चीन के प्रतिष्ठित अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अंतरिक्ष से मिसाइल दागने की तकनीक विकसित कर ली है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने एक हाइपरसोनिक मिसाइल बनाई है, जो 20 मैक (ध्वनि की गति से 20 गुना तेज) की रफ्तार से उड़ान भर सकती है। यह तकनीक चीन को अंतरिक्ष में स्थित उपग्रहों या छोटे स्पेस स्टेशनों से मिसाइल दागने में सक्षम बना सकती है।
अंतरिक्ष से मिसाइल कैसे दागी जा सकती है?
चीन की यह मिसाइल तकनीक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) पर आधारित है, जो दो चरणों में काम करती है। पहले चरण में, अंतरिक्ष में स्थित स्पेस स्टेशन या उपग्रह से मिसाइल को धरती पर निर्धारित लक्ष्य की लोकेशन दी जाती है। दूसरे चरण में, हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल को अंतरिक्ष से छोड़ा जाता है, जो अत्यधिक गति से पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करता है। वातावरण में आने के बाद मिसाइल व्हीकल से अलग होकर अपने लक्ष्य पर हमला करती है।
चीन की यह तकनीक क्यों है खतरनाक?
चीन की इस तकनीक को उसके विरोधियों के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। दरअसल, पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम मिसाइल के उड़ान पथ का पता लगाकर उसे रोकते हैं, लेकिन अंतरिक्ष से आने वाली मिसाइल का मार्ग पहले से ज्ञात नहीं होता। इस वजह से जब तक डिफेंस सिस्टम मिसाइल की दिशा का पता लगा पाते हैं, तब तक वह अपने लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी होती है। इस तरह, चीन की इस मिसाइल को रोकना पारंपरिक तरीकों से लगभग असंभव है।
क्या इस मिसाइल को रोका जा सकता है?
हालांकि, कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे अंतरिक्ष से आने वाली मिसाइल को भी रोका जा सकता है:
- घर्षण का पता लगाकर: जब मिसाइल पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करती है, तो उसके घर्षण से उत्पन्न गर्मी और रेडिएशन का पता लगाकर उसकी लोकेशन ट्रैक की जा सकती है।
- एंटी-सैटेलाइट हथियारों का उपयोग: यदि युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तो अंतरिक्ष में स्थित चीन के उपग्रहों या स्पेस स्टेशनों को ही नष्ट कर दिया जाए।
भारत के पास भी है एंटी-सैटेलाइट तकनीक
भारत ने मार्च 2019 में मिशन शक्ति के तहत एक लो-ऑर्बिट सैटेलाइट को सफलतापूर्वक नष्ट करके अपनी एंटी-सैटेलाइट (ASAT) क्षमता का प्रदर्शन किया था। भारत की पृथ्वी मिसाइल को इसी उद्देश्य से विकसित किया गया है, जिसमें दो रॉकेट बूस्टर लगे हैं। पहला बूस्टर मिसाइल को वायुमंडल में ले जाता है, जबकि दूसरा इसे अंतरिक्ष तक पहुंचाता है, जहां यह दुश्मन के उपग्रहों को निशाना बना सकता है।
चीन ने सिर्फ 15 वर्षों में हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में अभूतपूर्व प्रगति की है, जो उसकी सैन्य महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। हालांकि, भारत और अन्य देशों के पास भी ऐसी तकनीकें हैं जो अंतरिक्ष से होने वाले हमलों को रोक सकती हैं। यह तकनीकी होड़ वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही है, लेकिन साथ ही यह दिखाती है कि भविष्य के युद्धों में अंतरिक्ष एक महत्वपूर्ण मोर्चा बन सकता है।