भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत 20 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पूरी कर धरती पर लौटने के बाद अपने अनुभव साझा किए। एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष के शून्य गुरुत्वाकर्षण (ज़ीरो ग्रैविटी) के माहौल से लौटने के बाद धरती पर आम चीजें भी भारी लगने लगीं। आइए, जानते हैं उनकी इस रोमांचक यात्रा और धरती पर लौटने की मजेदार कहानी!
फोन और लैपटॉप ने दी हैरानी
शुभांशु ने हंसते हुए बताया, “अंतरिक्ष में जब गुरुत्वाकर्षण खत्म हो जाता है, तो शरीर को उस माहौल में ढलने में वक्त लगता है। लेकिन धरती पर लौटने के बाद उल्टा हुआ। जब मैंने लैंडिंग के बाद अपना फोन मांगा, तो उसे पकड़ते ही चौंक गया। रोज़ाना इस्तेमाल होने वाला फोन मुझे इतना भारी लगा कि मैं हैरान रह गया!”
उन्होंने एक और मजेदार किस्सा सुनाया, “मैं बिस्तर पर बैठकर लैपटॉप पर काम कर रहा था। काम खत्म होने के बाद मैंने लैपटॉप बंद किया और उसे बगल में छोड़ दिया, यह सोचकर कि अंतरिक्ष की तरह वो हवा में तैरने लगेगा। लेकिन वो तो धड़ाम से नीचे गिर गया! शुक्र है, फर्श पर कारपेट था, वरना नुकसान हो जाता।”
एक्सिओम-4 मिशन का रोमांच
शुभांशु ने एक्सिओम-4 मिशन को अपनी उम्मीदों से कहीं बेहतर बताया। यह मिशन 25 जून 2025 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से शुरू हुआ और 15 जुलाई 2025 को पूरा हुआ। इस दौरान उन्होंने 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताए।
उन्होंने कहा, “41 साल बाद एक भारतीय अंतरिक्ष में गया। लेकिन ये सिर्फ एक कदम नहीं था, बल्कि भारत की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत थी। इस बार हम सिर्फ उड़ान नहीं भर रहे, बल्कि नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।”
तिरंगे के साथ PM से बात
शुभांशु ने मिशन का सबसे यादगार पल बताया, जब 28 जून 2025 को उन्होंने ISS से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की, पीछे तिरंगा लहराते हुए। “वो पल भारत के अंतरिक्ष में दोबारा दस्तक देने का प्रतीक था, न कि सिर्फ एक दर्शक के तौर पर, बल्कि एक बराबर के साझेदार के रूप में।”
युवाओं के लिए प्रेरणा
शुभांशु ने बताया कि इस मिशन का सबसे बड़ा असर ये है कि अब भारत के बच्चे अंतरिक्ष यात्री बनने के सपने देख रहे हैं। “हमारा मकसद था कि युवा पीढ़ी को प्रेरित करें, उन्हें यकीन दिलाएं कि वो भी खोजकर्ता बन सकते हैं। मुझे लगता है, हमारा ये लक्ष्य काफी हद तक पूरा हो चुका है।”
भारत में होगी वापसी
शुभांशु अगस्त 2025 के मध्य में भारत लौटेंगे, जहां वो ISRO के अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। साथ ही, वो गगनयान मिशन (2027 में प्रस्तावित भारत की पहली मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान) के लिए भी योगदान देंगे।
शुभांशु की ये कहानी न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि भारत के अंतरिक्ष सपनों को नई उड़ान दे रही है। क्या आप भी अंतरिक्ष यात्रा का सपना देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं!
