव से पहले सुधार अनिवार्य है। बिहार में यह काम 24 जून से शुरू हुआ और 20 जुलाई तक पूरा हो गया,” उन्होंने बताया।

1 सितंबर की डेडलाइन

ज्ञानेश कुमार ने सभी राजनीतिक दलों से 1 सितंबर तक ड्राफ्ट मतदाता सूची में त्रुटियां बताने की अपील की। उन्होंने कहा, “1 अगस्त से हमारे डेली बुलेटिन शुरू होने के बाद से किसी भी दल ने एक भी आपत्ति दर्ज नहीं की। इसका मतलब या तो सूची पूरी तरह सही है, या पार्टियों ने अपना होमवर्क नहीं किया।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं सभी 12 मान्यता प्राप्त दलों से कहना चाहता हूं कि 1 सितंबर तक त्रुटियां बताएं। आयोग इन्हें सुधारने को तैयार है। लेकिन अगर 1 सितंबर के बाद ऐसे ही आरोप लगाए गए, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?”

कांग्रेस का पलटवार

चुनाव आयोग की ब्रीफिंग पर कांग्रेस ने कहा कि आयोग अपनी “अक्षमता” और “खुली पक्षपात” के लिए बेनकाब हो चुका है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर पोस्ट किया, “राहुल गांधी ने सासाराम से वोटर अधिकार यात्रा शुरू करने के बाद CEC ने कहा कि वे सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों में भेदभाव नहीं करते। यह हास्यास्पद है, क्योंकि इसके खिलाफ ढेर सारे सबूत हैं। CEC ने राहुल गांधी के सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं दिया।”

रमेश ने यह भी पूछा कि क्या आयोग 14 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को पूरी तरह लागू करेगा।

भविष्य की योजनाएं

CEC ने बताया कि तीन चुनाव आयुक्त मिलकर तय करेंगे कि SIR की प्रक्रिया पश्चिम बंगाल या अन्य राज्यों में कब शुरू होगी।

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