देश में सड़क हादसों पर केंद्र सरकार की 2023 की ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल की तुलना में हादसों में 4.2% की बढ़ोतरी हुई है, और इनमें जान गंवाने वालों की संख्या भी बढ़ी है। रिपोर्ट में 68.4% हादसों का जिम्मेदार वाहनों की तेज गति (ओवरस्पीडिंग) को बताया गया है। लेकिन विशेषज्ञ इस रिपोर्ट पर सवाल उठा रहे हैं, उनका कहना है कि सारी गलती ड्राइवरों पर डालकर असल समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सीधी सड़कों पर ज्यादा हादसे, मौसम भी जिम्मेदार
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में 68.4% सड़क हादसे तेज गति के कारण हुए। इसके अलावा, सड़क का वातावरण और वाहनों की खराब स्थिति 22.5% हादसों के लिए जिम्मेदार रही, जबकि गलत दिशा में गाड़ी चलाने से 5.3% दुर्घटनाएं हुईं। नशे में ड्राइविंग, सिग्नल तोड़ने और गाड़ी चलाते वक्त फोन इस्तेमाल करने जैसे कारणों से सिर्फ 3.9% हादसे हुए।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 67% हादसे सीधी सड़कों पर हुए, जबकि घुमावदार सड़कों पर केवल 12.2% दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। हैरानी की बात यह है कि सीधी सड़कों पर होने वाले हादसों में 76.1% मामले साफ मौसम में हुए। बारिश में 7.8% और कोहरे में 7.1% हादसे हुए।
ओवरस्पीडिंग पर ठीकरा, लेकिन सच क्या
रिपोर्ट में ज्यादातर हादसों का कारण ओवरस्पीडिंग बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे पूरी तरह सच नहीं मानते। इंटरनेशनल रोड कांग्रेस इंडिया चैप्टर के सलाहकार प्रो. पीके सिकदर का कहना है कि हर बार ओवरस्पीडिंग को दोष देकर असल खामियों को छिपाया जाता है। उनका सवाल है कि जब हादसे की जांच दो-तीन दिन बाद होती है, तो पुलिस कैसे दावा कर सकती है कि तेज गति ही कारण थी?
प्रो. सिकदर ने यह भी बताया कि देश के ज्यादातर हाईवे पर सीसीटीवी कैमरे तक नहीं हैं। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 3.25 लाख किलोमीटर के हाईवे नेटवर्क में से सिर्फ 20 हजार किलोमीटर पर ही एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू है। ऐसे में बिना सबूत के ओवरस्पीडिंग को जिम्मेदार ठहराना कितना सही है?
सरकारी लापरवाही पर भी सवाल
भारत सरकार की सड़क सुरक्षा सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. कमल सोई ने सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम न उठाए जाने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अगर ओवरस्पीडिंग इतनी बड़ी समस्या है, तो इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए? पश्चिमी देशों में स्पीड रडार और इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम का इस्तेमाल होता है, जो वाहन की गति को नियंत्रित करता है। लेकिन भारत में व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की योजना भी अधूरी पड़ी है।
डॉ. सोई ने खराब रोड इंजीनियरिंग और वाहनों की फिटनेस में गड़बड़ी को भी हादसों का बड़ा कारण बताया। उनका कहना है कि सिर्फ ड्राइवरों को दोष देकर सरकार और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
नितिन गडकरी की नाराजगी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी कई बार अपने विभाग के अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई है। वह कहते हैं कि अफसरों की सुस्ती के कारण सड़क सुरक्षा के प्रयास नाकाम हो रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि इस सुस्ती पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
रिपोर्ट में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक रोड इंजीनियरिंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सख्त कानून लागू नहीं होंगे, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे।