भारतीय शेयर बाजार में आज, 8 अगस्त 2025 को, भारी बिकवाली के चलते निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। बीएसई सेंसेक्स 765.47 अंक (0.95%) गिरकर 79,857.79 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 232.85 अंक (0.95%) की गिरावट के साथ 24,363.30 पर बंद हुआ। इस गिरावट ने बीएसई में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन को 445.35 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 440.57 लाख करोड़ रुपये पर ला दिया, जिससे निवेशकों की संपत्ति में 5.22 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अमेरिकी टैरिफ नीतियों की अनिश्चितता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने इस गिरावट को और बढ़ावा दिया।
गिरावट के प्रमुख कारण
- अमेरिकी टैरिफ अनिश्चितता: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत सहित कई देशों पर लगाए गए टैरिफ्स (25% तक) ने वैश्विक व्यापार तनाव को बढ़ाया। इससे निर्यात-निर्भर भारतीय सेक्टर्स, जैसे फार्मा, मेटल, और आईटी, पर दबाव बढ़ा।
- FPI की बिकवाली: अगस्त 2025 में FPI ने हर कारोबारी दिन बिकवाली की, जिसमें कैश मार्केट से 15,950 करोड़ रुपये निकाले गए। इस साल अब तक FPI ने 1.13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है, जिसने बाजार की गिरावट को और गहरा किया।
- वैश्विक बाजारों में कमजोरी: वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंकाओं और ट्रम्प की टैरिफ नीतियों के कारण अन्य बाजारों में भी गिरावट देखी गई। जापान का निक्केई 2.8% और यूरोप का STOXX 600 3.2% गिरा, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
- कमजोर कॉर्पोरेट आय: Q1 FY26 के कमजोर नतीजों और कंपनियों के सतर्क दृष्टिकोण ने निवेशकों का भरोसा कम किया। विशेष रूप से आईटी और फाइनेंशियल सेक्टर्स में निराशाजनक प्रदर्शन ने बाजार को प्रभावित किया।
- तकनीकी स्तरों का टूटना: निफ्टी 50 ने 24,600 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर को तोड़ा, जिससे बिकवाली और तेज हुई। तकनीकी विश्लेषकों ने 24,200-24,450 के अगले सपोर्ट स्तर की ओर इशारा किया है।
बाजार का प्रदर्शन: टॉप गेनर्स और लूजर्स
- टॉप गेनर्स (सेंसेक्स): केवल पांच सेंसेक्स शेयर हरे निशान में बंद हुए।
- एनटीपीसी (NTPC): +1.39%
- टाइटन (Titan): +1.33%
- बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv): +0.66%
- ट्रेंट (Trent): +0.34%
- आईटीसी (ITC): +0.19%
- टॉप लूजर्स (सेंसेक्स): 25 शेयरों में गिरावट देखी गई, जिसमें शामिल हैं:
- भारती एयरटेल (Bharti Airtel): -3.41%
- टाटा मोटर्स (Tata Motors): -2.19%
- कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank): -2.03%
- महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M): -1.92%
- एक्सिस बैंक (Axis Bank): -1.82%
बीएसई का समग्र प्रदर्शन:
- कुल 4,173 शेयरों में कारोबार हुआ।
- 1,523 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,506 शेयरों में गिरावट रही।
- 144 शेयर सपाट रहे।
- 119 शेयरों ने 52-हफ्तों का नया उच्च स्तर और 110 ने नया निचला स्तर छुआ।
सेक्टोरल प्रदर्शन
- नकारात्मक प्रदर्शन: निफ्टी मेटल, फार्मा, और आईटी इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। फार्मा शेयर, जैसे औरोबिंदो फार्मा और सन फार्मा, 7.2% तक गिरे, क्योंकि ट्रम्प ने फार्मा सेक्टर पर टैरिफ की धमकी दी।
- सकारात्मक प्रदर्शन: कुछ FMCG और यूटिलिटी शेयर, जैसे आईटीसी और एनटीपीसी, ने बाजार की गिरावट के बावजूद मजबूती दिखाई।
तकनीकी विश्लेषण और विशेषज्ञों की राय
- रुपक डे, LKP सिक्योरिटीज: “निफ्टी ने 24,600 के सपोर्ट को तोड़ा है, जो मंदी का संकेत है। अगला सपोर्ट 24,400-24,450 पर है, और 24,800-25,000 अब रेजिस्टेंस जोन है। कमजोर सेंटिमेंट के चलते ‘सेल-ऑन-राइज’ रणनीति अपनानी चाहिए।”
- अजित मिश्रा, रेलिगेयर ब्रोकिंग: “निफ्टी 20-दिनों के EMA से नीचे आ गया है, जो सकारात्मक ट्रेंड में व्यवधान का संकेत है। कमाई की अस्थिरता के बीच सतर्कता और जोखिम प्रबंधन जरूरी है।”
- राहुल घोसे, ऑक्टानॉम टेक: “अमेरिका के साथ टैरिफ वार्ता में प्रगति या सकारात्मक खबर बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर हो सकती है।”
भविष्य का आउटलुक
- अल्पकालिक: विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी 24,200-24,450 के स्तर तक और गिर सकता है, अगर 24,600 का स्तर रिकवर नहीं हुआ।
- मध्यमकालिक: विश्लेषकों का अनुमान है कि सेंसेक्स मध्य 2025 तक 78,500 और साल के अंत तक 80,850 तक पहुंच सकता है, लेकिन यह रिकवरी धीमी और असमान होगी।
- सुझाव: लंबी अवधि के निवेशकों को गुणवत्तापूर्ण लार्ज-कैप शेयरों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि ट्रेडर्स को अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए।
निवेशकों के लिए सलाह
- जोखिम प्रबंधन: अस्थिर बाजार में स्टॉप-लॉस का उपयोग करें।
- सेक्टर चयन: डिफेंसिव सेक्टर्स जैसे FMCG और यूटिलिटी में अवसर तलाशें।
- लंबी अवधि का नजरिया: भारत की GDP वृद्धि (FY25 के लिए 6.5% अनुमान) और मजबूत घरेलू मांग दीर्घकालिक निवेश के लिए सकारात्मक हैं।
- समाचार पर नजर: भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और Q1 FY26 के बाकी नतीजों पर ध्यान दें।
8 अगस्त 2025 को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट ने निवेशकों को झटका दिया, जिसमें 5.22 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई। अमेरिकी टैरिफ, FPI बिकवाली, और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार को प्रभावित किया। हालांकि, कुछ FMCG और यूटिलिटी शेयरों ने लचीलापन दिखाया। विशेषज्ञ सतर्कता और गुणवत्तापूर्ण शेयरों पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। निवेशकों को धैर्य रखते हुए भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद पर भरोसा करना चाहिए।
