केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भारत की टोल प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करने की घोषणा की है। 2025 से देश में पारंपरिक टोल प्लाजा की जगह सैटेलाइट आधारित टोल संग्रह प्रणाली लागू होगी। इस नई व्यवस्था में:
✅ कोई भौतिक टोल बूथ नहीं
✅ दूरी आधारित टोल शुल्क (जितना चलेंगे, उतना भुगतान)
✅ फास्टैग + ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक
✅ 20 किमी तक मुफ्त यात्रा
नई टोल नीति की मुख्य विशेषताएं
1. जीएनएसएस आधारित ट्रैकिंग
- वाहनों में GNSS ऑनबोर्ड यूनिट (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) लगेगा
- सेटेलाइट द्वारा वाहन की वास्तविक यात्रा दूरी मापी जाएगी
- उसी के अनुसार टोल शुल्क काटा जाएगा
2. दूरी आधारित भुगतान
| यात्रा दूरी | टोल शुल्क |
| 0-20 किमी | मुफ्त |
| 20+ किमी | प्रति किमी शुल्क |
उदाहरण: यदि आप 25 किमी यात्रा करते हैं, तो केवल 5 किमी का टोल देना होगा।
3. नए पास विकल्प
- वार्षिक पास: ₹3000 में असीमित यात्रा
- आजीवन पास: ₹15,000 में 15 वर्षों के लिए मुफ्त यात्रा
कैसे काम करेगी यह प्रणाली?
- वाहन में GNSS डिवाइस इंस्टॉल होगा
- हाईवे पर प्रवेश करते ही सैटेलाइट ट्रैकिंग शुरू
- यात्रा समाप्ति पर स्वचालित रूप से शुल्क कटेगा
- ANPR कैमरे वाहन नंबर प्लेट सत्यापित करेंगे
लाभ
✔️ ट्रैफिक जाम में कमी: कोई रुकने की जरूरत नहीं
✔️ ईंधन बचत: लंबी कतारों में इंजन नहीं चलाना पड़ेगा
✔️ पारदर्शिता: सटीक दूरी के हिसाब से भुगतान
✔️ पर्यावरण अनुकूल: वाहनों का कम प्रदूषण
चुनौतियां
⚠️ सभी वाहनों में GNSS डिवाइस लगाना
⚠️ साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएं
⚠️ प्रारंभिक लागत अधिक
⚠️ तकनीकी बुनियादी ढांचे का विकास
पायलट प्रोजेक्ट और समयसीमा
- पहले चरण (मई 2025): बेंगलुरु-मैसूर और पानीपत-हिसार हाईवे पर लागू
- दूसरा चरण (2025 अंत तक): देशभर में विस्तार
किन्हें मिलेगी छूट?
- स्थानीय निवासी (20 किमी दायरे में)
- आपातकालीन वाहन (एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड)
- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के जज
- परमवीर चक्र, अशोक चक्र विजेता
निष्कर्ष
यह नई प्रणाली भारत के टोल संग्रह में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए जन जागरूकता और तकनीकी तैयारी आवश्यक है।