भारत में डीमेट अकाउंट्स की शुरुआत 1997 में हुई थी, लेकिन पिछले 25 सालों में जो तेजी देखी गई, वह कोविड-19 महामारी के बाद आई। मार्च 2020 तक देश में सिर्फ 4.1 करोड़ डीमेट अकाउंट्स थे, जो अब बढ़कर 17.1 करोड़ हो गए हैं। यानी सिर्फ 4 साल 7 महीने में चार गुना वृद्धि हुई। जनवरी 2023 से अब तक इन अकाउंट्स में 54% की उछाल देखी गई। लेकिन 2025 में यह ट्रेंड अचानक पलट गया है।
एक्टिव यूजर्स में भारी गिरावट
Go, Zerodha, Angel One और Upstox जैसे प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स से 2025 की पहली छमाही में ही करीब 11 लाख एक्टिव यूजर्स कम हो गए हैं। सबसे ज्यादा झटका Go को लगा है, जिसने 6 लाख से अधिक एक्टिव इन्वेस्टर्स खो दिए। Zerodha ने लगभग 5,500 यूजर्स गंवाए हैं, जबकि Angel One और Upstox ने क्रमशः 4,500 और 3 लाख यूजर्स की कमी दर्ज की है।
सबसे बड़ा सवाल: मार्केट रिकॉर्ड बना रहा है, फिर लोग क्यों भाग रहे हैं?
यह स्थिति तब और भी चौंकाने वाली लगती है जब हम देखते हैं कि शेयर बाजार लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर यूजर्स का बाजार से पलायन क्यों हो रहा है? इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
- सेबी के नए सख्त नियम: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शन (F&O) ट्रेडिंग पर नए नियम लागू किए हैं, जिसमें मार्जिन आवश्यकताएं बढ़ाई गई हैं और टैक्स कॉम्प्लायंस को सख्त बनाया गया है। इससे छोटे रिटेल इन्वेस्टर्स, जो हाई लिवरेज पर ट्रेड करते थे, अब बाजार से दूर हो रहे हैं।
- नए अकाउंट्स की कमी: FY2026 के पहले क्वार्टर में सिर्फ 69.1 लाख नए डीमेट अकाउंट्स खुले, जो पिछले 8 क्वार्टर्स में सबसे कम है। इसका मतलब है कि नए निवेशकों का रुझान भी कम हो रहा है।
- शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स का बाहर निकलना: Go और Angel One जैसे प्लेटफॉर्म्स ने युवा और नए इन्वेस्टर्स को आकर्षित किया था, जो ज्यादातर शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में रुचि रखते थे। सेबी के नए नियमों के बाद यह समूह अब बाजार से दूर हो रहा है।
क्या यह गिरावट स्थायी है या अस्थायी?
अभी यह कहना मुश्किल है कि यह ट्रेंड लंबे समय तक जारी रहेगा या नहीं। Go जैसे प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ आने वाला है, जिससे फिर से नए यूजर्स आकर्षित हो सकते हैं। हालांकि, अगर सेबी के नियम ऐसे ही सख्त बने रहते हैं, तो हो सकता है कि केवल लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स ही बाजार में टिक पाएं और शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स की संख्या घटती रहे।
भारत में डीमेट अकाउंट्स की संख्या में आई गिरावट एक बड़े बदलाव का संकेत देती है। अब शेयर बाजार में सिर्फ गंभीर निवेशक ही बचेंगे या फिर नए नियमों के बाद भी रिटेल इन्वेस्टर्स की वापसी होगी, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।