हाईवे देश के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान हैं। लेकिन जब यही हाईवे आपकी जेब पर भारी पड़ने लगते हैं, तो थोड़ा गुस्सा तो बनता है, है ना? आज हम बात करेंगे एक ऐसी खबर की, जो आपकी जेब और यात्रा दोनों को प्रभावित करने वाली है। सरकार अब हाईवे पर टोल वसूली को और सख्त करने जा रही है। आंकड़ों की मानें तो देश में हर साल टोल से करीब 400 करोड़ रुपये जमा हो रहे हैं, और सरकार का लक्ष्य है इसे बढ़ाकर 1.5 लाख करोड़ तक ले जाना। यानी टोल वसूली में तीन गुना इजाफा! लेकिन रुकिए, इसका मतलब ये नहीं कि टोल टैक्स बढ़ने वाला है। बल्कि, सरकार अब टोल चोरी रोकने के लिए लीक-प्रूफ सिस्टम ला रही है। तो चलिए, इस खबर को और गहराई से समझते हैं।
टोल चोरी का खेल खत्म!
आपने कई बार ऐसा किया होगा कि टोल बूथ के पास गाड़ी ले जाकर यू-टर्न मार लिया, या सवारी को टोल से पहले उतारकर दूसरी गाड़ी से आगे भेज दिया। इससे टोल बच जाता था, है ना? लेकिन अब सरकार इस चालाकी को पकड़ने के लिए तैयार है। कैसे? सैटेलाइट की मदद से! जी हां, भारत सरकार अब सैटेलाइट बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम ला रही है, जिसे ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) कहा जा रहा है। इस सिस्टम में आपकी गाड़ी पर एक खास ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) लगेगी, जो सैटेलाइट के जरिए आपकी लोकेशन ट्रैक करेगी और टोल अपने आप कट जाएगा।
अच्छी खबर ये है कि सरकार ने शुरुआती लालच भी दिया है। अगर आपकी गाड़ी में यह यूनिट लगी है, तो 20 किलोमीटर तक की यात्रा पर कोई टोल टैक्स नहीं देना होगा। यानी अपने घर से 20 किमी तक हाईवे का मजा लें, बिना पैसे खर्च किए! लेकिन जैसे ही आप 21वें किलोमीटर में घुसते हैं, पिछले 20 किमी का टोल भी कट जाएगा। तो ये मुफ्त की सवारी इतनी मुफ्त भी नहीं है!
फास्टैग का जमाना गया!
यह नया सिस्टम धीरे-धीरे फास्टैग की जगह लेगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अपने नियमों में बदलाव कर लिया है। 9 सितंबर 2024 को नेशनल हाईवे फी (डिटरमिनेशन ऑफ रेट्स एंड कलेक्शन) रूल्स 2008 में संशोधन किया गया है। अब टोल वसूली के लिए फास्टैग के साथ-साथ सैटेलाइट बेस्ड OBU और हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट्स का इस्तेमाल होगा। यानी अब टोल गेट पर रुकने की जरूरत नहीं। सैटेलाइट आपकी गाड़ी को ट्रैक करेगा, और टोल आपके अकाउंट से ऑटोमैटिक कट जाएगा, जैसे स्पीड लिमिट तोड़ने पर चालान घर आता है।
इस सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। बेंगलुरु-मैसूर और पानीपत-हिसार हाईवे पर इसे टेस्ट किया जा चुका है। जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप भी आयोजित की है, ताकि कंपनियां इस तकनीक को लागू करने के लिए तैयार हो सकें।
20 किमी मुफ्त यात्रा का लालच
अब बात करते हैं उस 20 किमी मुफ्त यात्रा की। ये ऑफर खासकर उन लोगों के लिए है, जिनका घर टोल बूथ के पास है। कई बार लोग शिकायत करते हैं कि उनका घर टोल के बिल्कुल करीब है, और सिर्फ 10 किमी जाने के लिए भी उन्हें पूरा टोल देना पड़ता है। पहले नियम था कि हर 60 किमी पर टोल बूथ होगा, लेकिन कई बार टोल बूथ आपके घर के पास ही बन जाता है। ऐसे में छोटी दूरी की यात्रा के लिए भी पूरा टोल देना पड़ता था। अब सरकार ने कहा है कि 20 किमी तक कोई टोल नहीं देना होगा, बशर्ते आपकी गाड़ी में GNSS यूनिट लगी हो और गाड़ी प्राइवेट हो।
लेकिन क्या ये ऑफर इतना शानदार है, जितना दिख रहा है? याद कीजिए, जब फास्टैग लॉन्च हुआ था, तब भी ऐसे ही ऑफर दिए गए थे। 2014 में फास्टैग की शुरुआत हुई, और 2021 तक इसे हर गाड़ी के लिए अनिवार्य कर दिया गया। उस वक्त 10% कैशबैक और डिस्काउंट जैसे ऑफर दिए गए थे। लेकिन बाद में टोल रेट्स बढ़ गए, और सारा फायदा खत्म! इस बार भी कुछ लोग सोच रहे होंगे कि 20 किमी मुफ्त यात्रा का ऑफर ले लिया जाए। लेकिन सावधान! सरकार पहले प्यार से OBU लगवाएगी, और अगर नहीं लगवाया, तो बाद में डबल टोल का डर दिखाकर इसे अनिवार्य कर सकती है।
सैटेलाइट की नजर से कोई नहीं बचेगा!
इस नए सिस्टम में भारत का गगन (GAGAN) सैटेलाइट सिस्टम इस्तेमाल होगा। ये वही सिस्टम है, जो हवाई जहाजों को सटीक लैंडिंग और टेकऑफ में मदद करता है। अगर हवाई जहाज 10 मीटर की सटीकता के साथ लैंड कर सकता है, तो आपकी गाड़ी का हाईवे पर होना या न होना भी गगन सैटेलाइट आसानी से पकड़ लेगा। यानी अब टोल गेट से बचने का कोई रास्ता नहीं। आपने बायपास लिया, दूसरा रास्ता चुना, या टोल से पहले यू-टर्न लिया, सैटेलाइट सब देख रहा है। आपका टोल आपके अकाउंट से ऑटोमैटिक कट जाएगा।
क्या होगा फायदा, और क्या नुकसान
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हमेशा कहते हैं कि अच्छे हाईवे से समय और ईंधन दोनों की बचत होती है। जैसे, पहले मुंबई-पुणे का सफर 7 घंटे में होता था, अब 2 घंटे में हो जाता है। दिल्ली-मुंबई का सफर 24 घंटे से घटकर 12 घंटे का हो गया है। इससे डीजल की खपत और गाड़ी का नुकसान कम होता है। लेकिन सवाल ये है कि टोल का पैसा इतना ज्यादा है कि ये बचत उतनी अहम नहीं रह जाती। कई बार 50-60 किमी की यात्रा में भी डेढ़ से दोगुना टोल देना पड़ता है।
टोल वसूली में पारदर्शिता जरूरी
टोल वसूली से सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है, लेकिन लोगों की जेब पर भी बोझ पड़ रहा है। कुछ हाईवे, जैसे जयपुर-दिल्ली हाईवे, चर्चा में रहते हैं। कहा जाता है कि इस हाईवे की लागत 8000 करोड़ थी, लेकिन अब तक 24000 करोड़ वसूल हो चुके हैं, और टोल अभी भी चल रहा है। (हालांकि, इस डेटा की सत्यता की पुष्टि नहीं हुई है।) सरकार को चाहिए कि टोल वसूली में पारदर्शिता लाए। ये तय हो कि कितने समय तक टोल लिया जाएगा, और लागत वसूल होने के बाद टोल हटाया जाए। अनंतकाल तक टोल वसूली से लोगों को लगता है कि सरकार उनकी जेब लूट रही है।
आप क्या सोचते हैं
तो दोस्तों, ये थी नई टोल वसूली सिस्टम की पूरी कहानी। सैटेलाइट की नजर से अब कोई नहीं बचेगा, लेकिन 20 किमी तक मुफ्त यात्रा का लालच भी है। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या टोल वसूली का ये तरीका सही है, या इसमें और सुधार की जरूरत है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें। अगर आपको ये खबर पसंद आई, तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। हम आपके लिए इतनी मेहनत से खबर लाते हैं, तो थोड़ा सा प्यार तो बनता है, है ना?
