भारतीय वायुसेना के फाइटर स्क्वॉड्रन तेजी से घट रहे हैं, जिससे पाकिस्तान वायुसेना हमारे बराबर पहुँच गई है। अक्टूबर 2025 तक भारत के पास मात्र 29 स्क्वॉड्रन रह जाएँगे, जबकि पाकिस्तान के पास पहले से ही 25 स्क्वॉड्रन हैं। यह अंतर इतना कम है कि यह भारत की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ संभावित युद्ध की स्थिति में लड़ना पड़ सकता है, जहाँ चीन के पास 66 स्क्वॉड्रन हैं।
संख्याओं का गणित
- भारत: 29 स्क्वॉड्रन × 18-20 जेट = 522-580 फाइटर जेट
- पाकिस्तान: 25 स्क्वॉड्रन × 18-20 जेट = 450-500 फाइटर जेट
- चीन: 66 स्क्वॉड्रन × 18-20 जेट = 1,188-1,320 फाइटर जेट
इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाकू विमानों की संख्या अब लगभग बराबर हो चुकी है, जबकि चीन की वायु शक्ति भारत से दोगुने से भी अधिक है।
दोहरी चुनौती का सामना
भारत को एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध की तैयारी करनी पड़ती है:
- पश्चिमी मोर्चा: पाकिस्तान के साथ लगातार तनाव
- पूर्वी मोर्चा: चीन के साथ सीमा विवाद
इस स्थिति में, वायुसेना की कमजोर होती ताकत भारत की रक्षा क्षमता के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।
संकट के मुख्य कारण
- पुराने विमानों की सेवानिवृत्ति: मिग-21 और मिग-27 जैसे पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है।
- नए विमानों की धीमी आपूर्ति: तेजस MK1A और अन्य आधुनिक विमानों का उत्पादन लक्ष्य से पीछे चल रहा है।
- रक्षा खरीद प्रक्रिया में देरी: बहु-भूमिका वाले लड़ाकू विमानों (MRFA) की खरीद अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।
तत्काल आवश्यक कदम
- तेजस MK1A का त्वरित उत्पादन: HAL को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है।
- विदेशी तकनीक साझेदारी: पाँचवीं पीढ़ी के विमानों के लिए वैश्विक निर्माताओं के साथ समझौते।
- AMCA परियोजना को गति: स्वदेशी स्टील्थ फाइटर के विकास को प्राथमिकता देना।
भारतीय वायुसेना की घटती ताकत देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। पाकिस्तान और चीन के साथ बढ़ते सैन्य असंतुलन को दूर करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में भारत की वायु श्रेष्ठता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।