प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिजी को जलवायु परिवर्तन के गंभीर खतरों से निपटने में भारत के पूर्ण समर्थन का वादा किया है। फिजी के प्रधानमंत्री सितिवेनी रबुका के साथ व्यापक वार्ता के बाद दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहित सात महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जो क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
वार्ता के उपरांत प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत, फिजी को आपदा प्रबंधन में हर संभव सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा, “भले ही भारत और फिजी महासागरों से अलग हैं, लेकिन हमारी आकांक्षाएं एक ही नाव पर सवार हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि दोनों राष्ट्र एक स्वतंत्र, समावेशी, सुरक्षित और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
समुद्री सुरक्षा में सहयोग को मिली नई धारा
प्रधानमंत्री मोदी ने फिजी के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए घोषणा की कि भारत फिजी की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरणों की सहायता देगा। इसके लिए एक विस्तृत कार्ययोजना भी तैयार की गई है। यह कदम तब उठाया गया है जब चीन प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रहा है।
‘ग्लोबल साउथ’ की एकजुटता पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक दक्षिण (Global South) के हितों की पैरवी करते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र के विकास में एक विश्वसनीय साझेदार है। उन्होंने कहा, “हम एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के लिए साथ काम कर रहे हैं जहाँ ग्लोबल साउथ की स्वतंत्रता, विचारों और पहचान का पूरा सम्मान हो।”
रबुका की ऐतिहासिक यात्रा
फिजी के प्रधानमंत्री सितिवेनी रबुका 24 अगस्त को तीन दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। यह फिजी के प्रधानमंत्री के रूप में उनकी पहली भारत यात्रा है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध 1879 से हैं, जब भारतीय मजदूरों को फिजी लाया गया था। यह यात्रा पिछले वर्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिजी यात्रा की परछाई में हुई है, जो द्विपक्षीय संबंधों में नई गति का संकेत देती है।
रबुका 26 अगस्त को सप्रू हाउस में एक कार्यक्रम में व्याख्यान देंगे और 27 अगस्त को दिल्ली से रवाना होंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को और गहरा करेगा।