लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वाकांक्षी स्वदेशी रक्षा परियोजना ‘सुदर्शन चक्र’ का ऐलान किया। यह एक बहु-स्तरीय, एकीकृत हवाई रक्षा प्रणाली है, जिसे 2035 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
सुदर्शन चक्र का उद्देश्य
जून में हुई एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठक में भारत ने अपनी स्वदेशी बहु-स्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसकी आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई, जब विभिन्न स्तरों के हवाई खतरों से निपटने की चुनौती सामने आई।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रणाली अभी प्रारंभिक चरण में है और इसका ढांचा व तकनीकी पहलू अभी विकसित किए जा रहे हैं। यह प्रणाली देश के मौजूदा हवाई रक्षा ढांचे के साथ मिलकर काम करेगी, जो शहरों, सैन्य ठिकानों, बिजली संयंत्रों, रेलवे, बंदरगाहों और अस्पतालों जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान करेगी।
कैसे काम करेगी यह प्रणाली?
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सुदर्शन चक्र “रडार, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलों का एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क” होगा। यह नेटवर्क मिसाइलों, ड्रोन्स, तोपखाने के गोलों और यहां तक कि स्वार्म (झुंड) हमलों तथा लॉइटरिंग म्यूनिशन्स को रीयल-टाइम में ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
यह प्रणाली अकाश, S-400, QR-SAM और भविष्य की लेजर-आधारित इंटरसेप्टर प्रणालियों के साथ मिलकर काम करेगी, जिससे छोटी, मध्यम और लंबी दूरी के हवाई खतरों से सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम
‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत विकसित इस प्रणाली में DRDO और कई निजी कंपनियां शामिल होंगी। इजरायल की ‘आयरन डोम’ प्रणाली के विपरीत, जो केवल छोटी दूरी के रॉकेट और मोर्टार हमलों पर केंद्रित है, सुदर्शन चक्र लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और अन्य व्यापक खतरों से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों से संभावित हवाई हमलों का प्रभावी जवाब देने में सक्षम होगी।
पीएम मोदी का बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमने भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र का मार्ग चुना है। देश और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हम अपनी क्षमताओं को लगातार उन्नत करेंगे। अगले 10 वर्षों में, चाहे वह रणनीतिक स्थान हों, नागरिक क्षेत्र हों या हमारे आस्था के केंद्र, हम एक ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कवच’ विकसित करेंगे, जो किसी भी हमले को विफल कर सके।”
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा, “हमने दुनिया को अपनी शक्ति दिखाई है। पाकिस्तान ने हमारे सैन्य ठिकानों, नागरिक क्षेत्रों और मंदिरों पर हमला किया, लेकिन हमारी रक्षा प्रणाली ने उन सभी को विफल कर दिया।”
2035 तक पूर्ण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि 2035 तक सुदर्शन चक्र प्रणाली को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया जाए। यह भारत की रक्षा क्षमताओं में एक बड़ा कदम होगा और देश को हवाई खतरों के प्रति और अधिक सुरक्षित बनाएगा।
