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Artificial-Intelligence डेटा सेंटर्स के कारण पीने के पानी पर संकट की छाया 2030 तक हालत होंगे ख़राब

Retimes india
Last updated: August 17, 2025 5:59 pm
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Drinking water crisis due to Artificial-Intelligence data centers
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग आज हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है, चाहे वह शिक्षा, व्यवसाय, या तकनीकी नवाचार हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तकनीकी प्रगति का एक गंभीर दुष्परिणाम हमारे पीने के पानी पर पड़ रहा है? विश्व की लगभग आधी आबादी पहले ही पीने के पानी की कमी से जूझ रही है, और इस बीच AI डेटा सेंटर्स को ठंडा करने के लिए भारी मात्रा में पानी का उपयोग हो रहा है। यह पानी, जो पीने योग्य है, भाप बनकर उड़ रहा है, जिससे जल संकट और गहरा हो रहा है।

डेटा सेंटर्स की प्यास: कितना पानी खर्च हो रहा है?

AI के डेटा सेंटर्स को ठंडा करने के लिए शुद्ध, पीने योग्य पानी का उपयोग किया जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, GPT-3 जैसे AI मॉडल से 10-50 प्रश्न पूछने पर लगभग आधा लीटर पानी खर्च हो सकता है। यानी, एक प्रश्न के जवाब में औसतन 2-10 चम्मच पानी का उपयोग होता है। OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने दावा किया कि ChatGPT एक प्रश्न का जवाब देने में केवल एक चम्मच के 15वें हिस्से जितना पानी खर्च करता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा वास्तविकता से कम हो सकता है।
पानी की खपत कई कारकों पर निर्भर करती है:

  • सवाल का प्रकार: सामान्य सवालों के लिए कम डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत होती है, जिससे कम पानी खर्च होता है। जटिल और गहन सवालों के लिए ज्यादा प्रोसेसिंग और समय लगता है, जिससे पानी की खपत बढ़ जाती है।
  • जवाब की लंबाई: छोटे जवाबों में कम पानी खर्च होता है, जबकि लंबे जवाबों में ज्यादा।
  • प्रोसेसिंग का स्थान: डेटा सेंटर की भौगोलिक स्थिति और वहां की जलवायु भी पानी की खपत को प्रभावित करती है।
  • कैलकुलेशन की जटिलता: ज्यादा डेटा प्रोसेसिंग से पानी की खपत बढ़ती है।

बिजली और पानी का दोहरा बोझ

AI डेटा सेंटर्स न केवल पानी, बल्कि भारी मात्रा में बिजली भी खपत करते हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, ChatGPT एक सवाल का जवाब देने में Google की तुलना में 10 गुना ज्यादा बिजली खर्च करता है। बिजली उत्पादन के लिए कोयले, गैस, या परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में भाप उत्पन्न करने के लिए भी पानी का उपयोग होता है। इस तरह, AI की प्रोसेसिंग में पानी की खपत प्रत्यक्ष (कूलिंग) और अप्रत्यक्ष (बिजली उत्पादन) दोनों तरह से होती है।

2024 का आंकड़ा: पानी की बर्बादी

Google की 2024 की पर्यावरण रिपोर्ट के अनुसार, इसके डेटा सेंटर्स ने 37 अरब लीटर पानी का उपयोग किया, जिसमें से 29 अरब लीटर भाप बनकर उड़ गया। यह पानी वापस उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं रहा। माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसे अन्य तकनीकी दिग्गज भी अपने AI संचालन के लिए भारी मात्रा में पानी का उपयोग कर रहे हैं। IEA का अनुमान है कि 2030 तक डेटा सेंटर्स की पानी की खपत दोगुनी हो जाएगी।

भविष्य का खतरा: डेनमार्क से ज्यादा पानी की खपत

अमेरिकी अध्ययनों के अनुसार, 2027 तक AI उद्योग हर साल डेनमार्क जैसे देश की तुलना में 4-6 गुना ज्यादा पानी का उपयोग करेगा। यह आंकड़ा चिंताजनक है, क्योंकि यह पानी उन लोगों की जरूरतें पूरी कर सकता है, जो पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे हैं। खेती, पेयजल, और अन्य आवश्यकताओं के लिए पानी की उपलब्धता पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

पीने का पानी ही क्यों?

AI डेटा सेंटर्स में पीने योग्य पानी का उपयोग इसलिए किया जाता है, क्योंकि ये सर्वर महंगे और संवेदनशील होते हैं। समुद्री पानी या औद्योगिक पानी में मौजूद अशुद्धियां और बैक्टीरिया सर्वरों को जंग या क्षति पहुंचा सकते हैं। इसलिए, शुद्ध पानी का उपयोग अनिवार्य माना जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया में 80% पानी भाप बनकर बर्बाद हो जाता है, जिसे दोबारा उपयोग नहीं किया जा सकता।

क्या हैं विकल्प?

AI की पानी की खपत को कम करने के लिए कुछ उपायों पर काम चल रहा है:

  • वैकल्पिक कूलिंग सिस्टम: हवा आधारित कूलिंग या अन्य तकनीकों पर शोध हो रहा है, लेकिन ये बिजली की खपत बढ़ा सकते हैं।
  • समुद्री पानी का उपयोग: कुछ कंपनियां समुद्री पानी के उपयोग की संभावनाएं तलाश रही हैं, लेकिन यह अभी प्रारंभिक चरण में है और सर्वरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
  • ऊर्जा दक्षता: अधिक ऊर्जा-कुशल सर्वर और प्रोसेसिंग तकनीकों पर काम हो रहा है, जो पानी और बिजली की खपत को कम कर सकता है।

जल संकट और भविष्य की चेतावनी

जल संकट पहले से ही वैश्विक समस्या है, और AI की बढ़ती मांग इसे और गंभीर बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही, तो भविष्य में पानी केवल धनवानों के लिए उपलब्ध हो सकता है। पानी का अधिकार, जो कभी मानवता का मूलभूत अधिकार माना जाता था, अब धन और संसाधनों पर निर्भर हो सकता है। कुछ विशेषज्ञ तो यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि पानी की कमी भविष्य में युद्ध का कारण बन सकती है।

आप क्या कर सकते हैं?

AI का उपयोग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें:

  • सवालों को संक्षिप्त रखें: जटिल और लंबे सवालों से बचें, ताकि प्रोसेसिंग और पानी की खपत कम हो।
  • जागरूकता बढ़ाएं: AI की पानी की खपत के बारे में दूसरों को बताएं।
  • कुशल AI टूल्स चुनें: कम संसाधन खपत करने वाले AI टूल्स का उपयोग करें।

AI हमारी जिंदगी को आसान बना रहा है, लेकिन इसके पर्यावरणीय प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पानी जैसे अनमोल संसाधन को बचाने के लिए हमें अभी से सचेत और जिम्मेदार होना होगा।

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