22 अगस्त की रात, दिल्ली के सराय काले खां बस स्टैंड पर एक पिता के पांव तले जमीन खिसक गई। राजस्थान में ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने वाले सुरेश का 6 महीने का बेटा रातों-रात गायब हो गया। पूरा परिवार बस स्टैंड पर सो रहा था, लेकिन सुबह जब आंख खुली तो उनका सबसे छोटा बेटा गायब था। ये सिर्फ एक बच्चे की कहानी नहीं, बल्कि एक खतरनाक चाइल्ड ट्रैफिकिंग गैंग की सनसनीखेज सच्चाई है, जो दिल्ली से लेकर यूपी, उत्तराखंड, तेलंगाना और तमिलनाडु तक फैला है। दिल्ली पुलिस ने इस गैंग का पर्दाफाश करते हुए 6 बच्चों को बरामद किया और 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आइए, इस चौंकाने वाली कहानी को करीब से जानते हैं।
बच्चा कैसे गायब हुआ
सुरेश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रहने वाले हैं। पिछले 7-8 सालों से वे राजस्थान के बहरोड़ में एक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। अपनी पत्नी गुड़िया और चार बच्चों के साथ वहीं रहते हैं। 22 अगस्त को वे परिवार के साथ बांदा से बहरोड़ जाने के लिए निकले। पहले ट्रेन से दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचे, फिर वहां से सराय काले खां बस स्टैंड गए।
23 अगस्त की सुबह उनकी बस थी, इसलिए रात को खाना खाकर वे बस स्टैंड के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर सो गए। रात करीब 11 बजे जब नींद खुली, तो उनका 6 महीने का बेटा गायब था। सुरेश और गुड़िया ने उसे आसपास खोजा, लेकिन कुछ पता नहीं चला। आखिरकार, उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
सुरेश बताते हैं, “हमने पहले अनाउंसमेंट करवाया। पुलिस ने भी खूब खोजा, आसपास की झुग्गियों तक गए, लेकिन बच्चा नहीं मिला। फिर हमने FIR दर्ज कराई।” इस दौरान सुरेश को भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ। बच्चे की तलाश में दिल्ली में रुकना पड़ा, एक बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर इलाज में 4 हजार और रहने-खाने में 10 हजार से ज्यादा खर्च हो गए। इसके लिए उन्हें रिश्तेदार से कर्ज लेना पड़ा।
CCTV ने खोला राज, गैंग का पर्दाफाश
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी डॉ. हेमंत तिवारी बताते हैं, “CCTV फुटेज में दो संदिग्ध लोग बच्चे को ले जाते दिखे। हमने स्पेशल स्टाफ की टीम लगाई और तकनीकी जांच शुरू की। कुछ संदिग्ध नंबर मिले, जिनमें से एक नंबर आगरा के फतेहाबाद कस्बे से ट्रेस हुआ।”
पुलिस ने फतेहाबाद में छापेमारी कर वीरभान और कालीचरण को हिरासत में लिया। पूछताछ में उन्होंने बच्चा चोरी करने की बात कबूल की। उन्होंने बताया कि उनके रिश्तेदार रामबरण के कहने पर बच्चे को चुराया और आगरा के केके हॉस्पिटल में डॉ. कमलेश को सौंप दिया।
डीसीपी हेमंत बताते हैं, “हमारी टीम हॉस्पिटल पहुंची। एक इंस्पेक्टर ने हार्ट अटैक का बहाना बनाकर दाखिल हुआ और डॉ. कमलेश को पकड़ा। पूछताछ में उसने बताया कि बच्चा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सुंदर को बेच दिया गया।” सुंदर को राजस्थान भागते हुए 50 किमी तक पीछा करके पकड़ा गया।
गैंग का खौफनाक नेटवर्क
पुलिस की जांच में गैंग का सनसनीखेज नेटवर्क सामने आया। ये लोग बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर गरीब परिवारों को निशाना बनाते थे। नवजात बच्चों को चुराकर या कुछ मामलों में माता-पिता से खरीदकर, संतानहीन दंपतियों को 1.25 लाख से 7.5 लाख रुपये में फर्जी एडॉप्शन पेपर के साथ बेचते थे।
सुंदर ने बताया कि बच्चे को आगरा के राजनगर में रहने वाली कृष्णा शर्मा और प्रीति शर्मा को बेचा गया था। दोनों बहनें BAMS की पढ़ाई कर रही थीं। पुलिस ने उनके घर से सुरेश के बच्चे को बरामद किया। दोनों ने बताया कि वे रितु नाम की बिचौलिए के जरिए बच्चे को ज्योत्सना को बेचने वाली थीं। पुलिस ने रितु और ज्योत्सना को भी गिरफ्तार किया।
6 बच्चे बरामद, गैंग का नेटवर्क दिल्ली से तमिलनाडु तक
पुलिस ने 48 घंटे में सुरेश के बच्चे को रिकवर कर परिवार को सौंप दिया। इसके बाद आगरा और लखनऊ में छापेमारी कर 5 और बच्चों को बरामद किया गया। इनमें दो लड़कियां और तीन लड़के हैं, जिनमें एक 10 दिन का नवजात भी शामिल है। ये बच्चे आगरा, लखनऊ और नैनीताल में बेचे गए थे।
डीसीपी हेमंत बताते हैं, “आरोपियों ने बताया कि डॉ. कमलेश और अन्य डॉक्टरों के जरिए ये गैंग काम करता था। कुछ मामलों में माता-पिता ने खुद पैसों के लिए बच्चे बेचे। एक बच्चा 7.5 लाख में बेचा गया था।” गैंग का नेटवर्क दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, तेलंगाना और तमिलनाडु तक फैला है।
दिल्ली: चाइल्ड ट्रैफिकिंग का हॉटस्पॉट
मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वाली संस्था ‘आश्रय ट्रस्ट’ के वकील गौरव कश्यप कहते हैं, “दिल्ली चाइल्ड ट्रैफिकिंग का हॉटस्पॉट है। यहां हर जगह से लोग आते हैं, इसलिए तस्कर गरीब परिवारों को आसानी से निशाना बनाते हैं। बच्चों को चुराकर संतानहीन दंपतियों को बेचना नया ट्रेंड है।”
गौरव बताते हैं कि कुछ बच्चे ढाबों, फैक्ट्रियों में काम करने के लिए या लड़कियों को सेक्स वर्क और घरेलू काम में धकेला जाता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
ये दिल्ली में चाइल्ड ट्रैफिकिंग का पहला मामला नहीं है। इस साल अप्रैल में भी दिल्ली पुलिस ने एक गैंग का भंडाफोड़ किया था, जो बच्चों को राजस्थान और गुजरात के अस्पतालों में 5 से 10 लाख में बेचती थी। तब 35 बच्चों की तस्करी का खुलासा हुआ था।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, 2022 में देशभर में 2,878 नाबालिग बच्चों की तस्करी हुई। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली में बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए सरकार से रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई 6 महीने में पूरी होनी चाहिए।
क्या कहती है पुलिस
पुलिस ने 10 आरोपियों के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। डीसीपी हेमंत का कहना है, “जांच में और बच्चों की तस्करी का पता चल सकता है। हमारा मकसद गरीब परिवारों के बच्चों को वापस लाना है।”
