उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एमजीएम इंटर कॉलेज के शिक्षक रजनीश गंगवार उस समय विवादों में घिर गए, जब उनकी एक कविता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस कविता में उन्होंने कांवड़ यात्रा के बजाय शिक्षा और मानवता पर ध्यान देने की बात कही थी। कविता के बोल, “तुम कांवड़ लेने मत जाना, ज्ञान का दीप जलाना,” कुछ संगठनों को आपत्तिजनक लगे, जिसके बाद उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत FIR दर्ज की गई। यह लेख इस मामले के विभिन्न पहलुओं और इसके प्रभावों पर प्रकाश डालता है।
घटना का विवरण
रजनीश गंगवार, जो एमजीएम इंटर कॉलेज, बहेड़ी में इंटरमीडिएट (12वीं कक्षा) के छात्रों को पढ़ाते हैं, एक कवि भी हैं। स्कूल की प्रार्थना सभा के दौरान उन्होंने छात्रों को प्रेरित करने के लिए अपनी कविता “तुम कांवड़ लेने मत जाना” सुनाई। कविता में शिक्षा, मानवता, और सत्कर्मों को बढ़ावा देने का संदेश था। कविता के कुछ अंश इस प्रकार हैं:
कांवड़ लेने मत जाना तुम, ज्ञान का दीप जलाना
मानवता की सेवा करके, सच्चे मानव बन जाना
शिक्षा है जग की जननी, उसका दूध पियो तुम
सत्कर्मों का रहस्य बड़ा है, उसका रूप बुनो तुम
सत्य आचरण, प्रेम, परोपकार है सब जीवन के साथी
ज्ञान विवेक का दीप जलाओ, है यही तुम्हारा थाती
यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद कुछ हिंदू संगठनों, जैसे महाकाल सेवा समिति, ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। शक्ति गुप्ता नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि रजनीश ने कांवड़ यात्रा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की और समाज में “जहर घोलने” की कोशिश की।
पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई
शिकायत के आधार पर बहेड़ी थाना पुलिस ने रजनीश गंगवार के खिलाफ 14 जुलाई 2025 की रात को FIR दर्ज की। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2) का उल्लेख है, जो धार्मिक, क्षेत्रीय, या जातिगत आधार पर लोगों को भड़काने या अफवाह फैलाने के लिए लागू होती है। बहेड़ी के सर्कल ऑफिसर अरुण कुमार सिंह ने बताया कि वीडियो में रजनीश ने कांवड़ यात्रा के बारे में टिप्पणी की, जिसे कुछ लोगों ने आपत्तिजनक माना। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन रजनीश को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग ने इस मामले की जांच की और रजनीश से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया। उन्होंने बताया कि रजनीश का इरादा दुर्भावनापूर्ण नहीं था, और वीडियो पुराना है, जिसे सावन के महीने में जानबूझकर वायरल किया गया।
रजनीश गंगवार का पक्ष
रजनीश गंगवार ने अपनी सफाई में कहा कि उनकी कविता का उद्देश्य छोटे बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करना था, न कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना। उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो पुराना है और इसे सावन के महीने में जानबूझकर विवाद पैदा करने के लिए वायरल किया गया। रजनीश ने एक वीडियो संदेश में यह भी सवाल उठाया कि अगर उनकी कविता पर FIR हो सकती है, तो मंत्री ओ.पी. राजभर जैसे नेताओं की कांवड़ यात्रा पर टिप्पणियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है। कुछ लोगों ने रजनीश का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी कविता शिक्षा और मानवता को बढ़ावा देने वाली थी, और इसे गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। एक X उपयोगकर्ता ने लिखा, “जिस कविता में अंधविश्वास से दूर रहने और शिक्षा को अपनाने की बात कही गई, उसे गाने पर डॉ. रजनीश गंगवार पर मुकदमा दर्ज करना निंदनीय है।”
वहीं, कुछ हिंदू संगठनों और स्थानीय भाजपा नेताओं ने कविता को कांवड़ यात्रा और हिंदू भावनाओं का अपमान बताया। उन्होंने तर्क दिया कि कांवड़ यात्रा, जो सावन महीने में भगवान शिव के भक्तों द्वारा की जाती है, एक पवित्र परंपरा है, और इस पर टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है।
कांवड़ यात्रा का महत्व
कांवड़ यात्रा हर साल सावन महीने में आयोजित होने वाली एक प्रमुख धार्मिक यात्रा है, जिसमें लाखों शिवभक्त हरिद्वार और अन्य स्थानों से गंगा जल लेकर अपने स्थानीय शिव मंदिरों में चढ़ाते हैं। इस यात्रा को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, और दिल्ली जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाता है। यह यात्रा न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
कानूनी और सामाजिक प्रभाव
यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में निजता और निष्पक्ष सुनवाई के बीच संतुलन पर जोर दिया है, लेकिन इस मामले में धार्मिक भावनाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच तनाव देखा जा रहा है। रजनीश की कविता को कुछ लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में देखते हैं, जबकि अन्य इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला मानते हैं।
शिक्षा विभाग और पुलिस की कार्रवाई से यह सवाल उठता है कि क्या शिक्षकों को अपनी रचनात्मकता और संदेश देने की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया जा रहा है। साथ ही, यह भी चर्चा का विषय है कि क्या पुराने वीडियो को वायरल कर विवाद पैदा करना एक सुनियोजित प्रयास था।
रजनीश गंगवार का मामला भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक भावनाओं, और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच जटिल रिश्ते को दर्शाता है। उनकी कविता, जो शिक्षा और मानवता को बढ़ावा देने का प्रयास थी, कुछ संगठनों को धार्मिक परंपराओं के खिलाफ लगी। इस मामले ने न केवल बरेली, बल्कि पूरे देश में बहस छेड़ दी है। क्या यह कविता वाकई आपत्तिजनक थी, या इसे गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया? आप इस बारे में क्या सोचते हैं? अपनी राय साझा करें।