भारत का कर्ज: जीडीपी का 82% कर्ज कितना चिंताजनक है? वैश्विक तुलना
भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, लेकिन हाल ही में यह चर्चा हो रही है कि भारत की जीडीपी का 82% कर्ज हो गया है। क्या यह आँकड़ा चिंताजनक है? अन्य देशों की स्थिति क्या है? आइए, विस्तार से समझते हैं।
जीडीपी के अनुपात में कर्ज: क्या मायने रखता है?
किसी भी देश का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) यह दर्शाता है कि उसकी अर्थव्यवस्था पर कितना बोझ है। अगर यह अनुपात बहुत अधिक हो, तो देश को ऋण चुकाने में दिक्कत हो सकती है। विश्व बैंक के अनुसार, 60% से कम अनुपात सुरक्षित माना जाता है, जबकि 90% से अधिक होने पर आर्थिक संकट का खतरा बढ़ जाता है।
भारत की स्थिति: 82% कर्ज-से-जीडीपी अनुपात
भारत का कुल सार्वजनिक कर्ज (Central + State Govt Debt) जीडीपी के 82% के आसपास है। यह आँकड़ा पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है, मुख्यतः COVID-19 महामारी और आर्थिक मंदी के कारण।
2020 में: ~75%
2024 में: ~82%
क्या यह चिंताजनक है?
वैश्विक मानकों के हिसाब से 82% अधिक है, लेकिन यह जापान (248%) या अमेरिका (120%) जितना खतरनाक नहीं है।
भारत की विकास दर (7%+) और कर संग्रहण क्षमता इसे संतुलित करती है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि अगर यह अनुपात 90% से ऊपर चला जाता है, तो समस्या गंभीर हो सकती है।
वैश्विक तुलना: कौन-से देश सबसे ज्यादा कर्ज में हैं?
| देश | कर्ज (जीडीपी का %) | वैश्विक रैंकिंग |
| जापान | 248% | #1 (सबसे ज्यादा) |
| सिंगापुर | 175% | #2 |
| यूनाइटेड स्टेट्स | 120% | #3 |
| चीन | 93% | #4 |
| भारत | 82% | #5 |
| पाकिस्तान | 71% | #6 |
1. जापान (248%)
दुनिया का सबसे ज्यादा कर्जदार देश।
लगातार जनसंख्या घटने और आर्थिक सुस्ती के कारण संकट।
अब टूरिज्म (विशेषकर वयस्क मनोरंजन उद्योग) पर निर्भर हो रहा है।
2. अमेरिका (120%)
$34 ट्रिलियन का कर्ज (दुनिया का सबसे बड़ा)।
लेकिन डॉलर की वैश्विक मांग के कारण संकट कम।
3. चीन (93%)
रियल एस्टेट संकट (एवरग्रांड जैसी कंपनियों के डिफॉल्ट) से दबाव।
सरकारी खर्चे और बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट्स के कारण कर्ज बढ़ा।
4. पाकिस्तान (71%)
आईएमफ से बार-बार कर्ज लेने को मजबूर।
मुद्रास्फीति (40%+) और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहा।
भारत के लिए क्या चुनौतियाँ हैं?
- राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) – सरकार को कर्ज बढ़ाने के बजाय टैक्स रेवेन्यू बढ़ाना होगा।
- रोजगार सृजन – युवाओं को रोजगार देकर जीडीपी ग्रोथ बनाए रखनी होगी।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश – स्मार्ट सिटीज, मेक इन इंडिया जैसे प्रोजेक्ट्स से निजी निवेश आकर्षित करना जरूरी।
निष्कर्ष: क्या भारत को चिंता करनी चाहिए?
82% कर्ज-से-जीडीपी अनुपात चिंताजनक है, लेकिन अभी संकट नहीं।
जापान, अमेरिका और चीन जैसे देशों से तुलना में भारत की स्थिति बेहतर है।
अगले 5 साल महत्वपूर्ण – अगर कर्ज 90% से ऊपर पहुँचता है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
