नेपाल में इन दिनों सियासी हलचल तेज है, और इस बीच एक नाम जोर-शोर से सुर्खियों में है—सुशीला कार्की। नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं सुशीला अब अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में केपी शर्मा ओली के विकल्प के तौर पर उभर रही हैं। मजेदार बात यह है कि उनकी नियुक्ति को उसी केपी शर्मा ओली ने समर्थन दिया था, जिन्हें अब हटाया गया है। लेकिन सुशीला की जिंदगी का एक और पहलू है जो सबका ध्यान खींच रहा है—उनके पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी का विवादास्पद अतीत, जिन्होंने 1973 में नेपाल का पहला विमान अपहरण किया था, जिसमें बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री माला सिन्हा भी सवार थीं। आइए जानते हैं सुशीला कार्की की इस रोचक कहानी को।
सुशीला कार्की: भ्रष्टाचार के खिलाफ निडर योद्धा
सुशीला कार्की का जन्म नेपाल के बिराटनगर में हुआ था। उनका परिवार नेपाली कांग्रेस के संस्थापक बीपी कोइराला के करीब था। उनके पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन सुशीला ने कानून का रास्ता चुना। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स किया, जहां उनकी मुलाकात उनके पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुई। बाद में उन्होंने काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की।
सुशीला ने अपने करियर में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और न्यायिक सुधारों के लिए काम किया। उनकी निडरता ने उन्हें नेपाल के इतिहास में एक खास जगह दी। उनके कार्यकाल में दिए गए कुछ फैसले इतने साहसिक थे कि उन्होंने नेपाल की सियासत में हलचल मचा दी।
पति का विवादास्पद अतीत: नेपाल का पहला विमान अपहरण
सुशीला के पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी का नाम नेपाल के इतिहास में एक सनसनीखेज घटना से जुड़ा है। 10 जून 1973 को रॉयल नेपाल एयरलाइंस का एक विमान, जो बिराटनगर से काठमांडू जा रहा था, हाइजैक कर लिया गया। इस विमान में 19 यात्री सवार थे, जिनमें बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री माला सिन्हा भी शामिल थीं। इस अपहरण का मकसद था 30 लाख रुपये की नकदी, जो बिराटनगर के बैंकों से लाई जा रही थी।
इस हाइजैक की योजना नेपाली कांग्रेस के नेता और बाद में प्रधानमंत्री बने गिरिजा प्रसाद कोइराला ने बनाई थी। इसका उद्देश्य राजशाही के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के लिए फंड जुटाना था। दुर्गा प्रसाद सुबेदी, जो उस समय कोइराला के करीबी सहयोगी थे, इस घटना में शामिल थे। हाइजैक किया गया विमान भारत के बिहार के फोर्ब्सगंज में उतारा गया, और लूटी गई राशि को कार से दार्जिलिंग ले जाया गया। बाद में सुबेदी और अन्य अपहरणकर्ताओं को मुंबई में गिरफ्तार किया गया और दो साल तक जेल में रखा गया। 1975 में भारत में आपातकाल के दौरान उन्हें रिहा कर दिया गया।
सुशीला की स्वतंत्र पहचान
अपने पति के इस विवादास्पद अतीत के बावजूद सुशीला कार्की ने अपनी मेहनत और निष्ठा से एक स्वतंत्र और सम्मानित पहचान बनाई। मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल में कई ऐतिहासिक फैसले आए। उन्होंने तत्कालीन सूचना और संचार मंत्री जयप्रकाश गुप्ता को पद पर रहते हुए जेल की सजा सुनाई, जो नेपाल के इतिहास में पहली बार हुआ। इसके अलावा, उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रमुख लोकमान सिंह कार्की को पद से हटाने का आदेश दिया, जिसके बाद उन्हें कनाडा में निर्वासन में जाना पड़ा।
इन फैसलों ने न सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी प्रतिबद्धता दिखाई, बल्कि जनता, खासकर युवाओं, के बीच उनकी लोकप्रियता को भी बढ़ाया। उनकी निडरता ने उन्हें Gen-Z प्रदर्शनकारियों के बीच एक पसंदीदा चेहरा बना दिया, जो भ्रष्टाचार और सत्तावाद के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
चुनौतियों से भरा कार्यकाल
सुशीला का कार्यकाल विवादों से भी घिरा रहा। उनके साहसिक फैसलों ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी। नेपाली संसद ने उनके खिलाफ कार्यकारी हस्तक्षेप का आरोप लगाकर महाभियोग प्रस्ताव पेश किया, जिसके चलते उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने बाद में उन्हें बहाल कर दिया। इस घटना ने नेपाल के संवैधानिक ढांचे में बदलाव लाया, और नए नियम बनाए गए कि महाभियोग प्रस्ताव दाखिल होने मात्र से मुख्य न्यायाधीश को निलंबित नहीं किया जा सकता।
Gen-Z का समर्थन और अंतरिम PM की रेस
नेपाल में इन दिनों Gen-Z के नेतृत्व में भ्रष्टाचार और सत्तावाद के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनकारियों ने सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित किया है। उनकी भ्रष्टाचार विरोधी छवि और निडर फैसले उन्हें इस भूमिका के लिए मजबूत दावेदार बनाते हैं। अगर वह इस जिम्मेदारी को स्वीकार करती हैं, तो उन्हें एक बार फिर अपनी वही निडरता दिखानी होगी, जिसने उन्हें नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में मशहूर किया।
सुशीला कार्की: प्रेरणा और जटिलता का संगम
सुशीला कार्की की जिंदगी प्रेरणादायक और जटिल दोनों है। उनके परिवार का नेपाली कांग्रेस से गहरा नाता रहा, और उनके पति का विमान अपहरण जैसे सनसनीखेज मामले में शामिल होना उनकी कहानी का एक अनोखा हिस्सा है। फिर भी, उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से एक ऐसी पहचान बनाई, जो आज नेपाल के युवाओं के लिए प्रेरणा है।
