दिल्ली के लोग अब निजी बिजली कंपनियों (डिस्कॉम) के खिलाफ खुलकर कानूनी जंग लड़ने को तैयार हैं। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने ऐलान किया है कि वे विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर कर डिस्कॉम के दावों की CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) जांच की मांग करेंगे। उनका कहना है कि दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने बिना किसी जांच के डिस्कॉम के दावों को मंजूरी दे दी, जबकि उपभोक्ताओं को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं मिला।
बिजली कंपनियों की नियामक परिसंपत्ति पर सवाल, CAG जांच जरूरी: RWA
नई दिल्ली। दिल्ली में निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को नियामक परिसंपत्ति (रेगुलेटरी एसेट्स) के भुगतान के मामले में उपभोक्ता अब कानूनी रास्ता अपनाने जा रहे हैं। RWA के प्रतिनिधि विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर कर डिस्कॉम के दावों की CAG से जांच कराने की मांग करेंगे। उनका आरोप है कि DERC ने बिना किसी जांच के डिस्कॉम के दावों को स्वीकार कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दिल्ली की तीन निजी बिजली कंपनियों—बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (TPDDL)—को 31,502 करोड़ रुपये की नियामक परिसंपत्ति का भुगतान करना है। अगर ऐसा हुआ तो दिल्ली में बिजली के दाम 70% तक बढ़ सकते हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा।
‘उपभोक्ताओं की बात क्यों नहीं सुनी जा रही’
RWA के प्रतिनिधियों का कहना है कि नियामक परिसंपत्ति का पैसा दिल्ली के उपभोक्ताओं से ही वसूला जाएगा, लेकिन उनकी बात को अनसुना किया गया। शुक्रवार को RWA के सदस्यों ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में अपनी शिकायत दर्ज की। वहां के अधिकारियों ने उन्हें सलाह दी कि वे इस मामले में औपचारिक अपील दायर करें।
यूनाइटेड रेजिडेंट्स ऑफ दिल्ली (URD) के महासचिव सौरभ गांधी ने कहा, “एनडीएमसी इलाके में बिजली आपूर्ति की सुविधा बेहतर है, लेकिन एनडीएमसी ने नियामक परिसंपत्ति का कोई दावा नहीं किया। फिर सिर्फ ये तीन निजी कंपनियां ही इतना बड़ा दावा क्यों कर रही हैं?”
निजी डिस्कॉम के दावों पर उठ रहे सवाल
निजी डिस्कॉम के दावों की सच्चाई पर सवाल उठ रहे हैं। URD के सचिव हेमंत शर्मा ने बताया कि 2021-22 के बाद दिल्ली में बिजली का टैरिफ घोषित ही नहीं हुआ। ऐसे में बिना टैरिफ के DERC ने निजी कंपनियों की नियामक परिसंपत्ति का आंकड़ा कैसे तय कर दिया?
ग्रेटर कैलाश RWA के प्रतिनिधि राजीव काकरिया ने कहा, “उपभोक्ताओं को अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऐसा लग रहा है जैसे उपभोक्ता इन दावों से सहमत हैं, जबकि ऐसा है नहीं।”
मॉडल टाउन रेजिडेंट सोसाइटी के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने जोर देकर कहा कि डिस्कॉम ने 31,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की नियामक परिसंपत्ति कैसे बनाई, इसकी कोई जांच नहीं हुई। उन्होंने कहा, “इसकी CAG जांच बहुत जरूरी है ताकि सच सामने आए।”
