पिछले कुछ वर्षों में भारत के निर्यात क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। एक समय यह सेक्टर भारत के शीर्ष 10 निर्यात आइटम्स में भी शामिल नहीं था, लेकिन वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह भारत की निर्यात बास्केट में शीर्ष पांच में पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष 150 मिलियन से अधिक मोबाइल फोन का निर्माण हो रहा है, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 5.25 लाख करोड़ रुपये है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 38 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 29 बिलियन डॉलर से काफी अधिक है। इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में ही 12.5 बिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो साल के अंत तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना दर्शाता है। यह तेजी भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित कर रही है।
चीन की बेचैनी और हताश कदम
भारत की इस प्रगति से पड़ोसी देश चीन बेचैन हो गया है। खबरों के अनुसार, चीन ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को निशाना बनाने के लिए कई हताश कदम उठाए हैं। सबसे पहले, चीन ने अपने इंजीनियर्स और टेक्नीशियन्स को, जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे थे, वापस बुलाना शुरू कर दिया है। हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 300 से अधिक चीनी इंजीनियर्स को फॉक्सकॉन जैसे iPhone मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स से वापस बुलाया गया है। इसके अलावा, चीन ने भारत को कैपिटल इक्विपमेंट्स और क्रिटिकल मिनरल्स, जैसे रेयर अर्थ मिनरल्स, की आपूर्ति को भी रोकना शुरू कर दिया है। ये कदम भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देखे जा रहे हैं, खासकर तब जब iPhone 17 जैसे हाई-प्रोफाइल प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग भारत में होने वाली है।
भारत की स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन का SOS
भारत की इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA), जो स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रतिनिधित्व करती है, ने सरकार को एक पत्र लिखकर इन समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। पत्र में बताया गया कि चीन अनौपचारिक रूप से व्यापार प्रतिबंध लगा रहा है, जिससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान हो रहा है। ICEA ने चीनी इंजीनियर्स की वापसी और कैपिटल इक्विपमेंट्स की आपूर्ति रोकने जैसे कदमों को भारत के इस उभरते सेक्टर के लिए खतरा बताया।
भारत सरकार और Apple का जवाब
भारत सरकार और Apple ने इस स्थिति पर त्वरित और आश्वस्त करने वाला रुख अपनाया है। सरकार ने कहा कि वह स्थिति पर करीबी नजर रख रही है और इसे नियंत्रित करने के लिए तैयार है। Apple ने स्पष्ट किया कि चीनी इंजीनियर्स की वापसी से भारत में iPhone 17 की मैन्युफैक्चरिंग पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। Apple और उसके पार्टनर फॉक्सकॉन के पास वैकल्पिक योजनाएं हैं। भारत में ताइवान के विशेषज्ञ इंजीनियर्स पहले से ही काम कर रहे हैं, और स्थानीय टैलेंट की उपलब्धता भी इस सेक्टर को मजबूती प्रदान कर रही है। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि Apple और फॉक्सकॉन मिलकर इन चुनौतियों का समाधान कर लेंगे।
भारत की रणनीति और आत्मनिर्भरता की दिशा
भारत ने इस संकट को एक अवसर के रूप में देखा है। सरकार और उद्योग जगत का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए भारत को अपनी सप्लाई चेन को विविधता प्रदान करनी होगी। इसमें क्रिटिकल मिनरल्स और इक्विपमेंट्स की सोर्सिंग को चीन पर निर्भरता कम करके अन्य देशों से करना शामिल है। इसके अलावा, भारत में स्थानीय टैलेंट को प्रशिक्षित करने और स्किल्ड वर्कफोर्स को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत का लक्ष्य है कि वह न केवल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बने, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरे।
Apple की रणनीति और चीन पर निर्भरता कम करने की योजना
Apple ने भी चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। हाल ही में कंपनी ने घोषणा की कि वह 2026 तक iPhone की पूरी असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग को चीन से बाहर ले जाएगी। इसके लिए Apple ने रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति के लिए अमेरिकी कंपनी MP Materials में 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। ये कदम चीन को और अधिक बेचैन कर रहे हैं, क्योंकि भारत तेजी से iPhone मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को एक मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस के रूप में स्थापित कर रहा है। चीन के हताश कदमों के बावजूद, भारत की मजबूत नीतियां, स्थानीय टैलेंट, और वैश्विक कंपनियों जैसे Apple के साथ साझेदारी इस सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। यह भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है।