भारतीय सेना की एक टुकड़ी मंगोलिया पहुंच गई है, जहां 14 से 28 जून तक ‘खान क्वेस्ट’ नामक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में 40 भारतीय सैनिक भाग ले रहे हैं, जिनमें कुमाऊं रेजीमेंट के जवान और महिला सैनिक शामिल हैं।

भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास से चीन में बेचैनी
चीन की प्रतिक्रिया
सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास में भारत की भागीदारी से चीन सरकार असहज महसूस कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि मंगोलिया के साथ भारत के बढ़ते रक्षा सहयोग को चीन अपने प्रभाव क्षेत्र में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है।
अभ्यास का उद्देश्य
खान क्वेस्ट अभ्यास की शुरुआत 2003 में अमेरिका और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय प्रशिक्षण के तौर पर हुई थी। इसका प्रमुख लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए सैनिकों को प्रशिक्षित करना और विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना है।
भारत-मंगोलिया संबंध
भारत और मंगोलिया के बीच रक्षा सहयोग नया नहीं है। दोनों देश ‘नोमेडिक एलीफेंट’ नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास भी आयोजित करते हैं। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंगोलिया यात्रा के दौरान 1 अरब डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
मंगोलिया की चुनौतियां
मंगोलिया एक लैंडलॉक्ड देश है, जिसकी 70% आयात-निर्यात गतिविधियां चीन पर निर्भर हैं। 2016 में दलाई लामा की यात्रा के बाद चीन ने मंगोलिया पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ था।
भविष्य की रणनीति
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह पहल एशिया में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को संतुलित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, मंगोलिया को अपनी आर्थिक निर्भरता को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाने की आवश्यकता होगी।
