राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2021 के बीच भारत में 13 लाख से अधिक महिलाएं और लड़कियां लापता दर्ज की गईं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) जैसे संगठनों का दावा है कि इनमें से एक बड़ी संख्या कथित “लव जिहाद” का शिकार हुई है। यह मामला सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है।
I. NCRB के आंकड़े क्या कहते हैं
NCRB की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, 2019-21 के दौरान 13 लाख से अधिक महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं। सबसे अधिक मामले झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से सामने आए। इनमें से कई मामलों में महिलाएं स्वेच्छा से घर छोड़कर गईं, जबकि कुछ को बहला-फुसलाकर या जबरन ले जाया गया।
II. ‘लव जिहाद’ क्या है
“लव जिहाद” एक विवादास्पद शब्द है, जिसका उपयोग उन मामलों के लिए किया जाता है जहां मुस्लिम पुरुषों पर आरोप लगाया जाता है कि वे हिंदू लड़कियों को प्रेम के बहाने फंसाकर धर्मांतरण के लिए मजबूर करते हैं। हाल ही में गौतम बुद्ध नगर में एक मामला सामने आया, जहां एक व्यक्ति ने झूठी पहचान बनाकर हिंदू लड़की से शादी की और बाद में उसे धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला। पुलिस जांच में पता चला कि उसने इसी तरह की कई अन्य शादियां भी की थीं।
III. राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए कठोर कानून बनाए हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रस्तावित किया है कि जबरन धर्मांतरण के मामलों में दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। उत्तर प्रदेश में ऐसे मामलों में 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना का प्रावधान है।
IV. विवाद और आलोचना
मानवाधिकार संगठनों और कुछ समुदायों का मानना है कि “लव जिहाद” शब्द का उपयोग सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए किया जाता है। उनका तर्क है कि अंतरधार्मिक विवाहों को अपराध की श्रेणी में डालने से समाज में तनाव बढ़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक “लव जिहाद” को कानूनी अपराध नहीं माना है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों से इस मुद्दे पर कानून बनाने का आग्रह किया है।
V. क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि धर्मांतरण के मामलों में सबूतों की कमी एक बड़ी चुनौती है। सामाजिक कार्यकर्ता सुझाव देते हैं कि महिलाओं को जागरूक करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजनाएं बनाई जानी चाहिए।
VI. आगे की राह
केंद्र सरकार ने अभी तक “लव जिहाद” पर कोई विशेष कानून नहीं बनाया है, लेकिन राज्य सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर कदम उठाए हैं। NCRB और पुलिस विभाग को लापता महिलाओं के मामलों की त्वरित जांच और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष
13 लाख से अधिक महिलाओं और लड़कियों का लापता होना एक गंभीर सामाजिक समस्या है। चाहे इसके पीछे “लव जिहाद” हो या अन्य कारण, सरकार और समाज को मिलकर इसका समाधान निकालना होगा। कानूनी सुधारों के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
