महिंद्रा ने हाल ही में अपनी दो नई इलेक्ट्रिक SUVs, BE 6e और XEV 9e, लॉन्च करके भारतीय बाजार में तहलका मचा दिया है। इन गाड़ियों को कुछ लोग “देसी साइबरट्रक” कहकर टेस्ला साइबरट्रक से तुलना कर रहे हैं। इनके डिज़ाइन, मजबूती और भारतीय सड़कों के लिए अनुकूलता ने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी लोगों का ध्यान खींचा है। क्या ये गाड़ियाँ वाकई टेस्ला को चुनौती दे सकती हैं? आइए, इनके फीचर्स, टेस्टिंग और बाजार की संभावनाओं का विश्लेषण करें।
महिंद्रा BE 6e और XEV 9e: एक नजर में
महिंद्रा ने 26 नवंबर 2024 को अपनी नई इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ BE 6e और XEV 9e लॉन्च कीं, जिनकी कीमत 18.9 लाख रुपये से शुरू होकर 27.65 लाख रुपये तक है। ये गाड़ियाँ INGLO प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं और आधुनिक तकनीकों जैसे Level 2 ADAS, 578-682 किमी की रेंज, और 20 मिनट में 20-80% DC फास्ट चार्जिंग से लैस हैं। इनका एंगुलर डिज़ाइन और मजबूत बिल्ड क्वालिटी टेस्ला साइबरट्रक से तुलना का कारण बनी है। हालांकि, ये SUVs हैं, न कि पिकअप ट्रक, जिससे इनका उपयोग और लक्ष्य अलग है।
भारत और विदेशों में मांग
महिंद्रा की इन गाड़ियों की भारत में जबरदस्त मांग है, जहाँ 6 महीने की वेटिंग पीरियड और डीलरशिप पर बढ़ती बुकिंग इसकी लोकप्रियता दर्शाती है। कंपनी ने EV सेगमेंट में 12,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है, और CEO राजेश जेजुरिकर का दावा है कि ये गाड़ियाँ वैश्विक ब्रांड्स जैसे टेस्ला और BYD से मुकाबला कर सकती हैं। विदेशी बाजारों, खासकर अमेरिका और यूरोप में, अभी इनका आधिकारिक लॉन्च नहीं हुआ है, लेकिन महिंद्रा Roxor की अमेरिका में सफलता और सोशल मीडिया पर BE 6e के डिज़ाइन की तारीफ से संकेत मिलता है कि ये वहाँ भी लोकप्रिय हो सकती हैं। फिर भी, यह कहना कि विदेशों में भारत से ज्यादा मांग है, अभी अतिशयोक्ति हो सकता है।
एक्सट्रीम टेस्टिंग: मजबूती का प्रमाण
महिंद्रा की गाड़ियों की मजबूती को लेकर कुछ दावे वायरल हुए हैं, जैसे 50 टन ट्रक टेस्ट और बंपर टेस्ट, जिसमें गाड़ी के ऊपर शीशे के गिलास में पानी रखकर सस्पेंशन की स्थिरता जाँची गई। इन टेस्ट्स का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं मिला, लेकिन महिंद्रा की BE 6e में अडैप्टिव सस्पेंशन और ऑफ-रोड क्षमता इसे भारतीय सड़कों के लिए उपयुक्त बनाती है। कुछ लोग दावा करते हैं कि 2 करोड़ की मर्सिडीज़ गाड़ियाँ इस टेस्ट में फेल हो जाती हैं, जबकि महिंद्रा की 20 लाख की गाड़ी पास हो जाती है। यह दावा अतिशयोक्तिपूर्ण लगता है, लेकिन महिंद्रा की बिल्ड क्वालिटी की प्रशंसा सोशल मीडिया पर हो रही है।
टेस्ला साइबरट्रक से तुलना
टेस्ला साइबरट्रक और महिंद्रा की EVs की तुलना कुछ प्रमुख बिंदुओं पर करें:
- कीमत: साइबरट्रक की अनुमानित कीमत भारत में 50-83 लाख रुपये है, जबकि महिंद्रा की गाड़ियाँ 18.9-27.65 लाख रुपये में उपलब्ध हैं, जो भारतीय ग्राहकों के लिए किफायती हैं।
- प्रकार: साइबरट्रक एक पिकअप ट्रक है, जो औद्योगिक और ऑफ-रोड उपयोग के लिए है, जबकि BE 6e और XEV 9e लाइफस्टाइल SUVs हैं।
- पावर और रेंज: साइबरट्रक का 900 HP और 14,000 Nm टॉर्क महिंद्रा की ~280 PS पावर से कहीं अधिक है, लेकिन महिंद्रा की 578-682 किमी रेंज साइबरट्रक की 500+ किमी रेंज से प्रतिस्पर्धी है।
- भारत में उपयुक्तता: साइबरट्रक का बड़ा आकार भारतीय सड़कों और पार्किंग के लिए कम व्यावहारिक है, जबकि महिंद्रा की गाड़ियाँ भारतीय परिस्थितियों के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
क्या एलन मस्क चिंतित हैं?
ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि टेस्ला के CEO एलन मस्क महिंद्रा की गाड़ियों से चिंतित हैं। टेस्ला ने हाल ही में मुंबई में अपना पहला एक्सपीरियंस सेंटर खोला और मॉडल Y को लॉन्च किया, लेकिन भारत में 70-100% आयात शुल्क के कारण इसकी कीमतें अधिक हैं। दूसरी ओर, आनंद महिंद्रा और CEO राजेश जेजुरिकर ने टेस्ला को खुली चुनौती दी है। JSW ग्रुप के सज्जन जिंदल और पूर्व नीति आयोग CEO अमिताभ कांत ने भी कहा है कि टाटा और महिंद्रा जैसे स्थानीय ब्रांड्स टेस्ला को भारत में आसानी से सफल नहीं होने देंगे।
क्या महिंद्रा साइबरट्रक को पछाड़ सकती है?
महिंद्रा की BE 6e और XEV 9e भारतीय बाजार में अपनी किफायती कीमत, मजबूत बिल्ड क्वालिटी और भारतीय सड़कों के लिए अनुकूलता के कारण टेस्ला साइबरट्रक से बेहतर विकल्प हैं। हालांकि, साइबरट्रक की वैश्विक ब्रांड वैल्यू, उन्नत तकनीक (जैसे ऑटोपायलट), और हाई परफॉर्मेंस इसे एक अलग श्रेणी में रखती है। महिंद्रा की गाड़ियाँ साइबरट्रक को “पछाड़ने” की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन भारत में ये अधिक व्यावहारिक और लोकप्रिय हैं। अगर महिंद्रा अपनी EVs को विकसित देशों में लॉन्च करती है और वहाँ की कठिन टेस्टिंग में सफल होती है, तो यह टेस्ला के लिए भविष्य में एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
महिंद्रा की BE 6e और XEV 9e भारतीय EV बाजार में एक नया मानक स्थापित कर रही हैं। इनकी तुलना टेस्ला साइबरट्रक से डिज़ाइन और मजबूती के आधार पर हो रही है, लेकिन दोनों का लक्ष्य और बाजार अलग है। कथित 50 टन ट्रक टेस्ट और बंपर टेस्ट जैसे दावे अतिशयोक्तिपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन महिंद्रा की गाड़ियों की मजबूती और किफायती कीमत उन्हें भारतीय ग्राहकों के लिए आकर्षक बनाती हैं। टेस्ला को भारत में आयात शुल्क और स्थानीय ब्रांड्स की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन यह कहना कि महिंद्रा साइबरट्रक को पूरी तरह पछाड़ देगी, अभी जल्दबाजी होगी।
