महासागर भारत के लिए केवल जल निकाय नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। 7,516 किमी लंबी तटरेखा और 2.4 मिलियन वर्ग किमी विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के साथ, भारत के लिए महासागरों का महत्व तीन प्रमुख आयामों में देखा जा सकता है:
1. आर्थिक महत्व
- व्यापार का मुख्य मार्ग: भारत का 80% अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और 90% ऊर्जा आयात समुद्री मार्गों से होता है
- रोजगार सृजन: 4 मिलियन से अधिक मछुआरे सीधे समुद्री संसाधनों पर निर्भर
- ब्लू इकॉनॉमी: 2025 तक 80 अरब डॉलर के ब्लू इकॉनॉमी लक्ष्य के साथ समुद्री अर्थव्यवस्था का विस्तार
2. पर्यावरणीय महत्व
- जलवायु नियंत्रक: महासागर वैश्विक कार्बन का 30% अवशोषित करते हैं
- जैव विविधता: भारत के तटीय क्षेत्रों में 7,500 किमी² मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियाँ
- ऑक्सीजन उत्पादन: समुद्री फाइटोप्लांकटन पृथ्वी की 50-80% ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं
3. सामरिक महत्व
- SAGAR पहल: ‘Security and Growth for All in Region’ के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग
- IFC-IOR: हिंद महासागर क्षेत्र के लिए सूचना संलयन केंद्र
- NMDA ग्रिड: राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता प्रणाली
नीस महासागर सम्मेलन 2025: भारत की प्रमुख प्रतिबद्धताएँ
9-10 जून 2025 को फ्रांस के नीस में आयोजित तीसरे संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन में भारत ने कई महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा की:
1. हाई सीज संधि पर प्रगति
- उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय जल में जैव विविधता संरक्षण
- वर्तमान स्थिति: 49 देशों द्वारा अनुमोदित (60 अनुमोदनों पर लागू होगी)
- भारत की भूमिका: संधि के कार्यान्वयन में तकनीकी सहयोग की पेशकश
2. प्लास्टिक प्रदूषण नियंत्रण
- स्वच्छ सागर अभियान: 1,000+ किमी तटीय सफाई
- कचरा प्रबंधन: 500+ टन प्लास्टिक कचरे का निस्तारण
- भविष्य की योजना: 2025 तक 75 समुद्र तटों को ‘ब्लू फ्लैग’ प्रमाणन
3. समुद्रयान मिशन
- लक्ष्य: 6,000 मीटर गहराई तक मानवयुक्त अन्वेषण
- समयसीमा: 2026 तक प्रक्षेपण
- अनुसंधान क्षेत्र: गहरे समुद्र के खनिज संसाधन और जैव विविधता
4. नीस कार्य योजना
- मुख्य बिंदु:
- समुद्री अनुसंधान में वैश्विक सहयोग
- SDG-14 (जल के नीचे जीवन) लक्ष्यों की प्राप्ति
- समुद्री नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा
5. ब्लू इकॉनॉमी पहल
- निवेश: 80 अरब डॉलर की परियोजनाएँ
- मत्स्य पालन: 2.5 अरब डॉलर की योजनाएँ
- सतत विकास: समुद्री संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार
यूपीएससी परिप्रेक्ष्य: महत्वपूर्ण तथ्य
- अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ:
- यूएनसीएलओएस (UNCLOS)
- हाई सीज संधि
- केमिकल्स एंड वेस्ट्स पर बेसल कन्वेंशन
- भारतीय पहलें:
- डीप ओशन मिशन
- ओ-स्मार्ट योजना
- इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA)
- पर्यावरणीय चुनौतियाँ:
- समुद्री अम्लीकरण
- प्रवाल भित्तियों का विरंजन
- समुद्र स्तर वृद्धि
- सामरिक पहल:
- इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव
- कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव
“समुद्र हमारी सभ्यता का पालना है, और इसका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी।”
- डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री