लखनऊ के कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां शिक्षक के पद पर एक ऐसे उम्मीदवार को नियुक्ति पत्र थमा दिया गया, जिसने साक्षात्कार में हिस्सा ही नहीं लिया था। जब यह बात लोगों के सामने आई तो हंगामा मच गया। आलोचना के बाद संस्थान ने इसे ‘लिपिकीय त्रुटि’ बताकर सफाई दी और जिम्मेदार अधिकारी को हटा दिया।
क्या है पूरा मामला?
कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान, जो लखनऊ के चक गंजरिया में स्थित है, ने हाल ही में शिक्षक के 17 नियमित पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। साक्षात्कार प्रक्रिया के बाद 4 सितंबर को चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। इस सूची में क्रम संख्या 14 पर डॉ. श्वेता अग्रवाल का नाम था, जिन्हें एनेस्थीसिया विभाग में चुना गया दिखाया गया। उनके नाम का नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया गया। लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि डॉ. श्वेता अग्रवाल ने तो साक्षात्कार दिया ही नहीं था!
यह मामला इतना गंभीर था कि बात उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तक पहुंच गई। उन्होंने संस्थान को पत्र भेजकर जवाब मांगा। इसके बाद संस्थान प्रशासन ने सफाई दी कि यह गलती से हुआ। उनका कहना था कि डॉ. श्वेता अग्रवाल का नाम गलती से छप गया, जबकि असल में डॉ. श्वेता चित्रांशी का चयन हुआ था।
तुरंत लिया गया एक्शन
हंगामे के बाद संस्थान ने तेजी से कदम उठाए। डॉ. श्वेता अग्रवाल का नियुक्ति पत्र रद्द करने की घोषणा की गई और डॉ. श्वेता चित्रांशी के लिए नया जॉइनिंग लेटर जारी करने की बात कही गई। इस गड़बड़ी के लिए कार्यकारी कुलसचिव कार्यालय को जिम्मेदार ठहराया गया। नतीजतन, कार्यकारी रजिस्ट्रार डॉ. शरद सिंह को तुरंत हटा दिया गया और उनकी जगह डॉ. आयुष लोहिया को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
संस्थान निदेशक ने क्या कहा?
कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान के निदेशक प्रो. एमएलबी भट्ट ने इस मामले पर खेद जताया। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से यह गलती हो गई। आदेश को संशोधित किया जा रहा है। डॉ. श्वेता अग्रवाल ने साक्षात्कार नहीं दिया था, जबकि डॉ. श्वेता चित्रांशी का चयन हुआ था। कार्यकारी कुलसचिव कार्यालय की लापरवाही की वजह से यह हुआ, जिसके चलते उन्हें तत्काल हटा दिया गया है। संशोधित परिणाम जल्द ही सक्षम स्तर से अनुमोदन के बाद जारी किया जाएगा।”
क्यों है यह मामला अहम?
यह घटना न केवल संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को भी उजागर करती है। ऐसी गलतियां भविष्य में न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाने की मांग उठ रही है।
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