उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के दादरी गांव में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक मुस्लिम युवक, मोहम्मद कासिम, पिछले एक साल से शिव मंदिर में पुजारी बनकर रह रहा था। उसने अपना नाम कृष्ण कुमार बताया और भगवा वस्त्र धारण कर मंदिर में पूजा-पाठ करने के साथ-साथ लोगों को भविष्य भी बताता था। यह मंदिर कावड़ मार्ग पर स्थित है, जहां हर साल हजारों कावड़िए आते हैं। कासिम की गतिविधियों पर शक होने के बाद ग्रामीणों ने उसकी असल पहचान उजागर की और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। इस घटना ने स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में गुस्सा पैदा किया, जिसके बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया गया।
कासिम की असलियत कैसे उजागर हुई
कासिम, जो बिहार के सीतामढ़ी का रहने वाला है, ने फर्जी आधार कार्ड बनवाकर अपनी पहचान कृष्ण कुमार के रूप में छिपाई थी। वह मंदिर में सेवा के नाम पर रह रहा था और पूजा-पाठ के साथ दान-पात्र से चढ़ावा भी लेता था। ग्रामीणों को उस पर तब शक हुआ जब उन्होंने देखा कि वह मंदिर के बाहर लगे दान-पात्र को तोड़ रहा था। कमेटी के सदस्यों ने पुलिस को सूचित किया, और जांच में पता चला कि कासिम मुस्लिम समुदाय से है और उसका पिता एक मौलाना है। पूछताछ में कासिम ने दावा किया कि उसे इस्लाम पसंद नहीं था, इसलिए उसने हिंदू धर्म अपनाकर पुजारी बनने का फैसला किया। हालांकि, स्थानीय लोग और हिंदू संगठन इसे सुनियोजित साजिश मान रहे हैं।
मंदिर में क्या थी कासिम की गतिविधियां
कासिम ने मंदिर में पुजारी के रूप में पूरी तरह ढलने की कोशिश की थी। उसने भगवा वस्त्र पहने, गले में रुद्राक्ष की माला डाली, और गायत्री मंत्र व हनुमान चालीसा पढ़ने जैसी गतिविधियां कीं। वह कावड़ियों को भोजन परोसता था और उनके साथ पूजा-पाठ में शामिल होता था। उसकी ये हरकतें इतनी विश्वसनीय थीं कि एक साल तक किसी को उस पर शक नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि वह संदिग्ध लोगों से भी मिलता था, जिससे यह आशंका बढ़ी कि वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता था।
शुद्धिकरण और स्थानीय लोगों की नाराजगी
कासिम की असलियत सामने आने के बाद ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने मंदिर को अशुद्ध मानकर शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान पुजारी और ग्रामीणों ने जल लेकर मंदिर की परिक्रमा की और धार्मिक अनुष्ठान किए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना उनकी धार्मिक आस्था पर चोट है। उनका मानना है कि कासिम ने जानबूझकर उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। कुछ लोगों ने आशंका जताई कि कावड़ यात्रा के दौरान कोई बड़ी घटना हो सकती थी, जैसे भोजन या पानी में जहर मिलाने की साजिश। इस वजह से हिंदू संगठनों ने मांग की है कि इस मामले की गहन जांच एटीएस (आतंकवाद निरोधी दस्ता) से कराई जाए।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
मेरठ के एसएसपी विपिन ताड़ा ने बताया कि थाना दौराला में ग्रामीणों की शिकायत पर कासिम को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उसकी फर्जी आधार कार्ड बरामद की और उसकी गतिविधियों की जांच शुरू की। कासिम ने पुलिस को बताया कि वह पिछले 14-15 सालों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में रह चुका है। यह खुलासा और भी चौंकाने वाला है, क्योंकि इससे संदेह बढ़ता है कि वह लंबे समय से अपनी पहचान छिपाकर ऐसी गतिविधियां कर रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कासिम किसी संगठित गिरोह का हिस्सा था या उसकी मंशा केवल चढ़ावे की चोरी तक सीमित थी।
धार्मिक आस्था पर सवाल
इस घटना ने मेरठ के स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में गहरी नाराजगी पैदा की है। उनका कहना है कि साधु के भेष में कासिम ने हिंदू धर्म की आस्था का मजाक बनाया। मंदिर में उसकी मौजूदगी और पूजा-पाठ की गतिविधियों ने लोगों को यह विश्वास दिलाया था कि वह एक सच्चा पुजारी है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि अगर वह आधार कार्ड दिखाने से बार-बार बचता था, तो पहले उसकी पृष्ठभूमि की जांच क्यों नहीं की गई। इस घटना ने मंदिरों में प्रवेश और सेवा की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। कुछ संगठनों ने मांग की है कि मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाए।
कावड़ मार्ग पर मंदिर का महत्व
यह शिव मंदिर मेरठ के कावड़ मार्ग पर स्थित है, जो हर साल सावन के महीने में कावड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। मंदिर में रुकने वाले कावड़िए यहां पूजा-पाठ करते हैं और भोजन ग्रहण करते हैं। कासिम की मौजूदगी ने इस पवित्र स्थल की गरिमा पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर की 150 साल पुरानी परंपरा और शिवलिंग की पवित्रता को ठेस पहुंची है। इस घटना के बाद मंदिर में शुद्धिकरण के साथ-साथ सुरक्षा और सत्यापन की प्रक्रिया को और सख्त करने की मांग उठ रही है।
भविष्य में क्या कदम उठाए जाएंगे
इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर सत्यापन और सुरक्षा की जरूरत को उजागर किया है। हिंदू संगठनों ने मांग की है कि मंदिरों में सेवा करने वालों की पृष्ठभूमि की गहन जांच की जाए। साथ ही, इस मामले की जांच को गंभीरता से लेते हुए यह पता लगाया जाए कि कासिम की मंशा क्या थी और क्या वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था। पुलिस ने इस दिशा में जांच शुरू कर दी है, और स्थानीय प्रशासन मंदिर की सुरक्षा बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
मेरठ के इस शिव मंदिर में कासिम की घटना ने न केवल स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। यह मामला धार्मिक आस्था, विश्वास, और सामाजिक एकता के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करता है। इस घटना ने समाज में एक नई बहस छेड़ दी है कि मंदिरों में सेवा करने वालों की पहचान और मंशा की जांच कैसे सुनिश्चित की जाए। यह मामला न केवल मेरठ, बल्कि पूरे देश में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।